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जमीन थी कॉलेज की, बना दिया कॉम्प्लेक्स
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 08 Jul 2013 11:58 AM IST
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इंडस्ट्रियल इंटर कॉलेज की जमीन पर कॉम्पलेक्स कैसे बन गया, ये सवाल राजधानी में तैनात शिक्षा विभाग के अधिकारियों के लिए मुश्किलों का सबब बना हुआ है।
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सूचना का अधिकार के तहत इस सवाल को करीब 21 महीने पहले उठाया गया था। जिसमें इंडस्ट्रियल कॉलेज के स्थल परिवर्तन समेत अन्य मामलों में शिक्षा विभाग से मिली अनुमति की प्रतियां मांगी गई थीं।
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जिम्मेदार हैं मौन
आलम ये है कि सूचना आयोग की ओर से जारी एक नोटिस और 25 हजार रुपये के जुर्माने के बाद भी इस मसले पर कोई भी अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है।
अक्टूबर 2011 में चारबाग निवासी एडवोकेट माधुरी भूषण तिवारी ने शिक्षा विभाग से आरटीआई के तहत सूचनाएं मांगी थीं। डीआईओएस उमेश त्रिपाठी से इंडस्ट्रियल कॉलेज के संबंध में जानकारी देने को कहा गया।
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इसमें विद्यालय के अन्यत्र स्थानांतरण समेत उसकी जमीन पर हो रहे निर्माणों के संबंध में विभाग की अनुमति की प्रति के साथ ही निर्माण की वैधता पर सवाल उठाए गए।
डीआईओएस को माना जा रहा दोषी
इस पूरे मामले में डीआईओएस उमेश त्रिपाठी का नाम सबसे ऊपर आ रहा है। असल में जब माधुरी ने विद्यालय की जमीन पर कॉम्पलेक्स बनाने पर प्रबंधन के खिलाफ की गई कार्रवाई के दस्तावेज की प्रति मांगी तो इस पर कोई सुनवाई नहीं की गई।
निर्धारित समय पर सूचना न देने पर 4 जनवरी 2012 को माधुरी ने सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान डीआईओएस को 28 जनवरी 2012 तक सूचना उपलब्ध कराकर आयोग के समक्ष प्रस्तुत होने को कहा गया लेकिन वे नहीं आए।
इस पर सूचना आयोग ने डीआईओएस को दोषी मानते हुए उन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना किया है। दिलचस्प बात यह है कि इसके बावजूद अधिकारी न तो सूचना दे रहे हैं और न ही जुर्माना भरने को ही तैयार हैं।