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Jalaun News: फर्जी आधार से जमीन का कराया एग्रीमेंट, छह साल तीन माह की सजा

Sat, 26 Sep 2026 12:40 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 26 Sep 2026 12:40 AM IST
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Land agreement executed using a fake Aadhaar; sentenced to six years and three months in prison.
उरई। फर्जी आधार कार्ड तैयार कर खुद को जमीन का मालिक दर्शाते हुए एग्रीमेंट कराने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे की अदालत ने आरोपी राजू को दोषी करार दिया है। अदालत ने उसे छह साल तीन माह के कारावास और 7,500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।
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शहर कोतवाली क्षेत्र के इंद्रानगर निवासी लालबहादुर ने नौ मार्च 2020 को कोतवाली उरई में तहरीर देकर राजू निवासी इंद्रानगर, वृंदावन निवासी कांशीराम कॉलोनी और संतोष वर्मा निवासी कांशीराम कॉलोनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि आरोपियों ने फर्जी पहचान के आधार पर ग्राम खरका स्थित जमीन का एग्रीमेंट कराया।
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पुलिस की विवेचना में सामने आया कि वृंदावन ने स्वयं को सुरेश और संतोष वर्मा ने उमरारखेड़ा निवासी उमेश के नाम से फर्जी आधार कार्ड तैयार कराया था। इन आधार कार्डों में अपनी फोटो लगाकर दोनों ने खुद को जमीन का मालिक दर्शाते हुए ग्राम खरका स्थित जमीन का वादी के पक्ष में एग्रीमेंट कराया था।
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वहीं पुलिस के अनुसार, इस एग्रीमेंट में राजू ने भी वीरदास निवासी इंद्रानगर के नाम से कथित फर्जी आधार कार्ड बनवाकर गवाही की थी। दूसरे गवाह के रूप में वादी के भतीजे अजय कुमार निवासी जैसारीकला का नाम दर्ज कराया गया था।
मामले की वास्तविक जानकारी होने पर वादी ने पहले इकरारनामा निरस्त कराया। इसके बाद आरोपियों के वास्तविक नाम-पते की जानकारी के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया गया। विवेचना के दौरान पुलिस ने वादी, गवाहों और वास्तविक भू-स्वामियों के बयान दर्ज करने के साथ ही संबंधित अभिलेखीय साक्ष्य जुटाए।
पुलिस ने राजू समेत आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और कूटरचित दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करने की धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। राजू और वृंदावन के खिलाफ सात अगस्त 2020 को आरोप पत्र न्यायालय भेजा गया था। वहीं संतोष वर्मा के खिलाफ भी विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य मिलने का दावा करते हुए आरोप पत्र दाखिल किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान वादी समेत अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए। शुक्रवार को सुनवाई पूरी होने के बाद दोनों पक्षों की बहस और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर राजू ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक खरे ने उसे दोषी ठहराते हुए छह साल तीन माह के कारावास और 7,500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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