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कदौरा सीएससी में सीबीसी जांच छह माह से बंद, मरीज परेशान
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कदौरा सीएससी में बद पड़ी सीबीसी जांच मशीन
- फोटो : ORAI
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कदौरा। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भले ही जिला प्रशासन बडे़-बडे़ दावे कर रहा हो। पर हकीकत कुछ और ही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पूर्णता बदहाल नजर आ रही है। स्थिति यह है कि कदौरा पीएचसी में स्थापित सीबीसी मशीन पिछले छह माह से खराब है। इस कारण मरीजों को जांच के लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। मरीज व तीमारदारों का आरोप है कि कई बार जांच शुरू करने की मांग की गई पर अब तक जांचे शुरू नहीं हुई।
बता दें कि कस्बे की पीएचसी में रोजना लगभग दो- तीन सौ मरीज उपचार के लिए पहुंचते है। इस पीएचसी में क्षेत्र के लगभग दो सौ गांव के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पूर्णता निर्भर है। आठ माह पहले यहां के मरीजों को जांच की सुविधा मिल सके, इसके लिनए पैथॉलाजी में सीबीसी मशीन स्थिापित की गई थी। इस मशीन के बाद ग्रामीणों को लगा था कि उन्हें अब बेहतर उपचार मिलने लगेगा। पर इस मशीन की सुविधा चंद्र दिनों तक ही मिल सकी। पिछले छह माह से सीबीसी मशीन बंद है। डाक्टरों का कहना है कि उनके पास केमिकल का अभाव है जिससे जांचे नहीं हो पा रही है। मशीन बंद होने से क्षेत्र के मरीजों को निशुल्क जांच का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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सीबीसी मशीन से होने वाली जांचे
डाक्टरों ने बताया कि सीबीसी यानी संपूर्ण रक्त गणना की इस मशीन की मदद से खुन की सभी प्रकार की जांच की जाती है। इसमें आरबीसी, डब्ल्यूबीसी, हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट्स व अन्य जांचे होती है। सीबीसी में खून में उपस्थित कोशिकाओं की गिनती की जांच होती है। जिससे यह पता चलता है कि खून में कोशिकाओं कि संख्या सामान्य सीमा से कम है या अधिक।
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निरीक्षण के बाद भी नहीं सुधरी पीएचसी की स्थिति
बता दें कि पिछले सप्ताह अपर निदेशक झांसी अल्पना बरतारिया व चार दिन पहले सीएमओ नरेंद्र कुमार शर्मा ने पीएचसी का निरीक्षण किया था। दोनों ही अधिकारियों को पीएचसी में बंद पड़ी मशीन नजर नहीं आई। ग्रामीणों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान कई अधिकारियों से शिकायत भी की गई, लेकिन अब तक किसी ने सुध नहीं ली।
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क्या कहते है जिम्मेदार
चिकित्सा अधीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार केमिकल की आपूर्ति के लिए मौखिक व लिखित रूप से बताया जा चुका है। लेकिन अब तक समस्या का हल नहीं हुआ। केमिकल न मिलने से मशीन बंद पड़ी है।
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क्या कहते है मरीज
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फोटो7 विजय बहादुर
अस्पताल किसी काम का नही
कस्बे के विजय बहादुर ने बताया कि सरकारी अस्पताल किसी मतलब का नहीं है। डाक्टर बुखार नाप कर दवा दे देते हैं। ग्रामीण क्षेत्र होने की वजह से प्राइवेट में भी अच्छी जांच की कोई व्यवस्था नहीं है।
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फोटो8 हरिबाबू
बाहर से जांच में अधिक खर्च हुआ
सीएचसी में उपचार के लिए आए बागी निवासी बुखार पीड़ित हरिबाबू साहू ने बताया कि सीएचसी में सीबीसी मशीन खराब है। इससे प्राइवेट लैब की जांच में कराई थी, जिससे उनका काफी पैसा खर्च हुआ है।
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बता दें कि कस्बे की पीएचसी में रोजना लगभग दो- तीन सौ मरीज उपचार के लिए पहुंचते है। इस पीएचसी में क्षेत्र के लगभग दो सौ गांव के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पूर्णता निर्भर है। आठ माह पहले यहां के मरीजों को जांच की सुविधा मिल सके, इसके लिनए पैथॉलाजी में सीबीसी मशीन स्थिापित की गई थी। इस मशीन के बाद ग्रामीणों को लगा था कि उन्हें अब बेहतर उपचार मिलने लगेगा। पर इस मशीन की सुविधा चंद्र दिनों तक ही मिल सकी। पिछले छह माह से सीबीसी मशीन बंद है। डाक्टरों का कहना है कि उनके पास केमिकल का अभाव है जिससे जांचे नहीं हो पा रही है। मशीन बंद होने से क्षेत्र के मरीजों को निशुल्क जांच का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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सीबीसी मशीन से होने वाली जांचे
डाक्टरों ने बताया कि सीबीसी यानी संपूर्ण रक्त गणना की इस मशीन की मदद से खुन की सभी प्रकार की जांच की जाती है। इसमें आरबीसी, डब्ल्यूबीसी, हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट्स व अन्य जांचे होती है। सीबीसी में खून में उपस्थित कोशिकाओं की गिनती की जांच होती है। जिससे यह पता चलता है कि खून में कोशिकाओं कि संख्या सामान्य सीमा से कम है या अधिक।
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निरीक्षण के बाद भी नहीं सुधरी पीएचसी की स्थिति
बता दें कि पिछले सप्ताह अपर निदेशक झांसी अल्पना बरतारिया व चार दिन पहले सीएमओ नरेंद्र कुमार शर्मा ने पीएचसी का निरीक्षण किया था। दोनों ही अधिकारियों को पीएचसी में बंद पड़ी मशीन नजर नहीं आई। ग्रामीणों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान कई अधिकारियों से शिकायत भी की गई, लेकिन अब तक किसी ने सुध नहीं ली।
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क्या कहते है जिम्मेदार
चिकित्सा अधीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि विभाग के उच्च अधिकारियों को कई बार केमिकल की आपूर्ति के लिए मौखिक व लिखित रूप से बताया जा चुका है। लेकिन अब तक समस्या का हल नहीं हुआ। केमिकल न मिलने से मशीन बंद पड़ी है।
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क्या कहते है मरीज
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फोटो7 विजय बहादुर
अस्पताल किसी काम का नही
कस्बे के विजय बहादुर ने बताया कि सरकारी अस्पताल किसी मतलब का नहीं है। डाक्टर बुखार नाप कर दवा दे देते हैं। ग्रामीण क्षेत्र होने की वजह से प्राइवेट में भी अच्छी जांच की कोई व्यवस्था नहीं है।
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फोटो8 हरिबाबू
बाहर से जांच में अधिक खर्च हुआ
सीएचसी में उपचार के लिए आए बागी निवासी बुखार पीड़ित हरिबाबू साहू ने बताया कि सीएचसी में सीबीसी मशीन खराब है। इससे प्राइवेट लैब की जांच में कराई थी, जिससे उनका काफी पैसा खर्च हुआ है।