फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jalaun News ›   bsp,orai,seat

गढ़ में लौटा हाथी, काम आई सोशल इंजीनियरिंग

Tue, 04 May 2021 12:10 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 04 May 2021 12:10 AM IST
विज्ञापन
bsp,orai,seat
उरई। पंचायत चुनाव में बसपा के बेहतर प्रदर्शन ने उसकी अपने गढ़ में वापसी करा दी है। केंद्र व प्रदेश में सत्ता होने के बाद भी भाजपा को 6 सीटें मिली हैं जबकि बसपा ने 25 में 7 सीटें जीती हैं। सपा 4, कांग्रेस 1 और निर्दलीय को 06 सीटें मिली हैं। एक सीट जनता दल के खाते में गई है। जानकार इसके पीछे कहीं न कहीं सत्ताधारी दल के प्रति ग्रामीण मतदाताओं की नाराजगी मान ही रहे हैं लेकिन साथ ही बहुजन समाज पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग नीति को भी अनदेखा नहीं कर रहे हैं। कारण साफ है, बसपा ने टिकट वितरण के वक्त जातीय समीकरण पर भी ध्यान केंद्रित किया। अब पार्टी की नजर आने वाले विधानसभा चुनाव पर टिकी है।
विज्ञापन

बता दें कि 2007 के विधान सभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन कर बसपा ने तीनों सीटों पर अपना कब्जा कर जनपद को पार्टी का गढ़ बना लिया था। इसके बाद 2012 के चुनाव से लेकर 2019 में हुए लोकसभा चुनाव तक बसपा जीत को तरसती रही। एक लंबे अंतराल के बाद अब बसपा ने जिला पंचायत के चुनाव में धमाकेदार प्रदर्शन कर फिर से हाथी को उसके गढ़ में ला खड़ा कर दिया है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि कहीं न कहीं केंद्र व प्रदेश की योजनाओं का ग्रामीणों को सीधा लाभ न मिलना भी भाजपा से वोटरों का मोह भंग करने का एक कारण रहा है लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि बसपा ने टिकटों के बंटवारे में जिन जातीय समीकरण को बैठाया वे इस चुनाव में एकदम फिट बैठ गए।
विज्ञापन

सोशल इंजीनिरंग की बानगी गढन, महेवा, अकबरपुर, मई और जगम्मनपुर में साफ दिखी। गढऱ सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित थी, जिसमें मूलत: पिछड़ा वर्ग से आने वाले यादव व निरंजन बहुसंख्या में है। भाजपा व सपा ने इन दोनों ही जातियों पर दांव लगाया था लेकिन बसपा ने इस सीट से पिछड़ा वर्ग से आने वाली नाई जाति के प्रत्याशी को मैदान में उतारा और जीत दर्ज की।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसा ही कुछ महेवा सीट पर भी हुआ। यहां से अनारक्षित सीट पर बसपा ने उस क्षेत्र से आने वाले (चौरासी) ठाकु र बिरादरी को टिकट दिया और जीत दर्ज की, जबकि इस सीट पर भाजपा ने भी (कछारी) ठाकुर जाति के प्रत्याशी को टिकट दिया था और हार का सामना करना पड़ा। सबसे ज्य़ादा रोचक स्थिति कालपी तहसील की अकबरपुर इटौरा सीट पर देखने को मिली। यह सीट अनारक्षित होने के बाद भी इस सीट पर बसपा ने अपने कैडर वोट कहे जाने वाले पिछड़ा वर्ग के पाल जाति के उम्मीदवार को मैदान में उतारा और जीत दर्ज की, जबकि भाजपा सहित अन्य सभी दलों ने इस सीट पर सामान्य जाति के प्रत्याशियों को उतारा था। शोसल इंजीनिरंग बसपा की जीत की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed