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कार्यकत्रियों ने फूंका डायरेक्टर का पुतला
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Sat, 10 Sep 2016 11:24 PM IST
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जलते हुए पुतले की आग बुझाते पुलिसकर्मी।
- फोटो : अमर उजाला
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आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने शुक्रवार को शहर में मशाल जुलूस निकालने के बाद शनिवार को बाल विकास पुष्टाहार विभाग के डायरेक्टर का पुतला फूंका। पुतले को लेकर पहले जुलूस निकाला और फिर उसे आग के हवाले किया। पुलिस ने जलता हुआ पुतला छीनकर आग बुझाई। कार्यकत्रियों ने इस दौरान देश व प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। सरकार पर शोषण करने का आरोप लगाया। कहा कि मानदेय तीन हजार रुपये दिया जा रहा और काम हर विभाग का कराया जा रहा। यह नाइंसाफी नहीं तो और क्या है। कार्यकत्रियों ने न्यूनतम मानदेय 18 हजार रुपये तत्काल किए जाने की मांग दोहराई। महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के बैनर तले आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने मांगों को
लेकर अपना प्रदर्शन उग्र कर दिया है। शनिवार को कार्यकत्रियों ने विभाग के डायरेक्टर आनंद कुमार पर गुस्सा निकाली। उनका पुतला लेकर मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए जुलूस निकाला। इस दौरान कोतवाली पुलिस बैकफुट पर रही। विकास भवन तिराहे पर जब कार्यकत्रियों ने पुतले में आग लगाई तभी सीओ डा.जंगबहादुर सिंह पहुंच गए। उन्होंने कोतवाल
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जयप्रकाश को पुतला लेने के लिए कहा। कोतवाली के सिपाहियों ने जलता हुआ पुतला कार्यकत्रियों से छीन लिया और फिर आग बुझाने के लिए पुलिस ने पैरों का प्रयोग किया। यह देखकर कार्यकत्रियां बोल उठी चलो अच्छा हुआ जो काम हमें करना था वह पुलिस ने कर दिया। इसके बाद कार्यकत्रियां कलक्ट्रेट पहुंच गई और यहां पर धरना देकर प्रदर्शन किया। इस
दौरान गीता, सुशीला तिवारी, विद्या अवस्थी, सुनीता, प्रभा देवी, मीरा, माया, अशोक कुमारी, सविता कनौजिया, किरन देवी, नीतू, कुसुम, नीलम, ऊषा, रत्नावती, आरती, कैलाशी, ममता, रामजानकी, नीलम गुप्ता, रेखा अवस्थी, किरन वर्मा, रेशमा आदि मौजूद रही।
हक के लिए गरजी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां
प्रदेश संगठन मंत्री अनीसा खातून ने इस दौरान कहा कि सरकार कार्यकत्रियों का शोषण कर रही है। चुनावी कार्यक्रम से लेकर पल्स पोलियो अभियान, जनगणना आदि कार्यक्रम भी करा रही है मानदेय के नाम पर तीन हजार रुपये और सहायिका को 1500 रुपये मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई के दौर में कार्यकत्री अपने परिवार का भरण पोषण भी नहीं कर पा
रही हैं। जिलाध्यक्ष सुधा गुप्ता ने कहा कि सरकार जल्द ही न्यूनतम मानदेय का निर्धारण करते हुए इसे 18 हजार रुपये करे। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। सरकारी कर्मचारी को जो सुविधाएं मिलती है उसका लाभ दिलाया जाए। ऐसा नहीं होता है तो सरकार उखाड़ फेंकने के लिए दिनरात प्रदर्शन किया जाएगा।
सरस्वती देवी ने कहा कि सरकार इस ओर गंभीर नहीं होती है तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा। वंदना ने कहा कि कार्यकत्रियां सरकार से अपना हक मांग रही है। सरकार को चाहिए कि कार्यकत्रियों की जायज मांग को लेकर गंभीरता दिखाए।
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कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। सरकार पर शोषण करने का आरोप लगाया। कहा कि मानदेय तीन हजार रुपये दिया जा रहा और काम हर विभाग का कराया जा रहा। यह नाइंसाफी नहीं तो और क्या है। कार्यकत्रियों ने न्यूनतम मानदेय 18 हजार रुपये तत्काल किए जाने की मांग दोहराई। महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के बैनर तले आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने मांगों को
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लेकर अपना प्रदर्शन उग्र कर दिया है। शनिवार को कार्यकत्रियों ने विभाग के डायरेक्टर आनंद कुमार पर गुस्सा निकाली। उनका पुतला लेकर मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए जुलूस निकाला। इस दौरान कोतवाली पुलिस बैकफुट पर रही। विकास भवन तिराहे पर जब कार्यकत्रियों ने पुतले में आग लगाई तभी सीओ डा.जंगबहादुर सिंह पहुंच गए। उन्होंने कोतवाल
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जयप्रकाश को पुतला लेने के लिए कहा। कोतवाली के सिपाहियों ने जलता हुआ पुतला कार्यकत्रियों से छीन लिया और फिर आग बुझाने के लिए पुलिस ने पैरों का प्रयोग किया। यह देखकर कार्यकत्रियां बोल उठी चलो अच्छा हुआ जो काम हमें करना था वह पुलिस ने कर दिया। इसके बाद कार्यकत्रियां कलक्ट्रेट पहुंच गई और यहां पर धरना देकर प्रदर्शन किया। इस
दौरान गीता, सुशीला तिवारी, विद्या अवस्थी, सुनीता, प्रभा देवी, मीरा, माया, अशोक कुमारी, सविता कनौजिया, किरन देवी, नीतू, कुसुम, नीलम, ऊषा, रत्नावती, आरती, कैलाशी, ममता, रामजानकी, नीलम गुप्ता, रेखा अवस्थी, किरन वर्मा, रेशमा आदि मौजूद रही।
हक के लिए गरजी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां
प्रदेश संगठन मंत्री अनीसा खातून ने इस दौरान कहा कि सरकार कार्यकत्रियों का शोषण कर रही है। चुनावी कार्यक्रम से लेकर पल्स पोलियो अभियान, जनगणना आदि कार्यक्रम भी करा रही है मानदेय के नाम पर तीन हजार रुपये और सहायिका को 1500 रुपये मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई के दौर में कार्यकत्री अपने परिवार का भरण पोषण भी नहीं कर पा
रही हैं। जिलाध्यक्ष सुधा गुप्ता ने कहा कि सरकार जल्द ही न्यूनतम मानदेय का निर्धारण करते हुए इसे 18 हजार रुपये करे। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। सरकारी कर्मचारी को जो सुविधाएं मिलती है उसका लाभ दिलाया जाए। ऐसा नहीं होता है तो सरकार उखाड़ फेंकने के लिए दिनरात प्रदर्शन किया जाएगा।
सरस्वती देवी ने कहा कि सरकार इस ओर गंभीर नहीं होती है तो आंदोलन को उग्र किया जाएगा। वंदना ने कहा कि कार्यकत्रियां सरकार से अपना हक मांग रही है। सरकार को चाहिए कि कार्यकत्रियों की जायज मांग को लेकर गंभीरता दिखाए।