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जिले के किसान 642 करोड़ के कर्जदार
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Wed, 17 Feb 2016 10:46 PM IST
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सूखा, बारिश और ओलावृष्टि जैसी आपदाओं के दंश से जूझ रहे किसानों की आर्थिक
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स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। यहां का किसान कर्ज के बोझ से इस कदर
दबा हुआ है कि उबरना मुश्किल हो रहा है। खेती से लेकर बीमारी, शादी-विवाह
एवं अन्य पारिवारिक व्यवस्थाओं के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। बैंक से मिल
गया तो ठीक नहीं तो सूदखोरों का सहारा लेते
हैं। इस समय जिले के किसान 642 करोड़ रुपये के कर्जदार हो चुके हैं जो चिंता का विषय बना हुआ है। इस वित्तीय वर्ष में 642 करोड़ 76 लाख का कर्ज तो किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए ही लिया गया है। इसमें सबसे अधिक इलाहाबाद बैंक की 29 शाखाओं से कर्ज दिया गया है। इसके अलावा 115 अन्य बैंक शाखाओं ने किसानों को कर्ज बांटा है। इसके अलावा किसानों
ने खाद भी क्रेडिट पर ही ले रखी है। गौरतलब है कि जनपद का किसान कई साल से दैवी आपदाओं के दंश से जूझता चला आ रहा है। हालत यह है कि कभी बारिश ने किसानों को रुलाया तो कभी सूखा कहर बनकर टूटा। ओलावृष्टि से भी किसान बर्बाद हुआ है। लगातार मौसम की मार झेल रहा किसान आर्थिक रूप से बुरी तरह टूट चुका है। यही वजह है कि किसानों
को कर्ज का ही आसरा है। वर्ष 2015-16 में जनपद की 144 बैंक शाखाओं से 35954 किसानों के क्रेडिट कार्ड बनाए गए हैं। इन किसान क्रेडिट कार्डों पर 642 करोड़ 76 लाख रुपये का ऋण बैंक की ओर से दिया गया। किसानों ने बैंक से लिए ऋण से खरीफ की फसल की तो उसमें भी नुकसान उठाना पड़ा और अब रबी फसल का भी कुछ ऐसा ही हाल है, सूखा के हालात
बने हुए हैं। रबी फसल के लिए ही 392 करोड़ रुपये का कर्ज बैंक से लिया गया है। किसानों को सिंचाई के लिए हजारों रुपये खर्चने पड़ रहे हैं। कर्ज का इतना बोझ कि उससे उबरना मुश्किल हो रहा है। यही करण है कि समय-समय पर कहीं जिंदगी का दामन छोड़ता दिख रहा है तो कहीं खेती बेचने को मजबूर है।
चार माह में तेजी से बने किसान क्रेडिट कार्ड
जनपद में किसानों को खेती किसानी के काम के लिए पैसों की कमी न पड़े इस मंशा से जमीन के आधार पर क्रेडिट कार्ड बनाकर ऋण देने का प्रावधान है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में सात माह में जहां पर 15077 किसानों के क्रेडिट कार्ड बने थे और 250 करोड़ 86 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ था वहीं पर चार माह में 20877 किसानों के क्रेडिट कार्ड बनाए गए। इनको 392 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया।
2,80,000 किसानों के बने क्रेडिट कार्ड
जनपद में करीब तीन लाख किसान हैं जिसमें से दो लाख 80 हजार ऐसे है जो किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से बैंकों से कर्ज लिए हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे हैं जो जमीन को बंधक कराकर व्यवसाय के लिए कर्ज लिए हैं। कुल मिलाकर 98 फीसदी यहां का किसान कर्जदार है।
यहां पर गिरवी है किसानों की खेती
किसान क्रेडिट कार्ड में सबसे आगे इलाहाबाद बैंक की 29 शाखाएं है। यहां पर किसानों के खेत गिरवी की तरह हैं। इसके अलावा स्टेट बैंक आफ इंडिया की 12 शाखाएं, सेंट्रल बैंक की आठ, पंजाब नेशनल बैंक की चार, बैंक आफ बरोदा की चार, बैंक आफ इंडिया एक, यूनियन बैंक एक, सिंडीकेट बैंक दो, विजया बैंक एक, इंडियन ओवर सीज बैंक एक, पंजाब एंड सिंध
बैंक एक, कैनरा बैंक दो, कार्पोरेशन बैंक एक, एचडीएफसी बैंक एक, आईसीआईआई बैंक एक, आईडीबीआई बैंक एक, एक्सिस बैंक एक, इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक 51, जेडीसी बैंक 18, यूपीएसजीवी बैंक की चार शाखाओं से किसान क्रेडिट कार्ड बनाए गए हैं। यहां पर किसानों की खेती बंधक हो चुकी है। कर्ज न चुकाने की स्थिति में बैंक प्रबंधन को उसे नीलाम भी कर सकता है।
वर्जन
