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लेखपालों की समस्या, काम ज्यादा वेतन कम
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Wed, 24 Aug 2016 11:13 PM IST
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हड़ताल के मौके पर सभा को संबोधित करते अध्यक्ष रामप्रसाद।
- फोटो : अमर उजाला
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स्पष्ट न होने पर नाराजगी जताई गई। कहा गया कि लेखपाल काम ज्यादा करते हैं और वेतन कम मिलता है। उनसे अधिक वेतन तो एक एएनएम को मिलता है। राज्य कर्मियों की वेतन विसंगतियां दूर की जानी आवश्यक हैं। लेखपाल संघ को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद का भी समर्थन मिल गया। इस पर लेखपालों ने कहा कि अब वह ऊर्जा के साथ सरकार की
नीति का विरोध करा पाएंगे। लेखपाल संघ के अध्यक्ष शत्रुघन सिंह ने कहा सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में लेखपाल संवर्ग की अहम भूमिका है। लेखपाल पूरी मेहनत करता है इसके बावजूद वेतन कम मिल रहा है। वेतन विसंगतियां दूर करने के लिए सरकार से लगातार मांग की जाती रही लेकिन कोई फायदा
नहीं हुआ। छह सूत्री मांग पत्र 16 मार्च को दिया गया था लेकिन सरकार ने मांगें नहीं मानीं। राजस्व परिषद की ओर से 18 अप्रैल को उक्त मांगो की संस्तुति दे दी गई। भगवती शरण तिवारी ने कहा कि ग्रेड पे 2800 की मांग जायज है इसे भी सरकार ने नहीं माना जिससे लेखपाल कलम बंद करने को मजबूर हुए है। वेतन विसंगतियां दूर होना आवश्यक हैं। राज्य
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कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रामप्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि परिषद पूरी तरह से लेखपालों के साथ है। सरकार से जायज मांगें की गई हैं। जिला मंत्री हरीश राठौर ने कहा कि
कर्मचारी को अपने वेतन विसंगतियां दूर कराने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। इस मौके पर लाखन सिंह, लज्जाराम श्रीवास, अश्वनी कुमार गुप्ता, अखिलेश खरे, ओमनारायन, जानमुहम्मद, केश कुमार मिश्रा, विजय सिंह, रंजीत सिंह, रमेश चंद्र सिंघल, प्रेमनारायण, सुरेंद्र सिंह, परमात्मा शरण कौशलेंद्र श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
आय, जाति एवं अन्य प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे
लेखपाल काम छोड़कर हड़ताल पर चले गए हैं। दो दिन से कलम बंद हड़ताल का असर भी देखने को मिलने लगा है। जन सुविधा केंद्र से लेकर लोकवाणी केंद्र और तहसील में तमाम आवेदनों पर लेखपाल रिपोर्ट का ब्रेक लग गया है। हालात यह है कि आय जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा अन्य कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। सरकारी मशीनरी भी
परेशान नजर आ रही है। लेखपाल सरकार से छह सूत्री मांगों पर शासनादेश जारी न होने को लेकर आक्रोशित हैं। काली पट्टी बांध कर विरोध दर्ज करा चुके लेखपालों की जब बात नहीं बनी तो मंगलवार से वे आंदोलित हो गए हैं। दूसरे दिन भी लेखपालों के काम पर न लौटने से सरकारी कामकाज प्रभावित होने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में खुले जन सुविधा केंद्रों पर भी
इसका असर नजर आने लगा है। सरावन गांव में ही आय जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन तो लिए जा रहे हैं लेकिन समय पर प्रमाण पत्र देने के नाम पर हाथ खड़े किए जा रहे हैं। लेखपाल जब हड़ताल से लौटेंगे तभी काम काज शुरू हो पाएगा। लेखपाल की रिपोर्ट न लगने से अन्य प्रमाण पत्र भी जारी नहीं हो पा रहे है। सरकारी मशीनरी पर भी हड़ताल का असर है।
