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दान करते समय अहंकार का भाव नहीं रखना चाहिए-लल्लूराम मिश्रा
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कोंच। भगवान तो भक्त के वश में होते हैं, जैसे राजा बलि भगवान के प्रति पूर्ण आसक्त था, लेकिन उसे दानवीर होने पर अहंकार हो गया। तब वामन अवतार ने उसका अहंकार नष्ट किया। फिर जब उसने तीसरा पग अपने मस्तक में रखने को कहा तो भगवान ने प्रसन्न होकर उसके यहां पहरेदारी करना भी स्वीकार किया। इसलिए व्यक्ति को दान करते समय अहंकार का भाव नहीं रखना चाहिए।
यह प्रवचन गांधीनगर स्थित नगाइच सदन में चल रही भागवत में कथा व्यास लल्लूराम मिश्रा शास्त्री ने किया। उन्होंने प्रह्लाद चरित्र, गजेंद्र मोक्ष के साथ भगवान राम और कृष्ण प्राकट्य की मनोहारी कथाएं सुनाईं। कहा कि प्रभु चरणों में अनुराग और निष्ठा के ही प्रभाव से प्रह्लाद जैसे भक्त के कष्ट दूर करने के लिए भगवान ने खंभे से प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिए और उनके पिता अत्याचारी हिरण्याकश्यप को मोक्ष प्रदान किया। दैत्यों का राजा बलि एक महान दानवीर था किंतु उसे अहंकार हो गया।
तब अपने भक्त का अहंकार दूर करने के लिए भगवान नारायण ने वामन रूप धारण किया और बलि से तीन पग पृथ्वी दान में मांग ली। अहंकारी बलि ने उसे तीन पग पृथ्वी सहर्ष ही दान में देने के लिए अंजुलि में जल लेकर संकल्प ले लिया, किंतु दो पग में ही सारा ब्रह्मांड भगवान वामन ने नाप लिया और बलि का अहंकार नष्ट किया। तब बलि ने तीसरा पग अपने मस्तक पर रखने का आग्रह किया। राजा बलि से भगवान इतने प्रसन्न हुए कि उसके यहां पहरेदारी करना भी उन्होंने स्वीकार कर लिया। कथा व्यास कहते हैं कि उन्होंने राम जन्म प्राकट्य का सुंदर वर्णन किया जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। परीक्षित रामदुलारी नगाइच ने भागवत जी की आरती उतारी। अंत में प्रसाद वितरित किया गया।
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यह प्रवचन गांधीनगर स्थित नगाइच सदन में चल रही भागवत में कथा व्यास लल्लूराम मिश्रा शास्त्री ने किया। उन्होंने प्रह्लाद चरित्र, गजेंद्र मोक्ष के साथ भगवान राम और कृष्ण प्राकट्य की मनोहारी कथाएं सुनाईं। कहा कि प्रभु चरणों में अनुराग और निष्ठा के ही प्रभाव से प्रह्लाद जैसे भक्त के कष्ट दूर करने के लिए भगवान ने खंभे से प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिए और उनके पिता अत्याचारी हिरण्याकश्यप को मोक्ष प्रदान किया। दैत्यों का राजा बलि एक महान दानवीर था किंतु उसे अहंकार हो गया।
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तब अपने भक्त का अहंकार दूर करने के लिए भगवान नारायण ने वामन रूप धारण किया और बलि से तीन पग पृथ्वी दान में मांग ली। अहंकारी बलि ने उसे तीन पग पृथ्वी सहर्ष ही दान में देने के लिए अंजुलि में जल लेकर संकल्प ले लिया, किंतु दो पग में ही सारा ब्रह्मांड भगवान वामन ने नाप लिया और बलि का अहंकार नष्ट किया। तब बलि ने तीसरा पग अपने मस्तक पर रखने का आग्रह किया। राजा बलि से भगवान इतने प्रसन्न हुए कि उसके यहां पहरेदारी करना भी उन्होंने स्वीकार कर लिया। कथा व्यास कहते हैं कि उन्होंने राम जन्म प्राकट्य का सुंदर वर्णन किया जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए। परीक्षित रामदुलारी नगाइच ने भागवत जी की आरती उतारी। अंत में प्रसाद वितरित किया गया।
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