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Jalaun News: एक करोड़ की जमीन बेचने की पड़ोसी को लगी थी भनक, तभी रची साजिश
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एक करोड़ की जमीन बेचने की उमेश को लगी थी भनक, तभी बनाया प्लान
मेडिकल स्टोर संचालक का अपहरण करने में छह को हुई है उम्रकैद
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। मेडिकल स्टोर संचालक का अपहरण कर एक करोड़ की फिरौती मांगने के मामले में छह आरोपियों को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पड़ोसी ने अपने साथी बदमाशों से मिलकर संचालक के अपहरण की साजिश रची थी। क्योंकि उसे पता चल गया था कि युवक की जमीन का एक करोड़ का सौदा हो गया है। उसका पीड़ित के घर आना जाना था। परिवार के लोग उसे अपने घर का सदस्य समझते थे। उसी का फायदा उठाकर उसने घटना को अंजाम दिया था।
एट थाना क्षेत्र के चावनपुरा गांव निवासी सौरभ ने एट थाना को तहरीर देते हुए बताया था कि 23 जुलाई 2013 की रात 9 बजे उसका बड़ा भाई अजय कुमार एट स्थित मेडिकल स्टोर की दुकान बंदकर बाइक से अपने घर आ रहा था। लेकिन वह देर रात तक घर नहीं पहुंचा। घर न पहुंचने पर परिजनों ने उसकी खोजबीन की तो एट के रास्ते में उसकी बाइक, चप्पल और मोबाइल पड़ा मिला था। पुलिस को सूचना मिली थी कि उसका अपहरण किया गया है। बदमाश उनके परिजनों से एक करोड़ की फिरौती की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने कैलिया थाना क्षेत्र के जंगल से मुठभेड़ में मध्य प्रदेश के दतिया कोतवाली क्षेत्र के रिछारा फाटक निवासी प्रीतम जमादार, नीरज वाल्मीकी, कानपुर देहात के नवीपुर निवासी संदीप कुमार, प्रदीप कुमार व कानपुर नगर के घाटमपुर कोतवाली क्षेत्र के बेहटा गांव निवासी मुहम्मद इकबाल, झांसी जिले के मोंठ कोतवाली क्षेत्र के जोरा गांव निवासी उमेश कुमार मिश्रा व दतिया निवासी बाल किशुन कुशवाहा को मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया था। जबकि मध्य प्रदेश के दतिया जिले के तलैया निवासी छोटू उर्फ दादा, कानपुर देहात के गजनेर थाना क्षेत्र के कुरारी निवासी दीपक उर्फ दिनेश मौके से भागने में सफल हो गया था। पुलिस ने युवक को बदमाशों के पास से छुड़ा लिया था। शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश डकैती कोर्ट डॉ. अवनीश कुमार ने छह बदमाशों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पीड़ित संचालक की फरवरी 2024 में मौत हो चुकी है। उसके भाई धर्मेंद्र पटेल ने बताया कि उनके चाचा उदनारायण पटेल के पास करीब सौ बीधा जमीन थी। उनके दो बेटे अजय व सौरभ थे। सौरभ मेडिकल स्टोर संचालित करता था। उसी दौरान झांसी जिले के मोंठ थाना क्षेत्र के जौरा गांव निवासी उमेश कुमार मिश्रा उनके पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति के यहां रहने लगा। वह उमेश के रिश्तेदार थे। तभी उमेश उनके दुकान व घर पर भी आने जाने लगा। उसी दौरान उनके ताऊ ने खदानी में पड़ने वाली जमीन का एक करोड़ का सौदा कर लिया। कुछ ही दिन में रुपये भी मिलने वाले थे। इस बात की जानकारी उमेश कुमार मिश्रा को भी लग गई। क्योंकि वह उनके घर आता जाता था। उसे जानकारी थी कि अजय प्रतिदिन बाइक से मेडिकल स्टोर जाता है और रात करीब नौ बजे वापस घर लौटता है। इसके बाद वह बदमाशों से जा मिला। इसके बाद अजय के अपहरण की योजना बनाई गई। 23 जुलाई 2013 को जब अजय घर लौट रहा था। तो उमेश ने अपने साथियों के साथ उसका अपहरण कर लिया था।