अधिकारी परेशान नजर आ रहे हैं। सहाव निवासी पिंटू का कहना है कि आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया तो स्पष्ट कह दिया गया कि जब तक लेखपाल हड़ताल पर हैं तब तक रिपोर्ट लग पाना मुश्किल है। ऐसे में प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सकेगा। एट निवासी शीलू को भी आय प्रमाण पत्र की जरूरत है लेकिन बन नहीं पा रहा है. कई ऐसे लोग जिन्हे नौकरी आदि में प्रमाण पत्र लगाने है वह अधिक परेशान हैं।
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नीति का विरोध करा पाएंगे। लेखपाल संघ के अध्यक्ष शत्रुघन सिंह ने कहा सरकार की विभिन्न योजनाओं और नीतियों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में लेखपाल संवर्ग की अहम भूमिका है। लेखपाल पूरी मेहनत करता है इसके बावजूद वेतन कम मिल रहा है। वेतन विसंगतियां दूर करने के लिए सरकार से लगातार मांग की जाती रही लेकिन कोई फायदा
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नहीं हुआ। छह सूत्री मांग पत्र 16 मार्च को दिया गया था लेकिन सरकार ने मांगें नहीं मानीं। राजस्व परिषद की ओर से 18 अप्रैल को उक्त मांगो की संस्तुति दे दी गई। भगवती शरण तिवारी ने कहा कि ग्रेड पे 2800 की मांग जायज है इसे भी सरकार ने नहीं माना जिससे लेखपाल कलम बंद करने को मजबूर हुए है। वेतन विसंगतियां दूर होना आवश्यक हैं। राज्य
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कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रामप्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि परिषद पूरी तरह से लेखपालों के साथ है। सरकार से जायज मांगें की गई हैं। जिला मंत्री हरीश राठौर ने कहा कि
कर्मचारी को अपने वेतन विसंगतियां दूर कराने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। इस मौके पर लाखन सिंह, लज्जाराम श्रीवास, अश्वनी कुमार गुप्ता, अखिलेश खरे, ओमनारायन, जानमुहम्मद, केश कुमार मिश्रा, विजय सिंह, रंजीत सिंह, रमेश चंद्र सिंघल, प्रेमनारायण, सुरेंद्र सिंह, परमात्मा शरण कौशलेंद्र श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
आय, जाति एवं अन्य प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे
लेखपाल काम छोड़कर हड़ताल पर चले गए हैं। दो दिन से कलम बंद हड़ताल का असर भी देखने को मिलने लगा है। जन सुविधा केंद्र से लेकर लोकवाणी केंद्र और तहसील में तमाम आवेदनों पर लेखपाल रिपोर्ट का ब्रेक लग गया है। हालात यह है कि आय जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा अन्य कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। सरकारी मशीनरी भी
परेशान नजर आ रही है। लेखपाल सरकार से छह सूत्री मांगों पर शासनादेश जारी न होने को लेकर आक्रोशित हैं। काली पट्टी बांध कर विरोध दर्ज करा चुके लेखपालों की जब बात नहीं बनी तो मंगलवार से वे आंदोलित हो गए हैं। दूसरे दिन भी लेखपालों के काम पर न लौटने से सरकारी कामकाज प्रभावित होने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में खुले जन सुविधा केंद्रों पर भी
इसका असर नजर आने लगा है। सरावन गांव में ही आय जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन तो लिए जा रहे हैं लेकिन समय पर प्रमाण पत्र देने के नाम पर हाथ खड़े किए जा रहे हैं। लेखपाल जब हड़ताल से लौटेंगे तभी काम काज शुरू हो पाएगा। लेखपाल की रिपोर्ट न लगने से अन्य प्रमाण पत्र भी जारी नहीं हो पा रहे है। सरकारी मशीनरी पर भी हड़ताल का असर है।
अधिकारी परेशान नजर आ रहे हैं। सहाव निवासी पिंटू का कहना है कि आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया तो स्पष्ट कह दिया गया कि जब तक लेखपाल हड़ताल पर हैं तब तक रिपोर्ट लग पाना मुश्किल है। ऐसे में प्रमाण पत्र जारी नहीं हो सकेगा। एट निवासी शीलू को भी आय प्रमाण पत्र की जरूरत है लेकिन बन नहीं पा रहा है. कई ऐसे लोग जिन्हे नौकरी आदि में प्रमाण पत्र लगाने है वह अधिक परेशान हैं।