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...और पुतरा की जीवन संगिनी बनी पुतरिया
Jalaun
Updated Sat, 03 May 2014 05:30 AM IST
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उरई(जालौन)। अक्षय तृतीया का पर्व परंपरागत ढंग से मनाया गया। पुतरा और पुतरियों का विवाह रचाया गया तो वहीं बारातियों को स्वागत में गुड़ व देवल खिलाए गए। अक्ति ग्राउंड में मेला का लुत्फ भी बच्चों एवं महिलाओं ने खूब उठाया।
अक्षय तृतीया पर्व पर तुलसी नगर में अक्ति ग्राउंड पर मेला सुबह से ही लग गया था। शाम होते होते मेला की रौनक भी बढ़ गई। यहां पर स्थित दो-दो मजारों की पूजा के बाद पुतरा और पुतरियों का विवाह आयोजित किया गया। लड़कियां पुतरियां लेकर पहुंची तो लड़के पुतरे की बारात लेकर। इसके बाद फिर वैवाहिक रस्मों को निभाया गया। फिर पुतरियों को विदा किया गया। यह पर्व बुंदेलखंड में विशेष रुप से मनाया जाता है। इस वर्ष कार्यक्रम तो सभीहुए लेकिन सिर्फ औपचारिकताएं ही पूरी हो सकीं। अक्ति ग्राउंड में लगे मेला में झूला आकर्षण का केंद्र रहे। महिलाओं ने मीना बाजार से सिंदूर, चूड़ी, कंगन आदि की खरीदारी की तो छोटे बच्चों ने खिलाने की जिद की तो उन्हें खुशी मिल गई। इसके बाद ग्राउंड में लगे विभिन्न प्रकार के झूलों का भी लुत्फ उठाया गया। कार झूला छोटे बच्चों की पहली पसंद रहा। स्वेता बताती है कि उसने अपने हाथ से ही पुतरा और पुतरियां बनाई हैं। वहीं राखी का कहना था कि उसने बाजार से रेडीमेड पुतरियां खरीदकर अक्ति पूजा की है। अक्षय तृतीया पर जहां एक तरफ मेला में खरीदारी हो रही थी।
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अक्षय तृतीया पर्व पर तुलसी नगर में अक्ति ग्राउंड पर मेला सुबह से ही लग गया था। शाम होते होते मेला की रौनक भी बढ़ गई। यहां पर स्थित दो-दो मजारों की पूजा के बाद पुतरा और पुतरियों का विवाह आयोजित किया गया। लड़कियां पुतरियां लेकर पहुंची तो लड़के पुतरे की बारात लेकर। इसके बाद फिर वैवाहिक रस्मों को निभाया गया। फिर पुतरियों को विदा किया गया। यह पर्व बुंदेलखंड में विशेष रुप से मनाया जाता है। इस वर्ष कार्यक्रम तो सभीहुए लेकिन सिर्फ औपचारिकताएं ही पूरी हो सकीं। अक्ति ग्राउंड में लगे मेला में झूला आकर्षण का केंद्र रहे। महिलाओं ने मीना बाजार से सिंदूर, चूड़ी, कंगन आदि की खरीदारी की तो छोटे बच्चों ने खिलाने की जिद की तो उन्हें खुशी मिल गई। इसके बाद ग्राउंड में लगे विभिन्न प्रकार के झूलों का भी लुत्फ उठाया गया। कार झूला छोटे बच्चों की पहली पसंद रहा। स्वेता बताती है कि उसने अपने हाथ से ही पुतरा और पुतरियां बनाई हैं। वहीं राखी का कहना था कि उसने बाजार से रेडीमेड पुतरियां खरीदकर अक्ति पूजा की है। अक्षय तृतीया पर जहां एक तरफ मेला में खरीदारी हो रही थी।
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