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Jalaun News: मां-बाप की मौत के बाद मासूम पहुंचा ननिहाल
Mon, 10 Mar 2025 12:47 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Mon, 10 Mar 2025 12:47 AM IST
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मुहम्मदाबाद। 25 दिन के अंदर पति और पत्नी दोनों ने ही जहर खाकर आत्महत्या कर ली। दंपती की मौत के बाद उनका तीन साल का मासूम बेटा कार्तिकेय दोनों को याद कर बिलख रहा है। वह बार-बार मम्मी पापा को पुकारता है। ससुराल में उसे संभालने वाला कोई नहीं है। इस पर नाना उसे अपने साथ ले गए हैं।
डकोर कोतवाली क्षेत्र के गुढ़ा गांव निवासी धमेंद्र सिंह (28) ने पत्नी प्रियंका (26) से अक्सर विवाद होने पर 12 फरवरी को जहर खाकर जान दे दी थी। पति की मौत के बाद प्रियंका उरई आ गई थी और वह अपने तीन वर्षीय बेटे कार्तिकेय के साथ शहर के मोहल्ला इंदिरा नगर में रह रही थी। पड़ोसियों ने बताया कि वह पति की मौत के बाद से पूरी तरह से टूट चुकी थी। उसके ससुर पुलिस विभाग में तैनात थे। उनकी मौत के बाद डकोर के गुढ़ा गांव निवासी देवर ओमेंद्र सिंह को नौकरी मिल गई थी।
सास विमला को पति के फंड के रुपये और पेंशन भी मिल रही थी। धर्मेंद्र के काम पर न जाने से उसकी मां विमला उसकी मदद करती रहती थी। इसलिए धर्मेंद्र काम पर नहीं जा रहा था। धर्मेंद्र की मौत के बाद से ही परिजनों ने प्रियंका की मदद और बोलचाल भी बंद कर दी थी। परिजन उस पर आरोप लगाते थे कि उसी की वजह से धर्मेंद्र ने जहर खाकर जान दी।
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25 दिन तक तो प्रियंका सब कुछ सहती रही। लेकिन शुक्रवार की शाम उसका सब्र टूट गया और उसने जहर खाकर अपनी जान दे दी। उसने यह भी नहीं सोचा कि उसकी मौत के बाद से तीन वर्षीय बेटे कार्तिकेय का क्या होगा। उसकी मौत से बेटा मम्मी पापा कहता हुआ बिलख रहा था। इस पर मृतका के पिता इटावा जिले के ऊदी थाना क्षेत्र के पछाय गांव निवासी राजीव भदौरिया कार्तिकेय को अपने साथ ले गए।
धर्मेंद्र के काम न करने से दोनों में होता था विवाद
उरई। आसपास के लोगों की मानें तो धर्मेंद्र गुजरात में रहकर एक कंपनी में काम करता था। लेकिन वह कई महीनों से गुजरात नहीं गया था और गांव छोड़कर शहर के इंदिरा नगर में पत्नी व बेटे के साथ रहने लगा था। मां विमला को पेंशन मिलती थी तो वह धर्मेंद्र की मदद करती रहती थीं। इसलिए वह बाहर नहीं जा रहा था। इसको लेकर दोनों में विवाद होता था। इसी के चलते धर्मेद्र ने आत्महत्या कर ली थी। उसकी मौत के 25 दिन बाद ही पत्नी प्रियंका ने भी अपनी जान दे दी। (संवाद)
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डकोर कोतवाली क्षेत्र के गुढ़ा गांव निवासी धमेंद्र सिंह (28) ने पत्नी प्रियंका (26) से अक्सर विवाद होने पर 12 फरवरी को जहर खाकर जान दे दी थी। पति की मौत के बाद प्रियंका उरई आ गई थी और वह अपने तीन वर्षीय बेटे कार्तिकेय के साथ शहर के मोहल्ला इंदिरा नगर में रह रही थी। पड़ोसियों ने बताया कि वह पति की मौत के बाद से पूरी तरह से टूट चुकी थी। उसके ससुर पुलिस विभाग में तैनात थे। उनकी मौत के बाद डकोर के गुढ़ा गांव निवासी देवर ओमेंद्र सिंह को नौकरी मिल गई थी।
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सास विमला को पति के फंड के रुपये और पेंशन भी मिल रही थी। धर्मेंद्र के काम पर न जाने से उसकी मां विमला उसकी मदद करती रहती थी। इसलिए धर्मेंद्र काम पर नहीं जा रहा था। धर्मेंद्र की मौत के बाद से ही परिजनों ने प्रियंका की मदद और बोलचाल भी बंद कर दी थी। परिजन उस पर आरोप लगाते थे कि उसी की वजह से धर्मेंद्र ने जहर खाकर जान दी।
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25 दिन तक तो प्रियंका सब कुछ सहती रही। लेकिन शुक्रवार की शाम उसका सब्र टूट गया और उसने जहर खाकर अपनी जान दे दी। उसने यह भी नहीं सोचा कि उसकी मौत के बाद से तीन वर्षीय बेटे कार्तिकेय का क्या होगा। उसकी मौत से बेटा मम्मी पापा कहता हुआ बिलख रहा था। इस पर मृतका के पिता इटावा जिले के ऊदी थाना क्षेत्र के पछाय गांव निवासी राजीव भदौरिया कार्तिकेय को अपने साथ ले गए।
धर्मेंद्र के काम न करने से दोनों में होता था विवाद
उरई। आसपास के लोगों की मानें तो धर्मेंद्र गुजरात में रहकर एक कंपनी में काम करता था। लेकिन वह कई महीनों से गुजरात नहीं गया था और गांव छोड़कर शहर के इंदिरा नगर में पत्नी व बेटे के साथ रहने लगा था। मां विमला को पेंशन मिलती थी तो वह धर्मेंद्र की मदद करती रहती थीं। इसलिए वह बाहर नहीं जा रहा था। इसको लेकर दोनों में विवाद होता था। इसी के चलते धर्मेद्र ने आत्महत्या कर ली थी। उसकी मौत के 25 दिन बाद ही पत्नी प्रियंका ने भी अपनी जान दे दी। (संवाद)