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Jalaun News: कहीं डॉक्टर नदारद तो कहीं जरूरी जांचों की सुविधा नहीं
Mon, 05 May 2025 12:39 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Mon, 05 May 2025 12:39 AM IST
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उरई। जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रविवार को आयोजित मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में तमाम दावों के बीच व्यवस्थाओं की पोल खुलती नजर आई। कहीं, डॉक्टर नदारद रहे, तो कहीं जरूरी जांचों की सुविधा ही नहीं मिली। मरीज निराश होकर लौटे। हालांकि, कुछ स्थानों पर सीमित संसाधनों में भी पैरामेडिकल स्टाफ ने पूरी मेहनत से मरीजों को राहत दी।
जिलेभर में 1700 से अधिक मरीजों ने मेले में पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाएं लीं, लेकिन प्रचार की कमी और संसाधनों के अभाव के चलते यह जनकल्याणकारी योजना कई जगह सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले के 33 ग्रामीण व सात शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 36 चिकित्सक, 156 पैरामेडिकल स्टाफ ने चिकित्सीय कार्य कर 783 पुरूष, 690 महिला व 230 बच्चों का परीक्षण किया। 40 आयुष्मान कार्ड, 14 रोगियों की हेपेटाइटिस की जांच, 11 लोगों की आंखों का परीक्षण, 72 गर्भवती का परीक्षण, 73 रोगियों को उच्च सेंटर एंबुलेंस से भेजा गया, मेल में 74 बुखार, 268 लिवर, 130 श्वसन संबंधी समस्याओं, 82 डायबिटीज के रोगी आए। सबसे अधिक 299 त्वचा संबंधीरोगों के रोगी पहुंचे।
डॉक्टर न होने से लौटे मरीज
सिरसा कलार। न्यू पीएचसी पर आरोग्य मेले में 50 मरीज पहुंचे, लेकिन कोई मेडिकल डॉक्टर मौजूद नहीं रहा। तीन नेत्र रोगी डॉक्टर न मिलने पर निराश होकर लौटे। मरीजों की जांच फार्मासिस्ट और एलटी स्टाफ ने की। पेशाब, नेत्र और गंभीर बीमारियों की जांच संभव नहीं हो सकी। स्थानीय निवासी सुरेंद्र सिंह, असलम और तुलसीराम ने कहा कि उन्हें उरई या जालौन जाकर इलाज कराना पड़ेगा। (संवाद)
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अर्बन अस्पताल में वाटर कूलर बंद, प्रचार की भी कमी
कोंच। अर्बन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित मेले में 51 मरीज पहुंचे, लेकिन महीनों से वॉटर कूलर खराब होने से तीमारदारों को गर्मी में परेशानी झेलनी पड़ी। पेट, स्किन और कमजोरी से जुड़ी बीमारियों के मरीज अधिक रहे। मरीजों की कम उपस्थिति का कारण प्रचार का अभाव रहा। कई लोगों को जानकारी ही नहीं थी कि हर रविवार मेला लगता है।
एट-पिंडारी: सीमित संसाधनों में मरीजों को राहत
एट। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 18 मरीजों को फ्री जांच और दवाएं दी गईं। जुकाम, बुखार, त्वचा रोग और गर्भवती महिलाओं की जांच हुई। स्टाफ की मौजूदगी में मेले का संचालन ठीक से हुआ, लेकिन संसाधन सीमित थे। सोमई में डॉक्टरों की टीम ने 32 मरीजों की जांच की। मलेरिया, बीपी, डायबिटीज जैसी समस्याओं की जांच हुई। कुछ मरीजों को हीमोग्लोबिन की कमी भी पाई गई। स्वास्थ्य कर्मियों ने मौसम को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील की।
कालपी-महेवा-बाबई: कुल 99 मरीज, सीमित जांच
कालपी। तीन उपकेंद्रों पर कुल 99 मरीजों की जांच हुई। डॉक्टरों की मौजूदगी में गैस, बुखार, त्वचा व हाई बीपी के मरीजों का उपचार किया गया। परंतु गंभीर बीमारियों की जांच सीमित रही। डॉक्टरों ने लोगों को गर्मी में स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सलाह दी।
गोपालपुरा-मड़ोरी: मरीज भेजे गए रेफर
माधौगढ़। गोपालपुरा पीएचसी पर 47 और मड़ोरी में 52 मरीजों की जांच की गई। कुछ मरीजों को सीएचसी माधौगढ़ रेफर करना पड़ा। मड़ोरी में कई मरीजों को स्किन, श्वसन और गैस की समस्या पाई गई। एक मरीज में एनीमिया मिला, शुगर का भी एक केस सामने आया।
एलटी न होने के कारण नहीं हो पाई जांचें
