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इंद्रपाल हटे, वीरपाल की ताजपोशी
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Sat, 03 Dec 2016 11:01 PM IST
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वीरपाल दादी
- फोटो : अमर उजाला
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एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह को हटा दिया गया। उनके स्थान पर वर्ष 1998 से 2000 तक जिलाध्यक्ष रहे वीरपाल दादी को फिर से जिलाध्यक्ष बना दिया गया है। वहीं पिछले दिनों पार्टी से निकाले गए विष्णुपाल सिंह उर्फ नन्हू राजा की भी घर
वापसी हो गई है। इस घटना को लेकर जिले की सपा की राजनीति गरमा गई है। करीब चार महीने पूर्व सपा जिलाध्यक्ष चौधरी धीरेंद्र सिंह यादव को हटाकर इंद्रजीत सिंह यादव को जिलाध्यक्ष बनाया गया था। चौधरी धीरेंद्र सिंह पर गुटबाजी का आरोप लगा था। इस पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रो.
रामगोपाल यादव और मुख्यमंत्री के अलावा शिवपाल यादव की सहमति से सपा की नींव कहे जाने वाले इंद्रजीत सिंह यादव को जिला अध्यक्ष बनाया गया था। तबसे पार्टी का ही एक तबका उनसे नाराज था। इस तबके का आरोप था कि वह लगातार कुछ विशेष नेताओं को संतुष्ट करने में लगे हैं। इसी
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बीच, विष्णुपाल सिंह समेत सपा के कुछ कद्दावर नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। यह कहा गया कि पार्टी ने यह निर्णय इंद्रजीत की रिपोर्टिंग पर ही लिया है। यह भी आरोप लगे कि एक बड़े नेता ने इसके लिए उकसाया था। तभी से तल्खियां बढ़ती गईं और अंतत: पार्टी के इस धड़े ने
ही सपा के आलाकमान से इंद्रजीत की भी शिकायत की। माना जा रहा है कि इस पर ही पार्टी के आला नेतृत्व ने उन्हें हटाकर वीरपाल दादी को एक बार फिर से पार्टी का जिलाध्यक्ष बना दिया है।
महागठबंधन ने दी महाचुनौती
इंद्रजीत सिंह यादव के जिलाध्यक्ष बनने और एक खेमा विशेष को संतुष्ट करने के आरोपों के बीच जिले में पार्टी के वरिष्ठ नेताआें का एक महागठबंधन तैयार हुआ था। सूत्रों के अनुसार इसमें चार लोग थे। इसमें सदर विधायक दयाशंकर, वीरपाल दादी, माधौगढ़ से सपा के प्रत्याशी लाखन
सिंह कुशवाहा और विष्णुपाल सिंह नन्हू राजा शामिल थे। सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों जिले में मुलायम सिंह संदेश रथयात्रा पहुंची थी। इसमेें सपा कार्यकारिणी के प्रमुख नेता क्रयमय नंदा आए थे। तब सदर विधायक का न तो बैनर लगने दिया गया और न ही उनका कहीं नाम था। तब स्टेज पर
ही सदर विधायक ने उनसे कहा कि मेरे विधानसभा क्षेत्र के कार्यक्रम में मेरा बैनर और नाम ही गायब है। उन्होंने पार्टी के नेतृत्व को शिकायत भी भेजी थी जिसमें विष्णुपाल सिंह को छोड़ अन्य दो लोगों ने भी अप्रत्यक्ष रूप से अपना समर्थन दिया था। इस शिकायत को पार्टी आला नेतृत्व ने काफी गंभीरता से लिया।
इंटरनल रिपोर्ट रही प्रतिकूल
सदर विधायक की शिकायत पर सपा की ओर से एक इंटरनल रिपोर्ट मंगाई गई। पार्टी की एक टीम गुप्त रूप से जिले में आई और उसने अपनी रिपोर्ट पार्टी आला कमान को दी। इसी आधार पर पार्टी आला नेतृत्व ने फैसला किया और अंतत: इंद्रजीत सिंह को पार्टी के जिलाध्यक्ष पद से हटा दिया गया।
गोले दागकर मनाई खुशी
समाजवादी पार्टी का जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव दादी को बनाए जाने से समर्थकों में खुशी है। स्टेट बैंक के सामने एक बैठक शनिवार को हुई। इसमें सपाइयों ने मिठाई बांटकर व गोले दागकर हर्ष व्यक्त किया गया। कार्यकर्ताओें ने कहा कि दादी के अध्यक्ष बनने से संगठन को मजबूती मिलेगी,
वहीं, अधिक से अधिक युवा भी पार्टी से जुडे़ंगे। बैठक में संजय साहनी, लोचन सिंह खरुसा, मोहम्मद तारिक, रविंद्र सिंह यादव, शिवराम कुश्वाहा, कमलेश राठौर, दीपू यादव, अशोक गुप्ता, मोहम्मद शाहिद, मोहित सिंह, प्रताप यादव आदि मौजूद रहे।
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वापसी हो गई है। इस घटना को लेकर जिले की सपा की राजनीति गरमा गई है। करीब चार महीने पूर्व सपा जिलाध्यक्ष चौधरी धीरेंद्र सिंह यादव को हटाकर इंद्रजीत सिंह यादव को जिलाध्यक्ष बनाया गया था। चौधरी धीरेंद्र सिंह पर गुटबाजी का आरोप लगा था। इस पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रो.
