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डर मुझे भी लगा था पहले फासला देखकर...

Sun, 09 Feb 2020 12:24 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 09 Feb 2020 12:24 AM IST
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dar mujhe bhee laga tha pahale phaasala dekhakar...
कोंच में कवि सम्मलेन में काव्य पाठ करते कवि - फोटो : ORAI
कोंच। वागीश्वरी साहित्य परिषद की मासिक काव्य गोष्ठी में नगर के कवियों और साहित्यकारों ने सम सामयिक रचनाएं पढ़कर श्रोताओं को आधी रात तक आनंदित किया। कवि मुन्ना यादव ने ‘डर मुझे भी लगा था पहले फासला देखकर, पर में बढ़ता ही गया आगे रास्ता देखकर’ सुना वाहवाही बटोरी।
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श्री द्वारिकाधीश मंदिर में आयोजित काव्य गोष्ठी में कवि संतोष तिवारी सरल ने ‘देश को आगे बढ़ाना है सबको साथ लेकर चलना होगा, गाड़ी का पहिया कोई भी पीछे न रहे ऐसी इबारत लिखना है’। गजलकार प्रेम चौधरी नदीम ने ‘नैन से नैन मिले आत्मिक चैन मिले, इस तरह आन मिलो जिस तरह दिन रैन मिले’।
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अध्यक्षता करते हुए संस्था अध्यक्ष ओंकारनाथ पाठक ने रचना बांची कि ‘दिल्ली के शाहीन बाग में महिलाएं दिन रात बैठकर धरना दे रहीं, भला हो उनका जनसंख्या नियंत्रण में साथ देकर देश का सहयोग कर रहीं।’ संचालन आनंद शर्मा अखिल ने किया। कवि भास्कर सिंह माणिक्य, कालीचरण सोनी, नंदराम स्वर्णकार भावुक आदि की रचनाएं सराही गई। इस दौरान चंद्रशेखर नगाइच, अमर सिंह यादव, बल्ली चौधरी, मुन्ना, पप्पू चौधरी, कमलेश निरजंन, संतोष राठौर, आभास, अंशिका, आस्था आदि रहे।
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