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गजानन के बहुआयामी स्वरूपों ने मोहा
Jalaun
Updated Tue, 25 Sep 2012 12:00 PM IST
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उरई(जालौन)। श्रीगणेशोत्सव पर स्थानीय आर्य कन्या इंटर कॉलेज में लगी हस्तशिल्प प्रदर्शनी में प्रदर्शित
विघ्नहर्ता के बहुआयामी स्वरूपों ने दर्शकों को आश्चर्य में डाला। इस मौके पर बच्चों को गजानन के जीवन चरित्र से प्रेरणा लेने की सीख दी गई।
भारतीय सांस्कृतिक निधि उरई अध्याय के तत्वावधान में आयोजित भगवान श्रीगणेश को समर्पित हस्तशिल्प
प्रदर्शनी का उद्घाटन वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश चंद्र सक्सेना ने किया। उन्होंने कहा श्रीगणेश के विविध स्वरुपों को देखकर मैं आश्चर्यचकित हूं। उन्होंने बताया गणेश उत्सव का लोकमान्य बालक गंगाधर तिलक ने महाराष्ट्र में शुभारंभ किया था। तिलक जी ने गणेश उत्सव के माध्यम से अंग्रेजों के विरुद्ध जनचेतना जाग्रत की थी। प्रभारी प्रधानाचार्या रेखा सोनी ने प्रदर्शनी में भाग लेने वाले बच्चों को श्रीगणेश के चरित्र से प्रेरणा लेने की सीख दी।
उन्होंने कहा जिस तरह श्रीगणेश ने अपने माता पिता का सम्मान करते हुए देवताओं के बीच प्रथम पूज्य होने का सम्मान प्राप्त किया। इसी तरह बच्चों को भी यही प्रयत्न करना चाहिए। प्रदर्शनी में कालपी के इकोफ्रैंडली कागज से हस्तनिर्मित लगभग 100 बड़ी व 100 छोटी पेंटिग्स इंटैक का प्रदर्शन किया गया था। सभी क्राफ्ट पेंटिंग्स इंटैक उरई अध्याय के संयोजक डॉ. हरी मोहन पुरवार व सदस्य श्रीमती संध्या पुरवार के निर्देशन में बनवाई गई थीं। हरीमोहन पुरवार ने बच्चों को श्री गणेश के विविध स्वरुपों से परिचित करते हुए कहा श्रीगणेश का संपूर्ण स्वरुप सामाजिकता से ओतप्रोत है। इस मौके पर अलका रानी, इंद्रा उपाध्याय, डीके सिंह, नीता गुप्ता, मंजू जौहरी, नगमा खानम, मदन बाबू चतुर्वेदी, मोहित पाटकार, साक्षी पुरवार और राजेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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विघ्नहर्ता के बहुआयामी स्वरूपों ने दर्शकों को आश्चर्य में डाला। इस मौके पर बच्चों को गजानन के जीवन चरित्र से प्रेरणा लेने की सीख दी गई।
भारतीय सांस्कृतिक निधि उरई अध्याय के तत्वावधान में आयोजित भगवान श्रीगणेश को समर्पित हस्तशिल्प
प्रदर्शनी का उद्घाटन वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश चंद्र सक्सेना ने किया। उन्होंने कहा श्रीगणेश के विविध स्वरुपों को देखकर मैं आश्चर्यचकित हूं। उन्होंने बताया गणेश उत्सव का लोकमान्य बालक गंगाधर तिलक ने महाराष्ट्र में शुभारंभ किया था। तिलक जी ने गणेश उत्सव के माध्यम से अंग्रेजों के विरुद्ध जनचेतना जाग्रत की थी। प्रभारी प्रधानाचार्या रेखा सोनी ने प्रदर्शनी में भाग लेने वाले बच्चों को श्रीगणेश के चरित्र से प्रेरणा लेने की सीख दी।
उन्होंने कहा जिस तरह श्रीगणेश ने अपने माता पिता का सम्मान करते हुए देवताओं के बीच प्रथम पूज्य होने का सम्मान प्राप्त किया। इसी तरह बच्चों को भी यही प्रयत्न करना चाहिए। प्रदर्शनी में कालपी के इकोफ्रैंडली कागज से हस्तनिर्मित लगभग 100 बड़ी व 100 छोटी पेंटिग्स इंटैक का प्रदर्शन किया गया था। सभी क्राफ्ट पेंटिंग्स इंटैक उरई अध्याय के संयोजक डॉ. हरी मोहन पुरवार व सदस्य श्रीमती संध्या पुरवार के निर्देशन में बनवाई गई थीं। हरीमोहन पुरवार ने बच्चों को श्री गणेश के विविध स्वरुपों से परिचित करते हुए कहा श्रीगणेश का संपूर्ण स्वरुप सामाजिकता से ओतप्रोत है। इस मौके पर अलका रानी, इंद्रा उपाध्याय, डीके सिंह, नीता गुप्ता, मंजू जौहरी, नगमा खानम, मदन बाबू चतुर्वेदी, मोहित पाटकार, साक्षी पुरवार और राजेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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