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सूखे से टूटे किसान को आलू से भी निराशा
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Tue, 15 Mar 2016 10:59 PM IST
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potato
- फोटो : getty images
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सूखे से टूटे किसानों को आलू की फसल ने भी धोखा दे दिया है। सूखा के चलते ही आलू की पैदावार आधी रह गई है। साथ ही बाजार भाव भी कम मिल रहा है। ऐसे में किसानों की मुसीबत बढ़ गई है। हालात ये हैं कि अधिकांश किसानों की तो लागत भी निकलती नहीं दिखाई दे रही है। कोल्डस्टोरेज नहीं होने से वे आलू को दाम बढ़ने तक संरक्षित भी नहीं कर सकते हैं। इन
स्थितियों में वे अपनी फसल को औने पौने दाम में बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। बताते चलें कि माधौगढ़ क्षेत्र आलू, गन्ने के लिए वर्षों से मशहूर है। क्षेत्र के आधा सैकड़ा गांवों में आलू की खेती बहुतायत में होती है, लेकिन इस बार सूखे की वजह से उत्पादन ना के बराबर हुआ। इससे कुछ किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही है। जिन किसानों ने आलू का
उत्पादन किया उनके लिए एक और संकट खड़ा हो गया है। किसान भूपेंद्र सिंह, गजराज सिंह, प्रबल प्रताप सिह, हरपाल सिंह, मनोज सिंह, देवेद्र सिंह आदि ने बताया कि किसान वर्षों से कोल्ड स्टोरेज की मांग करने चले आ रहे हैं। शासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। भंडारण की व्यवस्था नहीं होने से वे आलू औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर है। इस मौसम में थोड़े दिनों बाद आलू सड़ना भी शुरू हो जाएगा। ऐसे में किसान पर दोतरफा मार पड़ती दिखाई दे रही है।
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लागत भी निकलती नहीं दिख रही
एक बीघा में आलू बोने में तकरीबन साढे़ सात हजार रुपये खर्च आता है। इसमें 200 रुपये बुवाई, 350 मिट्टी चढ़ाई आदि का खर्च आता है। मौसम की मार के चलते 18 से 20 क्विंटल आलू का उत्पादन हो रहा है। बाजार भाव कम होने से एक बीघा में 7500 से 8000 रुपये कीमत का उत्पादन होने से किसान परेशान है।
इन गांवों की प्रमुख फसल
हरौली, सुल्तानपुरा, कैलोर, बिरिया, माधौगढ़, सुरपुतपुरा, मिहौनी, अकबरपुरा, मजीठ, धमना, कुरौती, सरावन, सिरसा दो गढ़ी, अटागांव, मिहौनी, हैदलपुरा, जमरेही, सिहारी, चितौरा, सुरावली, बुढ़नपुरा, गोहनी समेत कई गांवों में आलू की फसल प्रमुखता से की जाती है।
लागत दोगुनी, पैदावार आधी
प्रकाश सिंह, अनुराग प्रताप सिंह, साहब सिंह का कहना है कि इस बार आलू का कम उत्पादन होने से किसान परेशान है। बुवाई की लागत इस बार दुगनी हो गई है। सूखा के कारण आलू वजन में हल्का और पैदावार आधी रह गई। इससे लागत नहीं निकल पा रही है। आलू बीज केे व्यापारी विनय कुमार सिंह, राजेंद्र सिंह, बल्लू, मानसिंह, साकेत, अमर सिंह आदि का कहना है कि बीज महंगा होने केे कारण भी किसानों ने खरीदा। इसके बाद पैदावार घटने से किसान टूट गया है।
जिले में 1050 हेक्टेयर में हो रही आलू की खेती
जिले के माधौगढ़ और रामपुरा क्षेत्र में किसान आलू की खेती पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। आलू फसल से किसानों को मुनाफा भी हुआ है। हालांकि मौसम के बदले मिजाज ने आलू किसानों की भी कमर तोड़ कर रख दी है। जिले में तकरीबन 1050 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू का उत्पादन होता है। इसमें सबसे अधिक माधौगढ़ क्षेत्र में 580 हेक्टेयर, रामपुरा क्षेत्र में
