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आगरा बाल सुधार गृह में मिला अपहृत बच्चा
जालौन
Updated Mon, 12 Jun 2017 12:32 AM IST
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पिता के साथ संतोष।
- फोटो : amarujala
कालपी(जालौन)। रेलवे स्टेशन से डेढ़ साल पूर्व अपहृत बच्चा आगरा में राजकीय बाल सुधार गृह में मिला है। बच्चों के लिए काम करने वाली समाजसेवी संस्था महफूज के समन्वयक डा. नरेश पारस के प्रयास से बच्चा अपने माता पिता से मिल गया। साल भर बाद बच्चे को पाकर उनके माता पिता की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। बता दें कि नगर के रेलवे स्टेशन चौराहे पर रहने वाले राजेंद्र का 5 वर्षीय पुत्र संतोष जनवरी 2016 में गुम हो गया था।
पिता ने कोतवाली सहित विभिन्न जगहों पर इसकी सूचना दी और बच्चे को खोजता रहा। राजेंद्र ने कानपुर इटावा सहित विभिन्न जिलों में भी पुलिस को सूचना दी पर कहीं सुनवाई नहीं हुई। उधर बच्चे को फरवरी 2016 में आगरा जीआरपी पुलिस ने बच्चों से भीख मंगाने वाले गिरोह से आजाद कराया पर पता न बता पाने के कारण बच्चे को राजकीय बाल सुधार गृह में दाखिल करा दिया। इसी बीच संस्था महफूज के समन्वयक ने बच्चे की काउंसलिंग की तो पता चला कि बच्चा कालपी रेलवे स्टेशन के पास रहता है। इस पर पारस ने पुलिस मुख्यालय व जालौन पुलिस को ट्वीट किया।
ट्वीट को देखकर सामाजिक कार्यकर्ता संजय खन्ना ने पारस से संपर्क किया और मामले से वनखंडी देवी के महंत जमुनादास को अवगत कराया। बच्चे के परिजनों की खोजबीन शुरू हुई तो पता चला कि बच्चा गायब होने के बाद राजेंद्र और उसका परिवार कालपी छोड़कर कहीं चला गया है। यह भी पता चला कि राजेंद्र जड़ी बूटी बेचने का कार्य करता है और उरई के पटेल नगर में रहता है। सूचना मिलते ही राजेंद्र परिवार सहित वनखंडी देवी मंदिर में आकर महंत से मिला। यहां से बच्चे के माता पिता की फोटो बाल सुधार गृह में व्हाट्सअप के माध्यम से भेजी गई तो बच्चे ने पहचान लिया। बच्चे की फोटो देखकर माता पिता भी बिलख उठे। बच्चे की सलामती की सूचना मिलते ही वह रोने लगे। इस पर महंत ने उन्हें आगरा बाल सुधार गृह सभी दस्तावेजों के साथ डॉक्टर नरेश पारस के पास भेजा। शनिवार की देर शाम आगरा में बाल सुधार गृह में मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद बच्चा परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। बच्चा मिलते ही राजेंद्र व उसकी पत्नी कश्मीरी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
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पिता ने कोतवाली सहित विभिन्न जगहों पर इसकी सूचना दी और बच्चे को खोजता रहा। राजेंद्र ने कानपुर इटावा सहित विभिन्न जिलों में भी पुलिस को सूचना दी पर कहीं सुनवाई नहीं हुई। उधर बच्चे को फरवरी 2016 में आगरा जीआरपी पुलिस ने बच्चों से भीख मंगाने वाले गिरोह से आजाद कराया पर पता न बता पाने के कारण बच्चे को राजकीय बाल सुधार गृह में दाखिल करा दिया। इसी बीच संस्था महफूज के समन्वयक ने बच्चे की काउंसलिंग की तो पता चला कि बच्चा कालपी रेलवे स्टेशन के पास रहता है। इस पर पारस ने पुलिस मुख्यालय व जालौन पुलिस को ट्वीट किया।
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ट्वीट को देखकर सामाजिक कार्यकर्ता संजय खन्ना ने पारस से संपर्क किया और मामले से वनखंडी देवी के महंत जमुनादास को अवगत कराया। बच्चे के परिजनों की खोजबीन शुरू हुई तो पता चला कि बच्चा गायब होने के बाद राजेंद्र और उसका परिवार कालपी छोड़कर कहीं चला गया है। यह भी पता चला कि राजेंद्र जड़ी बूटी बेचने का कार्य करता है और उरई के पटेल नगर में रहता है। सूचना मिलते ही राजेंद्र परिवार सहित वनखंडी देवी मंदिर में आकर महंत से मिला। यहां से बच्चे के माता पिता की फोटो बाल सुधार गृह में व्हाट्सअप के माध्यम से भेजी गई तो बच्चे ने पहचान लिया। बच्चे की फोटो देखकर माता पिता भी बिलख उठे। बच्चे की सलामती की सूचना मिलते ही वह रोने लगे। इस पर महंत ने उन्हें आगरा बाल सुधार गृह सभी दस्तावेजों के साथ डॉक्टर नरेश पारस के पास भेजा। शनिवार की देर शाम आगरा में बाल सुधार गृह में मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद बच्चा परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। बच्चा मिलते ही राजेंद्र व उसकी पत्नी कश्मीरी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
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