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मशरुम उत्पादन कर लाभ कमा सकते हैं प्रवासी कामगार
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उरई। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार योजना अभियान के अंतर्गत व्यवसायिक मशरूम उत्पादन विषय पर 35 प्रवासी मजदूरों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि विज्ञान केंद्र में किया गया। केंद्र के अध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार सिंह ने केंद्र की गतिविधियों और कोरोना संक्रमण से बचने के उपाय के बारे में चर्चा की।
फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. रजनीश चंद्र मिश्र ने कहा कि मशरूम एक शाकाहारी पौष्टिक भोज्य है, जिसको खाने से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। मशरूम में कैंसर, मधुमेह, मोटापा, दृष्टि दोष, हृदयरोग, उच्च रक्तचाप आदि बीमारियों से बचाव होता है। कृषि फसलों के व्यर्थ अवशेष जैसे पुआल, भूसा व गेहूं, चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, गन्ना तथा कई तरह की दालों तथा सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी आदि का समुचित प्रबंधन मशरूम उगने में किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इसके पैदावार के लिए खेत की जरूरत नहीं होती है। 18 बाई 15 बाई 10 फीट के कमरे से लगभग 50 हजार रुपये प्रति महीना कमा सकते है। मशरूम पैदावार प्रवासी श्रमिकों के लिए रोजगार का अच्छा साधन है। इस कार्य में घर के सभी पुरुषों व महिला सदस्यों का आसानी से सहयोग लिया जा सकता है। पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. अनुज कुमार गौतम ने मशरूम की उपयोगिता व बरसात में पशुओं में लगने वाले बीमारियां व उनके नियंत्रण के बारे में जानकारी दी।
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गृह वैज्ञानिक डॉ. राजकुमारी ने मशरूम से बनने वाले पकवान एवं मूल्य संवर्धन के बारे में बताया। समापन समारोह में डीडीएम नाबार्ड प्रकाश कुमार ने कहा कि मशरूम का व्यवसाय शुरू करने के अपना पंजीयन जिला उद्योग कार्यालय में करा लें ताकि उनका चयन सरकारी योजनाओं में हो सके। एसबीआई के मुख्य प्रबंधक राजीव पचौरी ने कहा कि योजनाओं का लाभ लेने के लिए नजदीकी बैंकों में अकाउंट खोल लें। प्रतिभागियों को इस प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र वितरित किया। इस दौरान अनुराग, नवाब खान, रामप्रताप, दयाशंकर, राजकुमार आदि रहे।
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फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. रजनीश चंद्र मिश्र ने कहा कि मशरूम एक शाकाहारी पौष्टिक भोज्य है, जिसको खाने से हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। मशरूम में कैंसर, मधुमेह, मोटापा, दृष्टि दोष, हृदयरोग, उच्च रक्तचाप आदि बीमारियों से बचाव होता है। कृषि फसलों के व्यर्थ अवशेष जैसे पुआल, भूसा व गेहूं, चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, गन्ना तथा कई तरह की दालों तथा सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी आदि का समुचित प्रबंधन मशरूम उगने में किया जा सकता है।
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उन्होंने बताया कि इसके पैदावार के लिए खेत की जरूरत नहीं होती है। 18 बाई 15 बाई 10 फीट के कमरे से लगभग 50 हजार रुपये प्रति महीना कमा सकते है। मशरूम पैदावार प्रवासी श्रमिकों के लिए रोजगार का अच्छा साधन है। इस कार्य में घर के सभी पुरुषों व महिला सदस्यों का आसानी से सहयोग लिया जा सकता है। पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. अनुज कुमार गौतम ने मशरूम की उपयोगिता व बरसात में पशुओं में लगने वाले बीमारियां व उनके नियंत्रण के बारे में जानकारी दी।
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गृह वैज्ञानिक डॉ. राजकुमारी ने मशरूम से बनने वाले पकवान एवं मूल्य संवर्धन के बारे में बताया। समापन समारोह में डीडीएम नाबार्ड प्रकाश कुमार ने कहा कि मशरूम का व्यवसाय शुरू करने के अपना पंजीयन जिला उद्योग कार्यालय में करा लें ताकि उनका चयन सरकारी योजनाओं में हो सके। एसबीआई के मुख्य प्रबंधक राजीव पचौरी ने कहा कि योजनाओं का लाभ लेने के लिए नजदीकी बैंकों में अकाउंट खोल लें। प्रतिभागियों को इस प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र वितरित किया। इस दौरान अनुराग, नवाब खान, रामप्रताप, दयाशंकर, राजकुमार आदि रहे।