{"_id":"620011a10c8db567e474d30f","slug":"election-sp-evm-party-up-orai-news-knp679229799","type":"story","status":"publish","title_hn":"कालपी विधानसभा चुनाव की वोटिंग में इस बार नहीं दिखेगा कमल का फूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कालपी विधानसभा चुनाव की वोटिंग में इस बार नहीं दिखेगा कमल का फूल
विज्ञापन
कालपी। लगभग 41 साल में यह पहला मौका होगा जब विधानसभा चुनाव की वोटिंग में भाजपा का चुनाव निशान कमल फूल नहीं दिखाई देगा। भाजपा के गठन के बाद अब तक हुए दस विधानसभा चुनावों में यहां भाजपा का चुनाव निशान कमल का फूल रहता था। पर पहली बार भाजपा ने यह सीट गठबंधन में अपने सहयोगी निषाद पार्टी को दी है। इसलिए यहां भाजपा की जगह निषाद पार्टी का चुनाव चिह्न नजर आएगा।
बता दें कि बड़े राजनीतिक दलों के चुनाव निशान भी चर्चित होते हैं। 6 अप्रैल 1980 को भाजपा के गठन के बाद भाजपा को चुनाव निशान के तौर पर कमल का फूल आवंटित हुआ था। धीरे-धीरे यह चुनाव निशान लोकप्रिय होकर आम जनता तक पहुंच गया। बैलट पेपर से लेकर ईवीएम तक में कमल निशान का प्रयोग हुआ। इसी प्रकार सपा का चुनाव निशान साइकिल , बसपा का हाथी व कांग्रेस का पंजा भी आम जनमानस में लोकप्रिय है।
अब लगभग 41 साल बाद भाजपा ने गठबंधन में कालपी सीट अपने सहयोगी दल निषाद पार्टी को दी है। निषाद पार्टी अभी यूपी में एक छोटा दल माना जाता है, इनका चुनाव निशान भोजन से भरी थाली है। इसलिए अब यह तय है कि इस बार ईवीएम में मतदाताओं को वोटिंग के दौरान भाजपा का कमल फूल निशान नहीं नजर आएगा।
विज्ञापन
-------
सहयोगी दल का चुनाव चिह्न की पहचान बनेगी मुश्किल
भाजपा के रणनीतिकारों का कहना है कि यह सच है कि कमल फूल निशान गांवों के एक- एक मतदाता को पता है। भोजन से भरी थाली का चुनाव निशान अभी चर्चित नहीं है। अभी मतदान में लगभग 15 दिन हैं। भाजपा का बूथ स्तर पर संगठन बहुत मजबूत है। पूरी कोशिश की जा रही है कि बूथ के कार्यकर्ताओं के सहयोग से वोटिंग के पहले गठबंधन के सहयोगी निषाद पार्टी का चुनाव निशान भोजन से भरी थाली एक एक मतदाता तक पहुंचा दें।
विज्ञापन
बता दें कि बड़े राजनीतिक दलों के चुनाव निशान भी चर्चित होते हैं। 6 अप्रैल 1980 को भाजपा के गठन के बाद भाजपा को चुनाव निशान के तौर पर कमल का फूल आवंटित हुआ था। धीरे-धीरे यह चुनाव निशान लोकप्रिय होकर आम जनता तक पहुंच गया। बैलट पेपर से लेकर ईवीएम तक में कमल निशान का प्रयोग हुआ। इसी प्रकार सपा का चुनाव निशान साइकिल , बसपा का हाथी व कांग्रेस का पंजा भी आम जनमानस में लोकप्रिय है।
विज्ञापन
अब लगभग 41 साल बाद भाजपा ने गठबंधन में कालपी सीट अपने सहयोगी दल निषाद पार्टी को दी है। निषाद पार्टी अभी यूपी में एक छोटा दल माना जाता है, इनका चुनाव निशान भोजन से भरी थाली है। इसलिए अब यह तय है कि इस बार ईवीएम में मतदाताओं को वोटिंग के दौरान भाजपा का कमल फूल निशान नहीं नजर आएगा।
विज्ञापन
-------
सहयोगी दल का चुनाव चिह्न की पहचान बनेगी मुश्किल
भाजपा के रणनीतिकारों का कहना है कि यह सच है कि कमल फूल निशान गांवों के एक- एक मतदाता को पता है। भोजन से भरी थाली का चुनाव निशान अभी चर्चित नहीं है। अभी मतदान में लगभग 15 दिन हैं। भाजपा का बूथ स्तर पर संगठन बहुत मजबूत है। पूरी कोशिश की जा रही है कि बूथ के कार्यकर्ताओं के सहयोग से वोटिंग के पहले गठबंधन के सहयोगी निषाद पार्टी का चुनाव निशान भोजन से भरी थाली एक एक मतदाता तक पहुंचा दें।