किसानों के क्रेडिट कार्ड हर बैंक शाखा से बनाए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में किसानों ने क्रेडिट कार्डों का नवीनीकरण कराया है। बैंकर्स को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, वसूली पर रोक लगी है। लिहाजा सख्ती से वसूली नहीं की जाए, जो किसान स्वेच्छा से जमा करना चाहे तो कर सकता है।- सिद्धार्थ पाल एलडीएम, लीड बैंक जिला जालौन
हैं। इस समय जिले के किसान 642 करोड़ रुपये के कर्जदार हो चुके हैं जो चिंता का विषय बना हुआ है। इस वित्तीय वर्ष में 642 करोड़ 76 लाख का कर्ज तो किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए ही लिया गया है। इसमें सबसे अधिक इलाहाबाद बैंक की 29 शाखाओं से कर्ज दिया गया है। इसके अलावा 115 अन्य बैंक शाखाओं ने किसानों को कर्ज बांटा है। इसके अलावा किसानों
ने खाद भी क्रेडिट पर ही ले रखी है। गौरतलब है कि जनपद का किसान कई साल से दैवी आपदाओं के दंश से जूझता चला आ रहा है। हालत यह है कि कभी बारिश ने किसानों को रुलाया तो कभी सूखा कहर बनकर टूटा। ओलावृष्टि से भी किसान बर्बाद हुआ है। लगातार मौसम की मार झेल रहा किसान आर्थिक रूप से बुरी तरह टूट चुका है। यही वजह है कि किसानों
को कर्ज का ही आसरा है। वर्ष 2015-16 में जनपद की 144 बैंक शाखाओं से 35954 किसानों के क्रेडिट कार्ड बनाए गए हैं। इन किसान क्रेडिट कार्डों पर 642 करोड़ 76 लाख रुपये का ऋण बैंक की ओर से दिया गया। किसानों ने बैंक से लिए ऋण से खरीफ की फसल की तो उसमें भी नुकसान उठाना पड़ा और अब रबी फसल का भी कुछ ऐसा ही हाल है, सूखा के हालात
बने हुए हैं। रबी फसल के लिए ही 392 करोड़ रुपये का कर्ज बैंक से लिया गया है। किसानों को सिंचाई के लिए हजारों रुपये खर्चने पड़ रहे हैं। कर्ज का इतना बोझ कि उससे उबरना मुश्किल हो रहा है। यही करण है कि समय-समय पर कहीं जिंदगी का दामन छोड़ता दिख रहा है तो कहीं खेती बेचने को मजबूर है।
चार माह में तेजी से बने किसान क्रेडिट कार्ड
जनपद में किसानों को खेती किसानी के काम के लिए पैसों की कमी न पड़े इस मंशा से जमीन के आधार पर क्रेडिट कार्ड बनाकर ऋण देने का प्रावधान है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में सात माह में जहां पर 15077 किसानों के क्रेडिट कार्ड बने थे और 250 करोड़ 86 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ था वहीं पर चार माह में 20877 किसानों के क्रेडिट कार्ड बनाए गए। इनको 392 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया।
2,80,000 किसानों के बने क्रेडिट कार्ड
जनपद में करीब तीन लाख किसान हैं जिसमें से दो लाख 80 हजार ऐसे है जो किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से बैंकों से कर्ज लिए हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे हैं जो जमीन को बंधक कराकर व्यवसाय के लिए कर्ज लिए हैं। कुल मिलाकर 98 फीसदी यहां का किसान कर्जदार है।
यहां पर गिरवी है किसानों की खेती
किसान क्रेडिट कार्ड में सबसे आगे इलाहाबाद बैंक की 29 शाखाएं है। यहां पर किसानों के खेत गिरवी की तरह हैं। इसके अलावा स्टेट बैंक आफ इंडिया की 12 शाखाएं, सेंट्रल बैंक की आठ, पंजाब नेशनल बैंक की चार, बैंक आफ बरोदा की चार, बैंक आफ इंडिया एक, यूनियन बैंक एक, सिंडीकेट बैंक दो, विजया बैंक एक, इंडियन ओवर सीज बैंक एक, पंजाब एंड सिंध
बैंक एक, कैनरा बैंक दो, कार्पोरेशन बैंक एक, एचडीएफसी बैंक एक, आईसीआईआई बैंक एक, आईडीबीआई बैंक एक, एक्सिस बैंक एक, इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक 51, जेडीसी बैंक 18, यूपीएसजीवी बैंक की चार शाखाओं से किसान क्रेडिट कार्ड बनाए गए हैं। यहां पर किसानों की खेती बंधक हो चुकी है। कर्ज न चुकाने की स्थिति में बैंक प्रबंधन को उसे नीलाम भी कर सकता है।
वर्जन
किसानों के क्रेडिट कार्ड हर बैंक शाखा से बनाए जा रहे हैं। बड़ी संख्या में किसानों ने क्रेडिट कार्डों का नवीनीकरण कराया है। बैंकर्स को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, वसूली पर रोक लगी है। लिहाजा सख्ती से वसूली नहीं की जाए, जो किसान स्वेच्छा से जमा करना चाहे तो कर सकता है।- सिद्धार्थ पाल एलडीएम, लीड बैंक जिला जालौन