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Jalaun News: स्मार्ट हो गई लाइब्रेरी, बढ़ गई छात्र-छात्राओं की संख्या
Wed, 24 Apr 2024 02:24 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Wed, 24 Apr 2024 02:24 AM IST
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उरई। शहर के राजकीय पुस्तकालय में स्मार्ट वाईफाई की निशुल्क व्यवस्था होने से युवाओं का रुझान फिर से लाइब्रेरी की तरफ बढ़ गया है। यहां छात्र-छात्राओं के अलावा अखबार और किताबें पढ़ने के लिए नियमित लोग आते है।
पिछले सालों से किताब पढ़ने वाले पाठकों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है लेकिन ऑनलाइन पढ़ने वालों की संख्या बढ़ गई है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले कई युवा राजकीय पुस्तकालय में जाकर निशुल्क पढ़ाई कर रहे हैं।
शहर में इकलौती राजकीय लाइब्रेरी में किताबों का जखीरा और वाई-फाई लैस है। यहां रोजाना आने वाले पाठकों की संख्या 15 से 16 है। जो रोजाना किताबों को तो नहीं लेकिन अखबार जरुर पढ़ने आते हैं। लेकिन जो विद्यार्थी हैं उनकी संख्या 55 से 60 के बीच है। जो रोजाना अपने कोर्स की किताबों के अध्ययन के लिए लाइब्रेरी पहुंचते हैं। जीआईसी के पास राजकीय जिला पुस्तकालय की स्थापना 1986-87 में की गई थी। वर्ष 2000 में यह पुस्तकालय नए भवन में शिफ्ट हो गया।
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इस पुस्तकालय में दूरदराज से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आने वाले छात्र छात्राएं आते है। सुबह शाम बुजुर्ग पत्रिकाओं, दैनिक समाचार पत्रों के साथ साहित्य पढ़ने आते हैं। पुस्तकालय में करीब 25 हजार पुस्तके हैं। यहां पर हिंदी, अंग्रेजी साहित्य, वेद पुराण की किताबों का संग्रह है।
सिक्योरिटी गार्ड हटने से समस्या बढ़ी
दिसंबर 2022 तक यहां सिक्योरिटी गार्ड के रूप में होमगार्ड डयूटी करते थे। एक जनवरी के बाद उनकी ड्यूटी यहां से हटा दी गई। इसके बाद दोबारा लौटकर नहीं आए। छह माह से पुस्तकालय बिना सिक्योरिटी गार्ड के चल रहा है। जबकि यहां छात्रों के अलावा छात्राएं भी आती है। इसके अलावा रात में भी पुस्तकालय की सुरक्षा को लेकर खतरा रहता है। जबकि पहले यहां पर छह होमगार्ड रोस्टर के अनुसार ड्यूटी करते थे।
वर्जन
राजकीय पुस्तकालय में अध्ययन के लिए आने वाले छात्र-छात्राओं में अधिकांश मध्यम वर्ग, किसान और मजदूरों के बच्चे है। जो प्राइवेट लाइब्रेरी में महंगी फीस देकर पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। उनके लिए यह पुस्तकालय संजीवनी का काम कर रहा है। -नितेंद्र सिंह, प्रभारी राजकीय पुस्तकालय
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फोटो-28-सौम्या।
शहर निवासी सौम्या तिवारी ने बताया कि लाइब्रेरी में सिर्फ अपने कोर्स की किताबें पढ़ने जाती हूं। बाकी किताबें जब समय होता है। तभी पढ़ती हूं। कोर्स से ही फुर्सत नहीं मिलती है।
फोटो-29-रामेंद्र सिंह।
रामेंद्र सिंह ने बताया कि किताबों को लाइब्रेरी में पढ़ने की जगह ऑनलाइन भी पढ़ लेते हैं। लाइब्रेरी में शांति का माहौल मिल जाता है। लेकिन कोर्स से समय नहीं मिलता है।
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पिछले सालों से किताब पढ़ने वाले पाठकों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है लेकिन ऑनलाइन पढ़ने वालों की संख्या बढ़ गई है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले कई युवा राजकीय पुस्तकालय में जाकर निशुल्क पढ़ाई कर रहे हैं।
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शहर में इकलौती राजकीय लाइब्रेरी में किताबों का जखीरा और वाई-फाई लैस है। यहां रोजाना आने वाले पाठकों की संख्या 15 से 16 है। जो रोजाना किताबों को तो नहीं लेकिन अखबार जरुर पढ़ने आते हैं। लेकिन जो विद्यार्थी हैं उनकी संख्या 55 से 60 के बीच है। जो रोजाना अपने कोर्स की किताबों के अध्ययन के लिए लाइब्रेरी पहुंचते हैं। जीआईसी के पास राजकीय जिला पुस्तकालय की स्थापना 1986-87 में की गई थी। वर्ष 2000 में यह पुस्तकालय नए भवन में शिफ्ट हो गया।
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इस पुस्तकालय में दूरदराज से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आने वाले छात्र छात्राएं आते है। सुबह शाम बुजुर्ग पत्रिकाओं, दैनिक समाचार पत्रों के साथ साहित्य पढ़ने आते हैं। पुस्तकालय में करीब 25 हजार पुस्तके हैं। यहां पर हिंदी, अंग्रेजी साहित्य, वेद पुराण की किताबों का संग्रह है।
सिक्योरिटी गार्ड हटने से समस्या बढ़ी
दिसंबर 2022 तक यहां सिक्योरिटी गार्ड के रूप में होमगार्ड डयूटी करते थे। एक जनवरी के बाद उनकी ड्यूटी यहां से हटा दी गई। इसके बाद दोबारा लौटकर नहीं आए। छह माह से पुस्तकालय बिना सिक्योरिटी गार्ड के चल रहा है। जबकि यहां छात्रों के अलावा छात्राएं भी आती है। इसके अलावा रात में भी पुस्तकालय की सुरक्षा को लेकर खतरा रहता है। जबकि पहले यहां पर छह होमगार्ड रोस्टर के अनुसार ड्यूटी करते थे।
वर्जन
राजकीय पुस्तकालय में अध्ययन के लिए आने वाले छात्र-छात्राओं में अधिकांश मध्यम वर्ग, किसान और मजदूरों के बच्चे है। जो प्राइवेट लाइब्रेरी में महंगी फीस देकर पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। उनके लिए यह पुस्तकालय संजीवनी का काम कर रहा है। -नितेंद्र सिंह, प्रभारी राजकीय पुस्तकालय
फोटो-28-सौम्या।
शहर निवासी सौम्या तिवारी ने बताया कि लाइब्रेरी में सिर्फ अपने कोर्स की किताबें पढ़ने जाती हूं। बाकी किताबें जब समय होता है। तभी पढ़ती हूं। कोर्स से ही फुर्सत नहीं मिलती है।
फोटो-29-रामेंद्र सिंह।
रामेंद्र सिंह ने बताया कि किताबों को लाइब्रेरी में पढ़ने की जगह ऑनलाइन भी पढ़ लेते हैं। लाइब्रेरी में शांति का माहौल मिल जाता है। लेकिन कोर्स से समय नहीं मिलता है।