{"_id":"5f7caffa8ebc3e75047cddd4","slug":"bhajpayoo-ka-pradersan-orai-news-knp586915271","type":"story","status":"publish","title_hn":"तहसीलदार के खिलाफ धरने पर बैठे भाजपाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तहसीलदार के खिलाफ धरने पर बैठे भाजपाई
विज्ञापन
कोंच। सत्ताधारी दल भाजपा के नेताओं ने व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए तहसीलदार के खिलाफ धरना दिया। उन पर प्रमाणपत्र बनवाने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
परशुराम सेना की कोंच में हो रही बैठक में जब यह खबर पहुंची तो विप्र समाज के लोग भी धरना देनेे वालों के समर्थन में उतर आए। एसडीएम अशोक कुमार ने हाथ जोड़कर उन्हें समझाने का प्रयास किया लेकिन धरने पर बैठेे लोग नहीं माने। बाद में सिटी मजिस्ट्रेट सुनील कुमार शुक्ला और सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा मौके पर पहुंचे औैर प्रमाणपत्र बनाने की बात कहते हुए समझा बुझाकर धरना समाप्त कराया।
उरई सदर विधायक के कोंच प्रतिनिधि पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष सुनील कांत तिवारी को अपनेे पुत्र के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र चाहिए था। पांच दिन पूर्व लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट उनके आवेेदन पर लगाई जा चुकी थी लेकिन प्रमाणपत्र जारी करने में तहसीलदार आनाकानी करते हुए लगातार टरकाते आ रहेे थेे। समाधान न होने पर वह तहसीलदार कार्यालय के सामने ही धरने पर बैठ गए। बाद में और भाजपाई भी धरनेे मेें शामिल हो गए। दिन भर चले हो हल्ले के बाद सिटी मजिस्ट्रेट सुनील कुमार शुक्ला और सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा मौके पर पहुंचे और प्रमाणपत्र जारी कराने का भरोसा दिलाया। साढे़ तीन बजे धरना समाप्त कराया। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष उमा बल्लभ शांडिल्य सहित तमाम विप्र बंधु और विहिप एवं बजरंग दल के लोग भी इसमेें शामिल हो गए।
विज्ञापन
इस दौरान भाजपा नगर अध्यक्ष सुनील लोहिया, सुनील कांत तिवारी, सुनील शर्मा, नरेश वर्मा, ओपी कुशवाहा, बजरंग दल संयोजक आकाश उदैनिया, गौरव सोनी, अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष उमाबल्लभ शांडिल्य, राजू पाठक कालपी, अमित उपाध्याय, बादाम सिंह कुशवाहा, महेंद्र सोनी, दीपक मिश्रा, राजा तिवारी, विहिप मंत्री अवधेश पटेल, दीपू लौना, द्रविड़ चौबे आदि लोग शामिल रहे। शांति व्यवस्था न बिगड़े इसके लिए फोर्स भी तैनात रहा।
लेखपाल की रिपोर्ट से हुआ भ्रम : तहसीलदार
इस बाबत तहसीलदार राजेश विश्वकर्मा का कहना है कि सुनीलकांत के कागजों में लेखपाल द्वारा जो रिपोर्ट दो प्रतियों में दी गई वह अलग अलग होने के कारण भ्रम की स्थिति बनी। इस पर उन्होंने स्वयं मौके का निरीक्षण करने के लिए अथवा भूमि और भवन संबंधी साक्ष्य देने के लिए कहा। अगर उस परिधि में आ रहे होंगे तो प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा अन्यथा नहीं। तहसीलदार ने बताया कि अभी तक उनके पास 59 ईडब्ल्यूएस के आवेदन आए जिनमें 53 वह जारी कर दिए गए और 6 प्रक्रिया में हैं।
विज्ञापन
परशुराम सेना की कोंच में हो रही बैठक में जब यह खबर पहुंची तो विप्र समाज के लोग भी धरना देनेे वालों के समर्थन में उतर आए। एसडीएम अशोक कुमार ने हाथ जोड़कर उन्हें समझाने का प्रयास किया लेकिन धरने पर बैठेे लोग नहीं माने। बाद में सिटी मजिस्ट्रेट सुनील कुमार शुक्ला और सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा मौके पर पहुंचे औैर प्रमाणपत्र बनाने की बात कहते हुए समझा बुझाकर धरना समाप्त कराया।
विज्ञापन
उरई सदर विधायक के कोंच प्रतिनिधि पूर्व भाजपा नगर अध्यक्ष सुनील कांत तिवारी को अपनेे पुत्र के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र चाहिए था। पांच दिन पूर्व लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट उनके आवेेदन पर लगाई जा चुकी थी लेकिन प्रमाणपत्र जारी करने में तहसीलदार आनाकानी करते हुए लगातार टरकाते आ रहेे थेे। समाधान न होने पर वह तहसीलदार कार्यालय के सामने ही धरने पर बैठ गए। बाद में और भाजपाई भी धरनेे मेें शामिल हो गए। दिन भर चले हो हल्ले के बाद सिटी मजिस्ट्रेट सुनील कुमार शुक्ला और सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा मौके पर पहुंचे और प्रमाणपत्र जारी कराने का भरोसा दिलाया। साढे़ तीन बजे धरना समाप्त कराया। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष उमा बल्लभ शांडिल्य सहित तमाम विप्र बंधु और विहिप एवं बजरंग दल के लोग भी इसमेें शामिल हो गए।
विज्ञापन
इस दौरान भाजपा नगर अध्यक्ष सुनील लोहिया, सुनील कांत तिवारी, सुनील शर्मा, नरेश वर्मा, ओपी कुशवाहा, बजरंग दल संयोजक आकाश उदैनिया, गौरव सोनी, अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के जिलाध्यक्ष उमाबल्लभ शांडिल्य, राजू पाठक कालपी, अमित उपाध्याय, बादाम सिंह कुशवाहा, महेंद्र सोनी, दीपक मिश्रा, राजा तिवारी, विहिप मंत्री अवधेश पटेल, दीपू लौना, द्रविड़ चौबे आदि लोग शामिल रहे। शांति व्यवस्था न बिगड़े इसके लिए फोर्स भी तैनात रहा।
लेखपाल की रिपोर्ट से हुआ भ्रम : तहसीलदार
इस बाबत तहसीलदार राजेश विश्वकर्मा का कहना है कि सुनीलकांत के कागजों में लेखपाल द्वारा जो रिपोर्ट दो प्रतियों में दी गई वह अलग अलग होने के कारण भ्रम की स्थिति बनी। इस पर उन्होंने स्वयं मौके का निरीक्षण करने के लिए अथवा भूमि और भवन संबंधी साक्ष्य देने के लिए कहा। अगर उस परिधि में आ रहे होंगे तो प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाएगा अन्यथा नहीं। तहसीलदार ने बताया कि अभी तक उनके पास 59 ईडब्ल्यूएस के आवेदन आए जिनमें 53 वह जारी कर दिए गए और 6 प्रक्रिया में हैं।