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कुपोषण से मुक्ति दिलाएगी पोषण वाटिका
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उरई। कृषि विज्ञान केंद्र में मंगलवार को स्वयं सहायता समूह की महिलाओं एवं कृषक महिलाओं को पोषण वाटिका के बारे में प्रशिक्षण दिया गया।
इस दौरान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि कुपोषण मुक्त रखने के लिए हर घर में एक पोषण वाटिका का होना आवश्यक है, ताकि सभी को संतुलित आहार मिलता रहे। उन्होंने अनुसूचित जाति की महिलाओं को खरीफ सब्जी बीज किट एवं सहजन के पौध का भी वितरण किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. राजकुमारी ने कहा कि महिलाओं को अपने दैनिक आहार में फल एवं सब्जियों को शामिल करना चाहिए। इससे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। संतुलित आहार के लिए रोजाना 100 ग्राम फल एवं 300 ग्राम सब्जियां खानी चाहिए।
पोषण वाटिका लगाकर आवश्यकतानुसार दैनिक उपयोग में आने वाली साग सब्जी की पैदावार स्वयं जैविक विधि से अपने घर पर आसानी से कर सकते हैं। पोषण वाटिका अपने घर के आसपास भी भूमि की उपलब्धता के अनुसार आसानी से तैयार किया जा सकता है।
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डॉ. राजकुमारी ने बताया कि पोषण वाटिका के एक किनारे पर खाद के लिए गड्ढा बनाना चाहिए, ताकि घर का कचरा व पौधों का अवशेष आदि एकत्र कर खाद बनाई जा सके। पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. अनुज गौतम ने महिलाओं को पशुओं के रखरखाव एवं उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में गांव मुसमरिया, खल्ला, महेवा, रूरामल्लू से संगीता, गुड्डी, मीरा, कल्पना, शांति व जयदेवी आदि मौजूद रहीं।
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इस दौरान केंद्र के अध्यक्ष व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि कुपोषण मुक्त रखने के लिए हर घर में एक पोषण वाटिका का होना आवश्यक है, ताकि सभी को संतुलित आहार मिलता रहे। उन्होंने अनुसूचित जाति की महिलाओं को खरीफ सब्जी बीज किट एवं सहजन के पौध का भी वितरण किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिक डॉ. राजकुमारी ने कहा कि महिलाओं को अपने दैनिक आहार में फल एवं सब्जियों को शामिल करना चाहिए। इससे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। संतुलित आहार के लिए रोजाना 100 ग्राम फल एवं 300 ग्राम सब्जियां खानी चाहिए।
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पोषण वाटिका लगाकर आवश्यकतानुसार दैनिक उपयोग में आने वाली साग सब्जी की पैदावार स्वयं जैविक विधि से अपने घर पर आसानी से कर सकते हैं। पोषण वाटिका अपने घर के आसपास भी भूमि की उपलब्धता के अनुसार आसानी से तैयार किया जा सकता है।
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डॉ. राजकुमारी ने बताया कि पोषण वाटिका के एक किनारे पर खाद के लिए गड्ढा बनाना चाहिए, ताकि घर का कचरा व पौधों का अवशेष आदि एकत्र कर खाद बनाई जा सके। पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. अनुज गौतम ने महिलाओं को पशुओं के रखरखाव एवं उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में गांव मुसमरिया, खल्ला, महेवा, रूरामल्लू से संगीता, गुड्डी, मीरा, कल्पना, शांति व जयदेवी आदि मौजूद रहीं।