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66 वर्षो से जालौन तहसील में दौड़ रही वादों की ट्रेन
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जालौन। जनपद की पहचान भले ही जालौन नाम से होती हो और यहां की लोकसभा सीट भी जालौन-गरौठा-भोगनीपुर संसदीय सीट कहलाती हो लेकिन जब बात विकास की आती है तो जनपद में सबसे पिछड़ी जालौन तहसील ही मानी जाती है। विकास की रोशनी न पहुंचने का भी मलाल दिलों में दबाकर रखने वाले करीब 2 लाख 20 हजार मतदाताओं को हर बार चुनाव आते ही एक अदद रेलवे स्टेशन न होने का दर्द जरूर अखरता है।
जालौन तहसील क्षेत्र में रहने वाले मतदाताओं का कहना है कि सन् 1952 से नेता रेलवे ट्रैक बिछाकर स्टेशन देने का वादा तो कर रहे हैं, लेकिन आज तक पटरी तो दूर उसकी गिट्टी तक और स्टेशन तो दूर एक प्लेटफार्म तक नजर नहीं आया है। फिर वह चाहे कांग्रेस, जनता दल, भाजपा अथवा सपा किसी भी दल का सांसद क्यों न रहा हो, सभी ने रेल लाइन बिछाने का वादा तो किया लेकिन यह वादा सिर्फ कागजी कार्रवाई से आगे नहीं बढ़ सका।
पहले लोकसभा चुनाव यानी 1952 से लेकर अभी तक तकरीबन हर दल के वादे पर तहसील के मतदाताओं ने भरोसा किया और लगभग सभी दलों के प्रत्याशी यहां से सांसद बन चुके हैं। सभी ने मतदाताओं की दुखती रग पर हाथ रखा और सबसे पहले रेलवे लाइन बिछाने का वादा करते हुए वोट मांगा, जनता ने भी किसी को निराश नहीं किया और जिसे सही उम्मीदवार समझा उसकी झोली वोटों से भर दी।
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यह बात और है कि तहसील में रेलवे लाइन बिछने का सपना आज भी एक सपना ही बना है। जिस कारण व्यापारी, नौकरीपेशा और पढ़ाई करने वाले युवाओं को जब भी कभी ट्रेन पकड़नी होती है तो उन्हें उरई या फिर दिबियापुर रेलवे स्टेशनों का रुख करना पड़ता है। यहां के मतदाताओं का तो यह तक कहना है कि उन्हें किसी दल अथवा नेता से आज भी कोई शिकायत नहीं है, वे तो सिर्फ उस लोकसभा चुनाव का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद जालौन तहसील में लोगों को ट्रेन की सुविधा मुहैय्या हो सकेगी।
रेल मंत्री शास्त्री भी कर गए थे सौगात का वादा
तहसील के पुराने लोगों की मानें तो सन 1961-62 में जब लाल बहादुर शास्त्री रेल मंत्री थे और उनकी विशाल जनसभा तहसील स्थित छत्रसाल इंटर कालेज में आयोजित की गई थी। उस सभा में यहां के लोगों की पुरजोर मांग पर जाते वक्त शास्त्री जी वादा कर गए थे कि जालौन तहसील में रेलवे लाइन बिछाने का प्रस्ताव तैयार कराएंगे, उसके बाद भी हर सांसद प्रत्याशी ने मतदाताओं से सिर्फ लाइन डलवाने का वादा ही किया है, पूरा किसी ने नहीं किया है।
2016 में जनता भी सड़क पर उतर आई