जालौन। पीएचसी में आयोजित आरोग्य मेले में 44 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। अस्पताल में लैब टैक्नीशियन की कमी के कारण कुछ जांचों में दिक्कत आई। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. सम्राट गुर्जर ने बताया कि अस्पताल में लैब टैक्नीशियन न होने से दिक्कत हुई। हालांकि, ब्लड प्रेशर और शुगर संबंधित जांचें अस्पताल में की गईं, लेकिन अन्य आवश्यक जांचें मरीजों को न कराई जा सकीं।
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जिलेभर में 1700 से अधिक मरीजों ने मेले में पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाएं लीं, लेकिन प्रचार की कमी और संसाधनों के अभाव के चलते यह जनकल्याणकारी योजना कई जगह सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले के 33 ग्रामीण व सात शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 36 चिकित्सक, 156 पैरामेडिकल स्टाफ ने चिकित्सीय कार्य कर 783 पुरूष, 690 महिला व 230 बच्चों का परीक्षण किया। 40 आयुष्मान कार्ड, 14 रोगियों की हेपेटाइटिस की जांच, 11 लोगों की आंखों का परीक्षण, 72 गर्भवती का परीक्षण, 73 रोगियों को उच्च सेंटर एंबुलेंस से भेजा गया, मेल में 74 बुखार, 268 लिवर, 130 श्वसन संबंधी समस्याओं, 82 डायबिटीज के रोगी आए। सबसे अधिक 299 त्वचा संबंधीरोगों के रोगी पहुंचे।
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डॉक्टर न होने से लौटे मरीज
सिरसा कलार। न्यू पीएचसी पर आरोग्य मेले में 50 मरीज पहुंचे, लेकिन कोई मेडिकल डॉक्टर मौजूद नहीं रहा। तीन नेत्र रोगी डॉक्टर न मिलने पर निराश होकर लौटे। मरीजों की जांच फार्मासिस्ट और एलटी स्टाफ ने की। पेशाब, नेत्र और गंभीर बीमारियों की जांच संभव नहीं हो सकी। स्थानीय निवासी सुरेंद्र सिंह, असलम और तुलसीराम ने कहा कि उन्हें उरई या जालौन जाकर इलाज कराना पड़ेगा। (संवाद)
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अर्बन अस्पताल में वाटर कूलर बंद, प्रचार की भी कमी
कोंच। अर्बन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित मेले में 51 मरीज पहुंचे, लेकिन महीनों से वॉटर कूलर खराब होने से तीमारदारों को गर्मी में परेशानी झेलनी पड़ी। पेट, स्किन और कमजोरी से जुड़ी बीमारियों के मरीज अधिक रहे। मरीजों की कम उपस्थिति का कारण प्रचार का अभाव रहा। कई लोगों को जानकारी ही नहीं थी कि हर रविवार मेला लगता है।
एट-पिंडारी: सीमित संसाधनों में मरीजों को राहत
एट। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 18 मरीजों को फ्री जांच और दवाएं दी गईं। जुकाम, बुखार, त्वचा रोग और गर्भवती महिलाओं की जांच हुई। स्टाफ की मौजूदगी में मेले का संचालन ठीक से हुआ, लेकिन संसाधन सीमित थे। सोमई में डॉक्टरों की टीम ने 32 मरीजों की जांच की। मलेरिया, बीपी, डायबिटीज जैसी समस्याओं की जांच हुई। कुछ मरीजों को हीमोग्लोबिन की कमी भी पाई गई। स्वास्थ्य कर्मियों ने मौसम को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील की।
कालपी-महेवा-बाबई: कुल 99 मरीज, सीमित जांच
कालपी। तीन उपकेंद्रों पर कुल 99 मरीजों की जांच हुई। डॉक्टरों की मौजूदगी में गैस, बुखार, त्वचा व हाई बीपी के मरीजों का उपचार किया गया। परंतु गंभीर बीमारियों की जांच सीमित रही। डॉक्टरों ने लोगों को गर्मी में स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सलाह दी।
गोपालपुरा-मड़ोरी: मरीज भेजे गए रेफर
माधौगढ़। गोपालपुरा पीएचसी पर 47 और मड़ोरी में 52 मरीजों की जांच की गई। कुछ मरीजों को सीएचसी माधौगढ़ रेफर करना पड़ा। मड़ोरी में कई मरीजों को स्किन, श्वसन और गैस की समस्या पाई गई। एक मरीज में एनीमिया मिला, शुगर का भी एक केस सामने आया।
एलटी न होने के कारण नहीं हो पाई जांचें
जालौन। पीएचसी में आयोजित आरोग्य मेले में 44 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। अस्पताल में लैब टैक्नीशियन की कमी के कारण कुछ जांचों में दिक्कत आई। प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. सम्राट गुर्जर ने बताया कि अस्पताल में लैब टैक्नीशियन न होने से दिक्कत हुई। हालांकि, ब्लड प्रेशर और शुगर संबंधित जांचें अस्पताल में की गईं, लेकिन अन्य आवश्यक जांचें मरीजों को न कराई जा सकीं।