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Jalaun News: गोबर खरीदे सरकार तो खत्म हो अन्ना समस्या
Sun, 06 Aug 2023 01:22 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Sun, 06 Aug 2023 01:22 AM IST
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कोंच। एक निजी कार्यक्रम में कोंच पहुंचे भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानुप्रताप सिंह ने अन्ना प्रथा को लेकर सरकार पर निशाना साधा। कहा कि गांव-गांव गोशालाएं खोलने से कुछ नहीं होगा, अगर अन्ना प्रथा से छुटकारा पाना है तो सरकार को ठोस कार्ययोजना बनानी होगी। जिस दिन सरकार पच्चीस 25 किलो के हिसाब से गोबर को खरीदना शुरू कर देगी उसी क्षण से अन्ना प्रथा से छुटकारा मिल जाएगा।
तहसील परिसर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि गांव में स्थित गोशालाओं में सिर्फ पैसों का बंदरबांट हो रहा है, व्यवस्थाएं अत्यंत खराब हैं। अन्ना पशुओं से किसान परेशान हैं। अगर इस समस्या का शीघ्र ही समाधान नहीं खोजा गया तो पांच साल बाद लोगों के खाने के लिए अनाज नहीं होगा क्योंकि ये अन्ना मवेशी सब कुछ चटकर जाएंगे। उन्होंने केंद्र की मोदी और सूबे की योगी सरकार पर हमलावर होते हुए कहा कि न तो किसानों की बिजली फ्री हुई और न ही किसानों के कर्जे माफ हुए। अन्ना जानवर और पैदा हो गए, ये समस्या दिनों दिन और भी विकराल होती जा रही है। सरकार को जल्द अन्ना पशुओं पर अंकुश लगाने के लिए नीति निर्धारित करनी चाहिए और इसका व्यवसायीकरण होना चाहिए। जब सरकार गोबर खरीदेगी तो युवा पीढ़ी व ग्रामीण व्यावसायिक तरीके से मवेशियों का संरक्षण करेंगे। इससे जहां युवाओं को रोजगार मिलेगा वहीं ग्रामीणों को भी आर्थिक मदद मिलेगी और सभी व्यवस्था बनाने में सरकार से जुड़ेंगे।
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तहसील परिसर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि गांव में स्थित गोशालाओं में सिर्फ पैसों का बंदरबांट हो रहा है, व्यवस्थाएं अत्यंत खराब हैं। अन्ना पशुओं से किसान परेशान हैं। अगर इस समस्या का शीघ्र ही समाधान नहीं खोजा गया तो पांच साल बाद लोगों के खाने के लिए अनाज नहीं होगा क्योंकि ये अन्ना मवेशी सब कुछ चटकर जाएंगे। उन्होंने केंद्र की मोदी और सूबे की योगी सरकार पर हमलावर होते हुए कहा कि न तो किसानों की बिजली फ्री हुई और न ही किसानों के कर्जे माफ हुए। अन्ना जानवर और पैदा हो गए, ये समस्या दिनों दिन और भी विकराल होती जा रही है। सरकार को जल्द अन्ना पशुओं पर अंकुश लगाने के लिए नीति निर्धारित करनी चाहिए और इसका व्यवसायीकरण होना चाहिए। जब सरकार गोबर खरीदेगी तो युवा पीढ़ी व ग्रामीण व्यावसायिक तरीके से मवेशियों का संरक्षण करेंगे। इससे जहां युवाओं को रोजगार मिलेगा वहीं ग्रामीणों को भी आर्थिक मदद मिलेगी और सभी व्यवस्था बनाने में सरकार से जुड़ेंगे।
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