{"_id":"39-180410","slug":"Jalaun-180410-39","type":"story","status":"publish","title_hn":"पारा 44 के पार, लोग हुए बेहाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पारा 44 के पार, लोग हुए बेहाल
Jalaun
Updated Sat, 03 May 2014 05:30 AM IST
विज्ञापन
उरई(जालौन)।भीषण गर्मी के चलते शुक्रवार को जन जीवन अस्त व्यस्त रहा।सीजन का आज सबसे गर्म दिन रहा। अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
आज सुबह नौ बजे से ही सूरज ने आग उगलनी शुरु कर दी थी। जिसके चलते दोपहर होते होते पारा 44.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। भीषण गर्मी के कारण दोपहर को सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। गर्मी से बचने के लिए लोग घरों में कूलर व पंखों की हवा लेते रहे। बाजार में भी सन्नाटा छाया रहा। इसी दौरान दो बजे से पांच बजे तक होने वाली बिजली की कटौती ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। लोग घरों से निकलकर पार्कों व पेड़ों के नीचे बैठकर दोपहर बिताते रहे। जिन लोगों को मजबूरी में घरों से निकलना पड़ा, वे अपने चेहरे को कपड़ों से ढक कर सड़कों पर निकले, क्योंकि सूरज की आग उगलती किरणें शरीर में सुई की तरह चुभ रहीं थीं। गर्मी के कारण राहगीरों का कुछ कदम चलने के बाद ही गलता सूखने लगता। प्यास बुझाने के लिए लोग सड़क किनारे बिकने वाले पेय पदार्थों व पानी के पाउच खरीद रहे थे। स्टेशन पर गाड़ी के रुकते ही यात्री उतरकर पानी की तलाश में टूट पड़ते थे। स्टेशन पर रखे घडे़ कुछ ही देर में खाली हो गए। लोग नल का पानी पीकर अपनी प्यास बुझा रहे थे।
विज्ञापन
आज सुबह नौ बजे से ही सूरज ने आग उगलनी शुरु कर दी थी। जिसके चलते दोपहर होते होते पारा 44.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। भीषण गर्मी के कारण दोपहर को सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। गर्मी से बचने के लिए लोग घरों में कूलर व पंखों की हवा लेते रहे। बाजार में भी सन्नाटा छाया रहा। इसी दौरान दो बजे से पांच बजे तक होने वाली बिजली की कटौती ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी। लोग घरों से निकलकर पार्कों व पेड़ों के नीचे बैठकर दोपहर बिताते रहे। जिन लोगों को मजबूरी में घरों से निकलना पड़ा, वे अपने चेहरे को कपड़ों से ढक कर सड़कों पर निकले, क्योंकि सूरज की आग उगलती किरणें शरीर में सुई की तरह चुभ रहीं थीं। गर्मी के कारण राहगीरों का कुछ कदम चलने के बाद ही गलता सूखने लगता। प्यास बुझाने के लिए लोग सड़क किनारे बिकने वाले पेय पदार्थों व पानी के पाउच खरीद रहे थे। स्टेशन पर गाड़ी के रुकते ही यात्री उतरकर पानी की तलाश में टूट पड़ते थे। स्टेशन पर रखे घडे़ कुछ ही देर में खाली हो गए। लोग नल का पानी पीकर अपनी प्यास बुझा रहे थे।