नगर को रेलवे लाइन से जोड़े जाने के लिए नगर के लोगों ने क्षेत्र के लोगों के साथ मिलकर 8 मार्च 2016 से क्रमिक अनशन की शुरूआत की थी। जो 19 अप्रैल तक चला था, इसके बाद 30 अप्रैल से 2 मई तक लगातार आमरण अनशन भी चला था। जिसमें क्षेत्रीय सांसद भानुप्रताप वर्मा ने नगर को रेलवे लाईन से जोड़े जाने का भरोसा दिया था। इसके कुछ बाद रेलवे की टीम ने तहसील आकर सर्वे भी किया, पर अभी तक कोई काम आगे नहीं बढ़ सका।
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जालौन तहसील क्षेत्र में रहने वाले मतदाताओं का कहना है कि सन् 1952 से नेता रेलवे ट्रैक बिछाकर स्टेशन देने का वादा तो कर रहे हैं, लेकिन आज तक पटरी तो दूर उसकी गिट्टी तक और स्टेशन तो दूर एक प्लेटफार्म तक नजर नहीं आया है। फिर वह चाहे कांग्रेस, जनता दल, भाजपा अथवा सपा किसी भी दल का सांसद क्यों न रहा हो, सभी ने रेल लाइन बिछाने का वादा तो किया लेकिन यह वादा सिर्फ कागजी कार्रवाई से आगे नहीं बढ़ सका।
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पहले लोकसभा चुनाव यानी 1952 से लेकर अभी तक तकरीबन हर दल के वादे पर तहसील के मतदाताओं ने भरोसा किया और लगभग सभी दलों के प्रत्याशी यहां से सांसद बन चुके हैं। सभी ने मतदाताओं की दुखती रग पर हाथ रखा और सबसे पहले रेलवे लाइन बिछाने का वादा करते हुए वोट मांगा, जनता ने भी किसी को निराश नहीं किया और जिसे सही उम्मीदवार समझा उसकी झोली वोटों से भर दी।
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यह बात और है कि तहसील में रेलवे लाइन बिछने का सपना आज भी एक सपना ही बना है। जिस कारण व्यापारी, नौकरीपेशा और पढ़ाई करने वाले युवाओं को जब भी कभी ट्रेन पकड़नी होती है तो उन्हें उरई या फिर दिबियापुर रेलवे स्टेशनों का रुख करना पड़ता है। यहां के मतदाताओं का तो यह तक कहना है कि उन्हें किसी दल अथवा नेता से आज भी कोई शिकायत नहीं है, वे तो सिर्फ उस लोकसभा चुनाव का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद जालौन तहसील में लोगों को ट्रेन की सुविधा मुहैय्या हो सकेगी।
रेल मंत्री शास्त्री भी कर गए थे सौगात का वादा
तहसील के पुराने लोगों की मानें तो सन 1961-62 में जब लाल बहादुर शास्त्री रेल मंत्री थे और उनकी विशाल जनसभा तहसील स्थित छत्रसाल इंटर कालेज में आयोजित की गई थी। उस सभा में यहां के लोगों की पुरजोर मांग पर जाते वक्त शास्त्री जी वादा कर गए थे कि जालौन तहसील में रेलवे लाइन बिछाने का प्रस्ताव तैयार कराएंगे, उसके बाद भी हर सांसद प्रत्याशी ने मतदाताओं से सिर्फ लाइन डलवाने का वादा ही किया है, पूरा किसी ने नहीं किया है।
2016 में जनता भी सड़क पर उतर आई
नगर को रेलवे लाइन से जोड़े जाने के लिए नगर के लोगों ने क्षेत्र के लोगों के साथ मिलकर 8 मार्च 2016 से क्रमिक अनशन की शुरूआत की थी। जो 19 अप्रैल तक चला था, इसके बाद 30 अप्रैल से 2 मई तक लगातार आमरण अनशन भी चला था। जिसमें क्षेत्रीय सांसद भानुप्रताप वर्मा ने नगर को रेलवे लाईन से जोड़े जाने का भरोसा दिया था। इसके कुछ बाद रेलवे की टीम ने तहसील आकर सर्वे भी किया, पर अभी तक कोई काम आगे नहीं बढ़ सका।