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लगातार सातवें दिन लोग भूखे-प्यासे कतार में घंटों खड़े रहे
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Wed, 16 Nov 2016 11:05 PM IST
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बैंक के बाहर बैठी महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
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500 व 1000 के नोट बंद होने को लेकर सातवें दिन बुधवार को भी नगर में स्थित बैंकों में अफरातफरी का माहौल रहा। अधिकांश बैंकों में कैश खत्म होने से लोग मायूस होकर लौटते नजर आए। नगर में स्थित किसी भी बैंक के एटीएम चालू न होने से लोगों में काफ ी बेचैनी रही। हालत ये रही कि लोग दिन भर बैंक की दौड़ लगाते दिखे। बावजूद इसके समस्या का
समाधान नहीं होने से निराश होकर लौटते दिखे। बड़े नोटों की बंदी को लेकर मंगलवार को भी भारी संख्या में लोग सुबह से ही बिना चाय नाश्ता किए बैंकों के बाहर लाइन में नजर आए। लोगों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा। दोपहर दो बजे स्टेट बैंक के बाहर लाइन में खड़ी मुनीष खातून, रेशमा खातून, सावित्री देवी, मंगला देवी, बुढ़न देवी आदि ने बताया कि वे
अपने-अपने गांव से सुबह 6 बजे ही बिना चाय नाश्ता किए नोट बदलने की आशा में निकल आईं थी। वह सुबह सात बजे से ही लाइन में खड़ी हैं। अभी तक उनका नंबर नहीं आया है। बताया कि फु टकर रुपयों के अभाव में वह अपनी रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी नहीं कर पा रही हैं। विमला देवी, जमुना देवी आदि ने बताया कि वह तो अपने जीवन में पहली बार बैंक
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आईं है। घर पर पति हैं नहीं और फु टकर रुपये भी नहीं हैं। ऐसे में मजबूरी में उन्हें रुपये बदलवाने के लिए बैंक आना पड़ा है। पोस्ट आफिस में अपनी बेटी को गोद में उठाए व बगल में पत्नी का पर्स टांगे उरगांव निवासी शशिकांत अवस्थी ने बताया कि वे सुबह से ही भूखे प्यासे पत्नी व पांच माह की बच्ची को लेकर बैंक आए हैं। उनकी पत्नी लाइन में खड़ी है। इसलिए उन्हें
बच्ची व पर्स लेना पड़ा है। दोपहर के दो बजे गए हैं, अभी तक उनका नंबर नहीं आया है। उधर, दोपहर होते-होते अधिकांश बैंकों व पोस्ट आफिस में कैश खत्म होने से सिर्फ रुपये जमा ही किए गए। इसके अलावा ना तो रुपयों की निकासी की गई और न ही नोट बदले गए। इसके अलावा स्टेट बैंक, सेंट्रल बैंक व एचडीएफसी व एक्सिस बैंक में दिन भर रुपयों की जमा निकासी की गई।
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समाधान नहीं होने से निराश होकर लौटते दिखे। बड़े नोटों की बंदी को लेकर मंगलवार को भी भारी संख्या में लोग सुबह से ही बिना चाय नाश्ता किए बैंकों के बाहर लाइन में नजर आए। लोगों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा। दोपहर दो बजे स्टेट बैंक के बाहर लाइन में खड़ी मुनीष खातून, रेशमा खातून, सावित्री देवी, मंगला देवी, बुढ़न देवी आदि ने बताया कि वे
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अपने-अपने गांव से सुबह 6 बजे ही बिना चाय नाश्ता किए नोट बदलने की आशा में निकल आईं थी। वह सुबह सात बजे से ही लाइन में खड़ी हैं। अभी तक उनका नंबर नहीं आया है। बताया कि फु टकर रुपयों के अभाव में वह अपनी रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी नहीं कर पा रही हैं। विमला देवी, जमुना देवी आदि ने बताया कि वह तो अपने जीवन में पहली बार बैंक
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आईं है। घर पर पति हैं नहीं और फु टकर रुपये भी नहीं हैं। ऐसे में मजबूरी में उन्हें रुपये बदलवाने के लिए बैंक आना पड़ा है। पोस्ट आफिस में अपनी बेटी को गोद में उठाए व बगल में पत्नी का पर्स टांगे उरगांव निवासी शशिकांत अवस्थी ने बताया कि वे सुबह से ही भूखे प्यासे पत्नी व पांच माह की बच्ची को लेकर बैंक आए हैं। उनकी पत्नी लाइन में खड़ी है। इसलिए उन्हें
बच्ची व पर्स लेना पड़ा है। दोपहर के दो बजे गए हैं, अभी तक उनका नंबर नहीं आया है। उधर, दोपहर होते-होते अधिकांश बैंकों व पोस्ट आफिस में कैश खत्म होने से सिर्फ रुपये जमा ही किए गए। इसके अलावा ना तो रुपयों की निकासी की गई और न ही नोट बदले गए। इसके अलावा स्टेट बैंक, सेंट्रल बैंक व एचडीएफसी व एक्सिस बैंक में दिन भर रुपयों की जमा निकासी की गई।