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वर्ष 2018 के सर्किल रेट पर भूमि अधिग्रहण हो
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जालौन। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के मामले में किसानों की भूमि का औने पौने दामों पर अधिग्रहण किया जा रहा है। पूर्व राज्य सभा सांसद ने वर्ष 2018 के सर्किल रेट के आधार पर भूमि अधिग्रहण किए जाने की मांग मुख्यमंत्री से की है।
पूर्व राज्यसभा सांसद श्रीराम पाल ने पत्रकारों से वार्ता में बताया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के निर्माण में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से किसानों को नुकसान हो रहा है। औने पौने दाम देकर किसानों की उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में भूमि का जो सर्किल रेट निर्धारित किया गया था।
उसी के अनुसार किसानों को मुआवजा दिए जाने की बात कही जा रही है। जबकि प्रत्येक वर्ष अगस्त माह में जिलाधिकारी जिले की कृषि भूमि के बाजार भाव के अनुसार सर्किल रेट तय करते हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2018 में जिलाधिकारी ने सर्किल रेट को रिवाइज करने के लिए कोई मीटिंग नहीं की। जबकि कृषि भूमि के प्रतिवर्ष बाजार भाव बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रतिवर्ष सर्किल रेट की समीक्षा की जानी चाहिए।
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लेकिन पिछले वर्ष प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड के जिलों में सर्किल रेट रिवाइज नहीं होने दिए। इस कारण बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे के लिए किसानों को वर्ष 2017 के ही सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा दिया जाना बेमानी है। जिसके कारण किसान यूपीडा निर्माण कंपनी के पक्ष में बैनामा करने को राजी नहीं हो रहे हैं। राजस्व विभाग द्वारा तहसील कर्मियों से दबाव डलवाकर किसानों का नुकसान करते हुए उनसे जबरन बैनामा कराने का प्रयास किया जा रहा है, जो उचित नहीं है।
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पूर्व राज्यसभा सांसद श्रीराम पाल ने पत्रकारों से वार्ता में बताया कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के निर्माण में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। लेकिन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से किसानों को नुकसान हो रहा है। औने पौने दाम देकर किसानों की उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में भूमि का जो सर्किल रेट निर्धारित किया गया था।
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उसी के अनुसार किसानों को मुआवजा दिए जाने की बात कही जा रही है। जबकि प्रत्येक वर्ष अगस्त माह में जिलाधिकारी जिले की कृषि भूमि के बाजार भाव के अनुसार सर्किल रेट तय करते हैं। उनका आरोप है कि वर्ष 2018 में जिलाधिकारी ने सर्किल रेट को रिवाइज करने के लिए कोई मीटिंग नहीं की। जबकि कृषि भूमि के प्रतिवर्ष बाजार भाव बढ़ रहे हैं। ऐसे में प्रतिवर्ष सर्किल रेट की समीक्षा की जानी चाहिए।
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लेकिन पिछले वर्ष प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड के जिलों में सर्किल रेट रिवाइज नहीं होने दिए। इस कारण बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे के लिए किसानों को वर्ष 2017 के ही सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा दिया जाना बेमानी है। जिसके कारण किसान यूपीडा निर्माण कंपनी के पक्ष में बैनामा करने को राजी नहीं हो रहे हैं। राजस्व विभाग द्वारा तहसील कर्मियों से दबाव डलवाकर किसानों का नुकसान करते हुए उनसे जबरन बैनामा कराने का प्रयास किया जा रहा है, जो उचित नहीं है।