फोन कॉल आने पर बंधी थी परिजनों को अजय के घर आने की आस
उरई। बदमाशों ने 23 जुलाई 2013 को अजय का अपहरण कर लिया था। उसकी बाइक, मोबाइल, चप्पल आदि सड़क पर पड़ा मिला था। परिजनों ने उसकी खोजबीन की तो उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली। घटना के दूसरे दिन परिजन थाने पहुंचे और रिपोर्ट दर्ज कराई। लेकिन युवक का कहीं कोई पता नहीं चला। इस पर परिजन अनहोनी की आंशका जताकर रो रहे थे। लेकिन करीब आठ दिन बाद युवक के पिता के मित्र जाहर सिंह के पास मोबाइल पर फोन आया कि बदमाशों ने अजय को पकड़ लिया और एक करोड़ की फिरौती मांग रहे हैं। तब परिजनों को आस लगी थी कि उनका अजय अभी जिंदा है। इसके बाद उन्होंने उच्चाधिकारियों को जानकारी दी और पुलिस ने मुठभेड़ में अजय को बदमाशों से छुड़ा लिया।
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अपहरण में प्रयुक्त कार का नहीं लगा कोई सुराग, बदमाशों को हो गई आजीवन कारावास
उरई। बदमाशों ने मेडिकल स्टोर संचालक का जिस कार से अपहरण किया था। उसका पुलिस आज तक पता नहीं लगा पाई है। घटना के बाद पुलिस ने पूरे मामले में छह लोगों की गवाही के साथ 60 पेज की केस डायरी दाखिल की गई थी। लेकिन उसमें कार की बरामदगी का कोई जिक्र नहीं है।
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एक करोड़ की जमीन बेचने की उमेश को लगी थी भनक, तभी बनाया प्लान
मेडिकल स्टोर संचालक का अपहरण करने में छह को हुई है उम्रकैद
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। मेडिकल स्टोर संचालक का अपहरण कर एक करोड़ की फिरौती मांगने के मामले में छह आरोपियों को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पड़ोसी ने अपने साथी बदमाशों से मिलकर संचालक के अपहरण की साजिश रची थी। क्योंकि उसे पता चल गया था कि युवक की जमीन का एक करोड़ का सौदा हो गया है। उसका पीड़ित के घर आना जाना था। परिवार के लोग उसे अपने घर का सदस्य समझते थे। उसी का फायदा उठाकर उसने घटना को अंजाम दिया था।
एट थाना क्षेत्र के चावनपुरा गांव निवासी सौरभ ने एट थाना को तहरीर देते हुए बताया था कि 23 जुलाई 2013 की रात 9 बजे उसका बड़ा भाई अजय कुमार एट स्थित मेडिकल स्टोर की दुकान बंदकर बाइक से अपने घर आ रहा था। लेकिन वह देर रात तक घर नहीं पहुंचा। घर न पहुंचने पर परिजनों ने उसकी खोजबीन की तो एट के रास्ते में उसकी बाइक, चप्पल और मोबाइल पड़ा मिला था। पुलिस को सूचना मिली थी कि उसका अपहरण किया गया है। बदमाश उनके परिजनों से एक करोड़ की फिरौती की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने कैलिया थाना क्षेत्र के जंगल से मुठभेड़ में मध्य प्रदेश के दतिया कोतवाली क्षेत्र के रिछारा फाटक निवासी प्रीतम जमादार, नीरज वाल्मीकी, कानपुर देहात के नवीपुर निवासी