320 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इस वर्ष आलू की खेती की गई है। इसके अलावा कोंच क्षेत्र में भी 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की खेती की गई है। सूखे के चलते खेतों में आलू काफी कम निकल रहा है। इससे किसान परेशान हैं।
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स्थितियों में वे अपनी फसल को औने पौने दाम में बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। बताते चलें कि माधौगढ़ क्षेत्र आलू, गन्ने के लिए वर्षों से मशहूर है। क्षेत्र के आधा सैकड़ा गांवों में आलू की खेती बहुतायत में होती है, लेकिन इस बार सूखे की वजह से उत्पादन ना के बराबर हुआ। इससे कुछ किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही है। जिन किसानों ने आलू का
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उत्पादन किया उनके लिए एक और संकट खड़ा हो गया है। किसान भूपेंद्र सिंह, गजराज सिंह, प्रबल प्रताप सिह, हरपाल सिंह, मनोज सिंह, देवेद्र सिंह आदि ने बताया कि किसान वर्षों से कोल्ड स्टोरेज की मांग करने चले आ रहे हैं। शासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। भंडारण की व्यवस्था नहीं होने से वे आलू औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर है। इस मौसम में थोड़े दिनों बाद आलू सड़ना भी शुरू हो जाएगा। ऐसे में किसान पर दोतरफा मार पड़ती दिखाई दे रही है।
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लागत भी निकलती नहीं दिख रही
एक बीघा में आलू बोने में तकरीबन साढे़ सात हजार रुपये खर्च आता है। इसमें 200 रुपये बुवाई, 350 मिट्टी चढ़ाई आदि का खर्च आता है। मौसम की मार के चलते 18 से 20 क्विंटल आलू का उत्पादन हो रहा है। बाजार भाव कम होने से एक बीघा में 7500 से 8000 रुपये कीमत का उत्पादन होने से किसान परेशान है।
इन गांवों की प्रमुख फसल
हरौली, सुल्तानपुरा, कैलोर, बिरिया, माधौगढ़, सुरपुतपुरा, मिहौनी, अकबरपुरा, मजीठ, धमना, कुरौती, सरावन, सिरसा दो गढ़ी, अटागांव, मिहौनी, हैदलपुरा, जमरेही, सिहारी, चितौरा, सुरावली, बुढ़नपुरा, गोहनी समेत कई गांवों में आलू की फसल प्रमुखता से की जाती है।
लागत दोगुनी, पैदावार आधी
प्रकाश सिंह, अनुराग प्रताप सिंह, साहब सिंह का कहना है कि इस बार आलू का कम उत्पादन होने से किसान परेशान है। बुवाई की लागत इस बार दुगनी हो गई है। सूखा के कारण आलू वजन में हल्का और पैदावार आधी रह गई। इससे लागत नहीं निकल पा रही है। आलू बीज केे व्यापारी विनय कुमार सिंह, राजेंद्र सिंह, बल्लू, मानसिंह, साकेत, अमर सिंह आदि का कहना है कि बीज महंगा होने केे कारण भी किसानों ने खरीदा। इसके बाद पैदावार घटने से किसान टूट गया है।
जिले में 1050 हेक्टेयर में हो रही आलू की खेती
जिले के माधौगढ़ और रामपुरा क्षेत्र में किसान आलू की खेती पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। आलू फसल से किसानों को मुनाफा भी हुआ है। हालांकि मौसम के बदले मिजाज ने आलू किसानों की भी कमर तोड़ कर रख दी है। जिले में तकरीबन 1050 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू का उत्पादन होता है। इसमें सबसे अधिक माधौगढ़ क्षेत्र में 580 हेक्टेयर, रामपुरा क्षेत्र में
320 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इस वर्ष आलू की खेती की गई है। इसके अलावा कोंच क्षेत्र में भी 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की खेती की गई है। सूखे के चलते खेतों में आलू काफी कम निकल रहा है। इससे किसान परेशान हैं।