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रामगोपाल यादव और मुख्यमंत्री के अलावा शिवपाल यादव की सहमति से सपा की नींव कहे जाने वाले इंद्रजीत सिंह यादव को जिला अध्यक्ष बनाया गया था। तबसे पार्टी का ही एक तबका उनसे नाराज था। इस तबके का आरोप था कि वह लगातार कुछ विशेष नेताओं को संतुष्ट करने में लगे हैं। इसी
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बीच, विष्णुपाल सिंह समेत सपा के कुछ कद्दावर नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। यह कहा गया कि पार्टी ने यह निर्णय इंद्रजीत की रिपोर्टिंग पर ही लिया है। यह भी आरोप लगे कि एक बड़े नेता ने इसके लिए उकसाया था। तभी से तल्खियां बढ़ती गईं और अंतत: पार्टी के इस धड़े ने
ही सपा के आलाकमान से इंद्रजीत की भी शिकायत की। माना जा रहा है कि इस पर ही पार्टी के आला नेतृत्व ने उन्हें हटाकर वीरपाल दादी को एक बार फिर से पार्टी का जिलाध्यक्ष बना दिया है।
महागठबंधन ने दी महाचुनौती
इंद्रजीत सिंह यादव के जिलाध्यक्ष बनने और एक खेमा विशेष को संतुष्ट करने के आरोपों के बीच जिले में पार्टी के वरिष्ठ नेताआें का एक महागठबंधन तैयार हुआ था। सूत्रों के अनुसार इसमें चार लोग थे। इसमें सदर विधायक दयाशंकर, वीरपाल दादी, माधौगढ़ से सपा के प्रत्याशी लाखन
सिंह कुशवाहा और विष्णुपाल सिंह नन्हू राजा शामिल थे। सूत्र बताते हैं कि पिछले दिनों जिले में मुलायम सिंह संदेश रथयात्रा पहुंची थी। इसमेें सपा कार्यकारिणी के प्रमुख नेता क्रयमय नंदा आए थे। तब सदर विधायक का न तो बैनर लगने दिया गया और न ही उनका कहीं नाम था। तब स्टेज पर
ही सदर विधायक ने उनसे कहा कि मेरे विधानसभा क्षेत्र के कार्यक्रम में मेरा बैनर और नाम ही गायब है। उन्होंने पार्टी के नेतृत्व को शिकायत भी भेजी थी जिसमें विष्णुपाल सिंह को छोड़ अन्य दो लोगों ने भी अप्रत्यक्ष रूप से अपना समर्थन दिया था। इस शिकायत को पार्टी आला नेतृत्व ने काफी गंभीरता से लिया।
इंटरनल रिपोर्ट रही प्रतिकूल
सदर विधायक की शिकायत पर सपा की ओर से एक इंटरनल रिपोर्ट मंगाई गई। पार्टी की एक टीम गुप्त रूप से जिले में आई और उसने अपनी रिपोर्ट पार्टी आला कमान को दी। इसी आधार पर पार्टी आला नेतृत्व ने फैसला किया और अंतत: इंद्रजीत सिंह को पार्टी के जिलाध्यक्ष पद से हटा दिया गया।
गोले दागकर मनाई खुशी
समाजवादी पार्टी का जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव दादी को बनाए जाने से समर्थकों में खुशी है। स्टेट बैंक के सामने एक बैठक शनिवार को हुई। इसमें सपाइयों ने मिठाई बांटकर व गोले दागकर हर्ष व्यक्त किया गया। कार्यकर्ताओें ने कहा कि दादी के अध्यक्ष बनने से संगठन को मजबूती मिलेगी,
वहीं, अधिक से अधिक युवा भी पार्टी से जुडे़ंगे। बैठक में संजय साहनी, लोचन सिंह खरुसा, मोहम्मद तारिक, रविंद्र सिंह यादव, शिवराम कुश्वाहा, कमलेश राठौर, दीपू यादव, अशोक गुप्ता, मोहम्मद शाहिद, मोहित सिंह, प्रताप यादव आदि मौजूद रहे।