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Jalaun News: ढाई माह बाद बसपा ने फिर बदला जिलाध्यक्ष, बृजेश पर जताया भरोसा
Mon, 24 Mar 2025 12:29 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Mon, 24 Mar 2025 12:29 AM IST
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उरई। बसपा ने दस माह में पांच जिलाध्यक्ष बदल दिए हैं। शनिवार को बृजेश जाटव को जिलाध्यक्ष बनाया गया है। ढ़ाई माह बाद फिर से जिलाध्यक्ष बदले जाने से कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। वह सोशल मीडिया पर अपना विरोध जता रहे हैं।
बसपा के शीर्ष नेतृत्व ने लगभग तीन साल तक जिलाध्यक्ष रहे धीरेंद्र चौधरी को पिछले वर्ष 8 जून को पद से हटा दिया था। इसके बाद जितेंद्र दयालु को जिलाध्यक्ष बनाया गया। वह सिर्फ 48 दिन तक पद पर रहे। इसके बाद एक बार पुन: पार्टी ने धीरेंद्र चौधरी पर भरोसा जताया। लेकिन, 19 दिन बाद ही पार्टी ने जिला पंचायत सदस्य अतर सिंह पाल को जिलाध्यक्ष घोषित कर दिया। इससे पिछड़ी जाति के लोग बसपा की तरफ रुख करने लगे।
दो माह बाद दोबारा पार्टी ने बदलाव करते हुए फिर किशुनलाल पाल को जिलाध्यक्ष बनाया। वह अपनी कार्यकारिणी बना ही पाए थे कि शनिवार को पार्टी ने छौलापुर निवासी बृजेश जाटव को जिलाध्यक्ष बनाने की घोषणा की। इससे सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। उनका कहना है कि दस माह में पार्टी ने पांच जिलाध्यक्षों को बदल दिया है। इससे कार्यकर्ता यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि पार्टी की रणनीति क्या है। जो भी जिलाध्यक्ष बनकर आता है, वह अपनी कार्यकारिणी भी नहीं बना पाता और उसे पद से हटा दिया जाता है।अगर ऐसा ही होता रहा तो पार्टी का नुकसान होना तय है।
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बसपा के शीर्ष नेतृत्व ने लगभग तीन साल तक जिलाध्यक्ष रहे धीरेंद्र चौधरी को पिछले वर्ष 8 जून को पद से हटा दिया था। इसके बाद जितेंद्र दयालु को जिलाध्यक्ष बनाया गया। वह सिर्फ 48 दिन तक पद पर रहे। इसके बाद एक बार पुन: पार्टी ने धीरेंद्र चौधरी पर भरोसा जताया। लेकिन, 19 दिन बाद ही पार्टी ने जिला पंचायत सदस्य अतर सिंह पाल को जिलाध्यक्ष घोषित कर दिया। इससे पिछड़ी जाति के लोग बसपा की तरफ रुख करने लगे।
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दो माह बाद दोबारा पार्टी ने बदलाव करते हुए फिर किशुनलाल पाल को जिलाध्यक्ष बनाया। वह अपनी कार्यकारिणी बना ही पाए थे कि शनिवार को पार्टी ने छौलापुर निवासी बृजेश जाटव को जिलाध्यक्ष बनाने की घोषणा की। इससे सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। उनका कहना है कि दस माह में पार्टी ने पांच जिलाध्यक्षों को बदल दिया है। इससे कार्यकर्ता यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि पार्टी की रणनीति क्या है। जो भी जिलाध्यक्ष बनकर आता है, वह अपनी कार्यकारिणी भी नहीं बना पाता और उसे पद से हटा दिया जाता है।अगर ऐसा ही होता रहा तो पार्टी का नुकसान होना तय है।
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