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न ट्रैक की निगरानी न स्टेशन पर सीसी कैमरे
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Sat, 11 Feb 2017 11:40 PM IST
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उरई स्टेशन पर यात्रियों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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उरई (जालौन)। भले ही रेलवे अधिकारी लगातार पटरी चटकने का कारण विभागीय खामी या फिर तापमान में उतार, चढ़ाव मान रहे हाें, लेकिन पुखरायां रेल हादसे के बाद यह सवाल गाड़ियों मेें सफर करने वाले हर यात्रा के दिमाग में एक सवाल कौंध रहा है कि कहीं कोई साजिश के तहत तो पटरियों के साथ छेड़खानी नहीं की जा रही। यात्रियों की मानें तो माडल स्टेशन पर सीसी कैमरे होने चाहिए और झांसी, कानपुर की तरफ रेलवे ट्रैक की निगरानी लगातार रहनी चाहिए। इससे भी हादसों की संभावनाओं में कमी आएगी। फिलहाल रेलवे अधिकारी
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पूरे मामले के गंभीरता की जांच करा रहे है। जीआरपी के मुताबिक यदि किसी की साजिश है तो उसका भी खुलासा किया जाएगा।
झांसी-कानपुर ट्रैक पर किसकी नजर लग गई है। तीन दिन के अंतराल में दो जगह पटरी चटक ने की घटनाआें से यह बात तय है कि कोई न कोई तो ऐसा है जो बड़े ट्रेन हादसे को अंजाम देना चाहता है। भुआ पर टूटी पटरी की जांच के लिए एटीएस टीम ने भी जिले में डेरा डाला था और मौके से साक्ष्य संकलन किए थे। वह जांच गुप्त रखी जा रही है लेकिन कुछ न कुछ तो ऐसा है कि लगातार ट्रैक टूटने की वारदात से संदेह हो रहा है।
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जुगाड़ से निकाल दी पैसेंजर ट्रेन
उरई। शहर के रेलवे स्टेशन पर टूटी पटरी से जानबूझ कर पैसेंजर ट्रेन गुजारने के बाद जब पत्रकाराें ने रेल विभाग के अधिकारियाें से बात की तो वह बोले कि टूटी पटरी के नीचे लकड़ी का गुटका लगा दिया था। क्योंकि ट्रेन वापस नहीं हो सकती थी। इससे उसे 30 किलोमीटर की रफ्तार से गुजारा गया। वहीं लोग बोले कि यहां भी रेल विभाग ने जुगाड़ से काम चला लिया।
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नुकसान न होने पर गुजारी ट्रेन
उरई। पीआरओ झांसी मनोज कुमार का कहना है कि मौके पर टेक्नीशियन मौजूद थे। चटकी पटरी पर किसी भी तरह के खतरे की आशंका न देखने के बाद भी पैसेंजर ट्रेन को गुजारा गया, क्योंकि झांसी की ओर जा रही पैसेंजर को पीछे नहीं किया जा सकता था। इसमें पूरी सावधानी बरती गई।