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Jalaun News: मेडिकल कॉलेज में रैगिंग की जांच पूरी, कुछ और छात्रों पर गिरेगी गाज
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उरई। राजकीय मेडिकल कॉलेज में जूनियर छात्र-छात्राओं के साथ रैगिंग और अभद्रता के मामले में कार्रवाई का दायरा बढ़ने जा रहा है। एंटी रैगिंग कमेटी ने विस्तृत जांच रिपोर्ट कॉलेज प्रशासन को सौंप दी है। रिपोर्ट के आधार पर कुछ अन्य छात्रों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।
मंगलवार को मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने विद्यार्थियों को अनजान नंबरों से आने वाली कॉल और वीडियो कॉल से सतर्क रहने की सलाह दी। अब तक सात छात्रों पर कार्रवाई की जा चुकी है। शनिवार की देर रात मेडिकल कॉलेज के जूनियर छात्र-छात्राओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इनमें सीनियर छात्रों पर गाली-गलौज करने और जूनियरों को परेशान करने के आरोप सामने आए थे।
छात्राओं के वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया था। वीडियो में जूनियर छात्राएं सीनियरों के व्यवहार को लेकर शिकायत करती नजर आईं थीं। लगातार वीडियो सामने आने से कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने जांच कराकर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।
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इससे पहले भी मेडिकल कॉलेज में विद्यार्थियों के बीच विवाद और मारपीट की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सितंबर में एमबीबीएस इंटर्न और नर्सिंग के विद्यार्थियों के बीच मारपीट का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद नर्सिंग विद्यार्थियों ने विरोध भी जताया था। अब रैगिंग से जुड़े वीडियो सामने आने और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की बात से कॉलेज प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने बताया कि एंटी रैगिंग कमेटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट मिल गई है। रिपोर्ट के आधार पर कुछ अन्य छात्रों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने जूनियर छात्र-छात्राओं को निर्देश दिया कि वे अपना मोबाइल नंबर अनजान लोगों से साझा न करें और किसी संदिग्ध व्यक्ति की कॉल या वीडियो कॉल पर संपर्क न करें। संदिग्ध नंबरों को ब्लॉक कर तत्काल कॉलेज प्रशासन या एंटी रैगिंग कमेटी को सूचना दें।
प्राचार्य ने कहा कि डिजिटल या ऑनलाइन माध्यम से रैगिंग करना भी अपराध की श्रेणी में आता है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर कॉलेज प्रशासन गंभीर है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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मंगलवार को मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने विद्यार्थियों को अनजान नंबरों से आने वाली कॉल और वीडियो कॉल से सतर्क रहने की सलाह दी। अब तक सात छात्रों पर कार्रवाई की जा चुकी है। शनिवार की देर रात मेडिकल कॉलेज के जूनियर छात्र-छात्राओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इनमें सीनियर छात्रों पर गाली-गलौज करने और जूनियरों को परेशान करने के आरोप सामने आए थे।
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छात्राओं के वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया था। वीडियो में जूनियर छात्राएं सीनियरों के व्यवहार को लेकर शिकायत करती नजर आईं थीं। लगातार वीडियो सामने आने से कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों की सुरक्षा और अनुशासन को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने जांच कराकर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।
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इससे पहले भी मेडिकल कॉलेज में विद्यार्थियों के बीच विवाद और मारपीट की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सितंबर में एमबीबीएस इंटर्न और नर्सिंग के विद्यार्थियों के बीच मारपीट का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद नर्सिंग विद्यार्थियों ने विरोध भी जताया था। अब रैगिंग से जुड़े वीडियो सामने आने और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की बात से कॉलेज प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर भी चर्चा शुरू हो गई है।
प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी ने बताया कि एंटी रैगिंग कमेटी की विस्तृत जांच रिपोर्ट मिल गई है। रिपोर्ट के आधार पर कुछ अन्य छात्रों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने जूनियर छात्र-छात्राओं को निर्देश दिया कि वे अपना मोबाइल नंबर अनजान लोगों से साझा न करें और किसी संदिग्ध व्यक्ति की कॉल या वीडियो कॉल पर संपर्क न करें। संदिग्ध नंबरों को ब्लॉक कर तत्काल कॉलेज प्रशासन या एंटी रैगिंग कमेटी को सूचना दें।
प्राचार्य ने कहा कि डिजिटल या ऑनलाइन माध्यम से रैगिंग करना भी अपराध की श्रेणी में आता है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर कॉलेज प्रशासन गंभीर है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।