संदीप कुमार, प्रदीप कुमार व कानपुर नगर के घाटमपुर कोतवाली क्षेत्र के बेहटा गांव निवासी मुहम्मद इकबाल, झांसी जिले के मोंठ कोतवाली क्षेत्र के जोरा गांव निवासी उमेश कुमार मिश्रा व दतिया निवासी बाल किशुन कुशवाहा को मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया था। जबकि मध्य प्रदेश के दतिया जिले के तलैया निवासी छोटू उर्फ दादा, कानपुर देहात के गजनेर थाना क्षेत्र के कुरारी निवासी दीपक उर्फ दिनेश मौके से भागने में सफल हो गया था। पुलिस ने युवक को बदमाशों के पास से छुड़ा लिया था। शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश डकैती कोर्ट डॉ. अवनीश कुमार ने छह बदमाशों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पीड़ित संचालक की फरवरी 2024 में मौत हो चुकी है। उसके भाई धर्मेंद्र पटेल ने बताया कि उनके चाचा उदनारायण पटेल के पास करीब सौ बीधा जमीन थी। उनके दो बेटे अजय व सौरभ थे। सौरभ मेडिकल स्टोर संचालित करता था। उसी दौरान झांसी जिले के मोंठ थाना क्षेत्र के जौरा गांव निवासी उमेश कुमार मिश्रा उनके पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति के यहां रहने लगा। वह उमेश के रिश्तेदार थे। तभी उमेश उनके दुकान व घर पर भी आने जाने लगा। उसी दौरान उनके ताऊ ने खदानी में पड़ने वाली जमीन का एक करोड़ का सौदा कर लिया। कुछ ही दिन में रुपये भी मिलने वाले थे। इस बात की जानकारी उमेश कुमार मिश्रा को भी लग गई। क्योंकि वह उनके घर आता जाता था। उसे जानकारी थी कि अजय प्रतिदिन बाइक से मेडिकल स्टोर जाता है और रात करीब नौ बजे वापस घर लौटता है। इसके बाद वह बदमाशों से जा मिला। इसके बाद अजय के अपहरण की योजना बनाई गई। 23 जुलाई 2013 को जब अजय घर लौट रहा था। तो उमेश ने अपने साथियों के साथ उसका अपहरण कर लिया था।
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फोन कॉल आने पर बंधी थी परिजनों को अजय के घर आने की आस
उरई। बदमाशों ने 23 जुलाई 2013 को अजय का अपहरण कर लिया था। उसकी बाइक, मोबाइल, चप्पल आदि सड़क पर पड़ा मिला था। परिजनों ने उसकी खोजबीन की तो उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली। घटना के दूसरे दिन परिजन थाने पहुंचे और रिपोर्ट दर्ज कराई। लेकिन युवक का कहीं कोई पता नहीं चला। इस पर परिजन अनहोनी की आंशका जताकर रो रहे थे। लेकिन करीब आठ दिन बाद युवक के पिता के मित्र जाहर सिंह के पास मोबाइल पर फोन आया कि बदमाशों ने अजय को पकड़ लिया और एक करोड़ की फिरौती मांग रहे हैं। तब परिजनों को आस लगी थी कि उनका अजय अभी जिंदा है। इसके बाद उन्होंने उच्चाधिकारियों को जानकारी दी और पुलिस ने मुठभेड़ में अजय को बदमाशों से छुड़ा लिया।
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अपहरण में प्रयुक्त कार का नहीं लगा कोई सुराग, बदमाशों को हो गई आजीवन कारावास
उरई। बदमाशों ने मेडिकल स्टोर संचालक का जिस कार से अपहरण किया था। उसका पुलिस आज तक पता नहीं लगा पाई है। घटना के बाद पुलिस ने पूरे मामले में छह लोगों की गवाही के साथ 60 पेज की केस डायरी दाखिल की गई थी। लेकिन उसमें कार की बरामदगी का कोई जिक्र नहीं है।