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Jalaun News: बारिश से सात डिग्री लुढ़का पारा, फसलों पर आफत
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फोटो - 27 बारिश के बाद खेत में भरा पानी। संवाद
उरई। जिले में शुक्रवार सुबह से शुरू हुई रिमझिम बारिश ने जिले के मौसम का मिजाज बदल दिया। दिनभर हुई करीब 12 एमएम बारिश से अधिकतम तापमान सात डिग्री तक गिर गया। बृहस्पतिवार को 32 डिग्री रहा अधिकतम तापमान शुक्रवार को करीब 25 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। अचानक बदले मौसम से लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली, लेकिन खेतों में खड़ी फसलों को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई।
जिले में तिल, उड़द और मूंग की करीब 20 से 30 प्रतिशत फसल अभी खेतों में खड़ी या कटाई के इंतजार में है। बारिश के कारण खेतों में नमी बढ़ने और पानी भरने से इन फसलों के दाने खराब होने की आशंका है। किसानों का कहना है कि लगातार बारिश हुई तो तैयार फसल खेत में ही सड़ सकती है। वहीं, जिन किसानों ने फसल काटकर खेत में रखी है, उनके सामने भी उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
पकी धान की फसल पर मंडराया खतरा
जिले में धान की फसल भी कई क्षेत्रों में पककर तैयार हो चुकी है। किसान रामगोपाल, परमानंद, राजकुमार आदि का कहना है कि वह फसल की कटाई की तैयारी में जुटे थे, लेकिन बारिश ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी भरने और लगातार नमी रहने से कटाई प्रभावित हो सकती है। तेज बारिश या हवा के साथ पक चुकी धान की फसल के गिरने का भी खतरा है। इससे दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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रबी की बोआई के लिए बारिश फायदेमंद
हालांकि बारिश का दूसरा पहलू किसानों के लिए राहत देने वाला भी है। खाली होने वाले खेतों में नमी बढ़ने से रबी की फसलों की बोआई के लिए जमीन तैयार होने में मदद मिलेगी। खेतों में पर्याप्त नमी रहने से शुरुआती सिंचाई का खर्च भी कम हो सकता है। पशुपालकों और आम लोगों को भी मौसम ठंडा होने से राहत मिली है।
कीचड़ और जलभराव ने बढ़ाई परेशानी
लगातार बारिश के कारण शहर से लेकर गांवों तक कई स्थानों पर कीचड़ और जलभराव की स्थिति बन गई। कच्चे रास्तों पर आवागमन प्रभावित हुआ। बाजारों और प्रमुख मार्गों पर भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
मौसम वैज्ञानिक विस्टर जोशी ने बताया कि बारिश के चलते तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई है। शनिवार को भी बारिश की संभावना बनी हुई है। उन्होंने बताया कि पककर तैयार फसलों के लिए लगातार बारिश नुकसानदायक हो सकती है, जबकि रबी की बुवाई वाले खेतों में पर्याप्त नमी होने से किसानों को लाभ मिलेगा।
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जिले में तिल, उड़द और मूंग की करीब 20 से 30 प्रतिशत फसल अभी खेतों में खड़ी या कटाई के इंतजार में है। बारिश के कारण खेतों में नमी बढ़ने और पानी भरने से इन फसलों के दाने खराब होने की आशंका है। किसानों का कहना है कि लगातार बारिश हुई तो तैयार फसल खेत में ही सड़ सकती है। वहीं, जिन किसानों ने फसल काटकर खेत में रखी है, उनके सामने भी उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।
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पकी धान की फसल पर मंडराया खतरा
जिले में धान की फसल भी कई क्षेत्रों में पककर तैयार हो चुकी है। किसान रामगोपाल, परमानंद, राजकुमार आदि का कहना है कि वह फसल की कटाई की तैयारी में जुटे थे, लेकिन बारिश ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी भरने और लगातार नमी रहने से कटाई प्रभावित हो सकती है। तेज बारिश या हवा के साथ पक चुकी धान की फसल के गिरने का भी खतरा है। इससे दाने की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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रबी की बोआई के लिए बारिश फायदेमंद
हालांकि बारिश का दूसरा पहलू किसानों के लिए राहत देने वाला भी है। खाली होने वाले खेतों में नमी बढ़ने से रबी की फसलों की बोआई के लिए जमीन तैयार होने में मदद मिलेगी। खेतों में पर्याप्त नमी रहने से शुरुआती सिंचाई का खर्च भी कम हो सकता है। पशुपालकों और आम लोगों को भी मौसम ठंडा होने से राहत मिली है।
कीचड़ और जलभराव ने बढ़ाई परेशानी
लगातार बारिश के कारण शहर से लेकर गांवों तक कई स्थानों पर कीचड़ और जलभराव की स्थिति बन गई। कच्चे रास्तों पर आवागमन प्रभावित हुआ। बाजारों और प्रमुख मार्गों पर भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
मौसम वैज्ञानिक विस्टर जोशी ने बताया कि बारिश के चलते तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आई है। शनिवार को भी बारिश की संभावना बनी हुई है। उन्होंने बताया कि पककर तैयार फसलों के लिए लगातार बारिश नुकसानदायक हो सकती है, जबकि रबी की बुवाई वाले खेतों में पर्याप्त नमी होने से किसानों को लाभ मिलेगा।