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खेतों से सड़कों तक मुसीबत बने अन्ना मवेशी
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खेत में फसल चरते अन्ना मवेशी।
- फोटो : ORAI
मुहम्मदाबाद(जालौन)। अन्ना मवेशी खेतों से सड़कों तक मुसीबत बने हुए हैं। यह झुंड में खेतों में धावा बोलकर फसल चट कर जाते हैं। हाईवे के साथ दूसरी सड़काें पर हादसों की वजह बन रहे हैं। इनकी वजह से हादसों में कई लोग घायल हो चुके हैं। कई की जान जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है।
जिले के सबसे बड़े डकोर ब्लाक में शासन से अन्ना मवेशियों के लिए 60 स्थायी और अस्थायी गोशालाएं संचालित हैं। इन पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी समस्या जस की तस है। अन्ना मवेशी खेतों में घुसकर फसलें नष्ट कर देते हैं। वहीं सड़कों, हाईवे और चौराहों पर इनके घूमने से हादसे हो रहे हैं। कई लोग चुटहिल होने के साथ जान गवां चुके हैं। अन्ना मवेशियों से फसल बचाने में किसानों की नींद खराब है। किसानों को चौबीस घंटे खेत की रखवाली करनी पड़ रही है। इन्हें खदेड़ने से पड़ोसी गांव के लोगों से विवाद भी हो जाता है।
किसानों ने बयां किया दर्द
किसान अमरचंद्र का कहना है कि गोशालाएं होने के बाद भी सैकड़ों अन्ना मवेशी खेतों में फसलें खराब कर रहे हैं। किसान मुश्किल से खाद, बीज, जुताई और बुआई के लिए पैसे का इंतजाम कर फसलें बोते हैं। अन्ना मवेशी फसलों को चर कर किसानों को तबाह कर देते हैं।
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किसान श्यामसुंदर का कहना है कि अन्ना मवेशी रात में सड़कों और हाईवे पर बैठ जाते हैं। इनकी वजह से वाहन चालक बेकाबू होकर हादसे का शिकार हो जाते हैं। गोशाला संचालक जानवरों को छुट्टा छोड़ देेते हैं। इससे फसलें तो बर्बाद होती ही हैं, साथ ही हादसे भी हो रहे हैं।
अन्ना मवेशियों के लिए लगाए गए चरवाहे: बीडीओ
समस्या को लेकर बीडीओ गौरव कुमार का कहना है कि अन्ना मवेशियों को चराने के लिए ब्लाक क्षेत्र में चरवाहे लगाए गए हैं। जहां अभी तक चरवाहे नहीं लगे, वहां इंतजाम किया जा रहा है। बताया कि सही ढंग से काम न करने वालों को हटाकर दूसरे चरवाहे लगाए जाएंगे।
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जिले के सबसे बड़े डकोर ब्लाक में शासन से अन्ना मवेशियों के लिए 60 स्थायी और अस्थायी गोशालाएं संचालित हैं। इन पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके बाद भी समस्या जस की तस है। अन्ना मवेशी खेतों में घुसकर फसलें नष्ट कर देते हैं। वहीं सड़कों, हाईवे और चौराहों पर इनके घूमने से हादसे हो रहे हैं। कई लोग चुटहिल होने के साथ जान गवां चुके हैं। अन्ना मवेशियों से फसल बचाने में किसानों की नींद खराब है। किसानों को चौबीस घंटे खेत की रखवाली करनी पड़ रही है। इन्हें खदेड़ने से पड़ोसी गांव के लोगों से विवाद भी हो जाता है।
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किसानों ने बयां किया दर्द
किसान अमरचंद्र का कहना है कि गोशालाएं होने के बाद भी सैकड़ों अन्ना मवेशी खेतों में फसलें खराब कर रहे हैं। किसान मुश्किल से खाद, बीज, जुताई और बुआई के लिए पैसे का इंतजाम कर फसलें बोते हैं। अन्ना मवेशी फसलों को चर कर किसानों को तबाह कर देते हैं।
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किसान श्यामसुंदर का कहना है कि अन्ना मवेशी रात में सड़कों और हाईवे पर बैठ जाते हैं। इनकी वजह से वाहन चालक बेकाबू होकर हादसे का शिकार हो जाते हैं। गोशाला संचालक जानवरों को छुट्टा छोड़ देेते हैं। इससे फसलें तो बर्बाद होती ही हैं, साथ ही हादसे भी हो रहे हैं।
अन्ना मवेशियों के लिए लगाए गए चरवाहे: बीडीओ
समस्या को लेकर बीडीओ गौरव कुमार का कहना है कि अन्ना मवेशियों को चराने के लिए ब्लाक क्षेत्र में चरवाहे लगाए गए हैं। जहां अभी तक चरवाहे नहीं लगे, वहां इंतजाम किया जा रहा है। बताया कि सही ढंग से काम न करने वालों को हटाकर दूसरे चरवाहे लगाए जाएंगे।