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बेटी की बदौलत खुशियों से भर गई झोली

Sun, 25 Sep 2016 11:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
अमर उजाला ब्यूरो, उरई Updated Sun, 25 Sep 2016 11:02 PM IST
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Bag filled with joy thanks to daughter
कालोनी में आवास आवंटन के पत्र के साथ चेक सौंपती डीएम - फोटो : अमर उजाला
पति की बेवफाई के बाद जीवन जीने के लिए संघर्ष करने वाली मोनिका को उसकी आठ साल की बेटी दिव्या ने खुशियों की सौगात दी है। दिव्या की पढ़ाई के प्रति दिलचस्पी देखकर मुख्यमंत्री की ओर से सुख सुविधाएं दिलाने के लिए फरमान जारी हुआ है। इससे जहां जिला प्रशासन हरकत में आया वहीं, भीख मांग कर गुजारा करने वाली वाली इस मां-बेटी क ी तुरंत
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खोज खबर भी ली। रेलवे स्टेशन पर उसके मिलने के बाद उसे रविवार को जिलाधिकारी संदीप कौर ने मां-बेटी को अपने कैंप कार्यालय में बुलाया और उनकी समस्याओं का समाधान किया।  मोनिका के नाम से डूडा कालोनी में एक आवास आवंटित किया गया। इसके अलावा उसका नाम पात्र गृहस्थी में दर्ज कराने के लिए फार्म भराया गया। अपनी गृहस्थी को फिर से
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संवार सके इसके लिए 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी दी गई। समाजवादी पेंशन योजना से भी लाभांवित किए जाने का भरोसा दिया गया। जानकारी के मुताबिक कदौरा विकास खंड क्षेत्र के बसरेही गांव निवासी मोनिका को उसके पति कल्लू महाराज ने घर से निकाल दिया था। अपनी बेटी दिव्या को लेकर छह माह पहले मोनिका उरई आ गई और रेलवे
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स्टेशन पर ट्रेनों में भीख मांग कर अपनी बेटी की परवरिश करने लगी। इसी दौरान उसने एक और बेटी को जन्म दिया। नन्हीं जान को मौसम की मार से बचाने के लिए उसने एक कमरा किराए पर ले लिया। दुधमुंही बेटी को लेकर वह ट्रेनों में भीख मांगती और जो मिलता उससे घर का खर्च चलाने लगी। बेटी दिव्या भी मां को सहारा देने की कोशिश करती। दिव्या का

दाखिला बसरेही के स्कूल में था लेकिन, जब उरई आई तो मां ने उसका दाखिला शहर के टाउन हाल स्थित परिषदीय स्कूल में करा दिया। यहां पर उसे यूनिफार्म से लेकर किताबें और बस्ता फ्री में मिल गया तो उसने अपनी पढ़ाई शुरू कर दी। मां जब ट्रेनों में भीख मांगती थी तो उस समय दिव्या उसके साथ ही रहती। ट्रेनों के गुजर जाने के बाद रेलवे स्टेशन के

पूछताछ खिड़की पास ही वह पढ़ने के लिए बैठ जाती। होम वर्क पूरा करने के बाद स्टेशन पर ही सो जाती थी। उसकी पढ़ाई के प्रति दिलचस्पी देखकर किसी ने उसका फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसका संदेश मुख्यमंत्री के पास भी सोशल मीडिया के जरिए पहुंचा तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे गंभीरता से लिया और जिला प्रशासन को

उसकी मदद के लिए आदेश जारी कर दिया। सीएम के आदेश के बाद तो प्रशासन रेलवे स्टेशन पर दिव्या का पता लगाने दौड़ पड़े। रविवार को जब वह मिली तो उसे तत्काल डीएम कैंप


कार्यालय लाया गया। यहां पर उसकी सुख सुविधाओं का पिटारा खोल दिया गया। डीएम संदीप कौर ने कहा कि मोनिका को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। बेटी का दाखिला कालोनी के नजदीक के स्कूल में करा दिया जाएगा।
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