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महिलाओं ने खदेड़े ठेका कर्मी, दुकान मालिक को पीटा
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Sun, 02 Apr 2017 11:49 PM IST
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ठेका पर हाथों में ईंट, पत्थर व डंडे लिए महिलाए
- फोटो : amar ujala
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नगर के मोहल्ला गढ़ी बुद्धू में शराब की दुकान खुलने पर स्थानीय लोगों का गुस्सा रविवार को फूट पड़ा। रविवार की सुबह से ही मोहल्ले की महिलाएं हाथों में चप्पल, डंडे और पत्थर आदि लेकर दुकान के सामने ही टेंट तानकर धरने पर बैठ गईं। दुकान खोलने आए कर्मचारियों पर इन महिलाओं ने हमला बोल दिया।
किसी तरह कर्मियों ने भागकर अपनी जान बचाई। बाद में एसडीएम केहरी सिंह, सीओ राकेश वशिष्ठ, आबकारी निरीक्षक एसपी सिंह मय पुलिस, पीएसी और महिला पुलिस के साथ मौके पर पहुंच गए। भीड़ को दौड़ाकर वहां से खदेड़ दिया। मौके पर से पुलिस ने पालिका के एक कर्मचारी को पकड़ लिया और थाने ले गई। इस मामले में एक वकील की पुलिस से तीखी नोक-झोंक हुई, जिससे वहां हंगामा खड़ा हो गया। भीड़ ने ठेके के लिए किराए पर दुकान देने वाले को भी पीट दिया और उसके कपड़े फाड़ दिए।
शनिवार को पुलिस की मौजूदगी में यह दुकान खुली थी, जिसके बाद देर रात तक शराब और बीयर की खूब बिक्री हुई। मोहल्ले वालों का कहना है कि इसके बाद शराबियों ने उनके घरों के बाहर जमकर हंगामा किया। रविवार की सुबह काफी महिलाओं ने दुकान के समाने टेंट लगा दिया और हाथों में पत्थर, डंडे, जूते और चप्पल लकर बैठ गईं। ठेका कर्मी जब दुकान खोलने आ गए तो उनको देखकर महिलाएं उनकी तरफ पत्थर लेकर दौड़ पड़ीं। उनकी बाइकों पर भी डंडे मारे।
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किसी तरह कर्मियों ने अपनी जान बचाई। दोपहर में पीएसी और महिला पुलिस के साथ पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। दुकान के सामने लगा टेंट गिरा दिया। विरोध करने वाले महिला-पुरुषों को दौड़ाकर खदेड़ दिया। विरोध कर रहे पालिका कर्मी सत्यप्रकाश को पुलिस ने पकड़ लिया। यहां पर एडवोकेट हुकुम सिंह बघेल से पुलिस की तीखी नोक-झोंक हुई। दो घंटे तक महिला पुलिस महिलाओं को घरों में बंद कराती रही। तब मामला शांत हुआ, तब कहीं जाकर अधिकारी मौके से हटे। ठेका स्थल पर फोर्स तैनात कर दी गई है। वहीं ठेका कर्मी विनोद कुमार ने विरोध के प्रकरण में 27 महिला पुरुषों को नामजद कराते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई है।
उलझन में ठेकेदार, कहां ले जाएं दुकानें
प्रदेश सरकार को शराब और बीयर की बिक्री से 25 हजार करोड़ का सालाना राजस्व प्राप्त होता है। अदालत के आदेश के बाद राजमार्गों से ठेके हटाए जा रहे हैं। नियम है कि मंदिर, मस्जिद, स्कूल आदि के पास ठेका स्थापित नहंीं किया जा सकता। इन हालात में ठेके कहां जाए। नगर में कोई ऐसा मोहल्ला नहीं है, जहां मंदिर, मस्जिद और स्कूल नहीं हो। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर यह दुकानें जाएं तो जाएं कहां। जहां भी इन्हें शिफ्ट करने की कोशिश की जाती है, वहां इनका विरोध शुरू हो जाता है।
शराबबंदी के लिए हाथरस के मधुगढ़ी में भी हुआ प्रदर्शन
हाथरस शहर के मोहल्ला मधुगढ़ी में मौलवी अल्लाबख्श मार्ग पर भी स्थानीय लोगों ने शराब बंदी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ये लोग हाथों में विभिन्न नारे लिखी हुई तख्तियां पकड़े थे। इन तख्तियों पर सर्वसमाज की मांग, शराब मुक्त हो हिंदुस्तान, यूपी में शराब बंदी अविलंब लागू हो और नशा नाश का द्वार है, जैसे नारे लिखे हुए थे। समाजसेवी दीपक गुप्ता ने कहा कि यदि बिहार में शराबबंदी लागू हो सकती है तो यूपी में क्यों नहीं। नशे की लत से लाखों घर बर्बाद हो रहे हैं। प्रदर्शन करने वालों में जुनैद, जुबैर, बद्दू, मुनन, अब्दुल बशीर, जहीर, शेर खां, रईस, शमसाद, भगवान सिंह, रमन, रिंकू, मुकेश, यासीन, शकील, शम्मी, भूरा, अफसर, टीकाराम आदि अनेक लोग थे।
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किसी तरह कर्मियों ने भागकर अपनी जान बचाई। बाद में एसडीएम केहरी सिंह, सीओ राकेश वशिष्ठ, आबकारी निरीक्षक एसपी सिंह मय पुलिस, पीएसी और महिला पुलिस के साथ मौके पर पहुंच गए। भीड़ को दौड़ाकर वहां से खदेड़ दिया। मौके पर से पुलिस ने पालिका के एक कर्मचारी को पकड़ लिया और थाने ले गई। इस मामले में एक वकील की पुलिस से तीखी नोक-झोंक हुई, जिससे वहां हंगामा खड़ा हो गया। भीड़ ने ठेके के लिए किराए पर दुकान देने वाले को भी पीट दिया और उसके कपड़े फाड़ दिए।
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शनिवार को पुलिस की मौजूदगी में यह दुकान खुली थी, जिसके बाद देर रात तक शराब और बीयर की खूब बिक्री हुई। मोहल्ले वालों का कहना है कि इसके बाद शराबियों ने उनके घरों के बाहर जमकर हंगामा किया। रविवार की सुबह काफी महिलाओं ने दुकान के समाने टेंट लगा दिया और हाथों में पत्थर, डंडे, जूते और चप्पल लकर बैठ गईं। ठेका कर्मी जब दुकान खोलने आ गए तो उनको देखकर महिलाएं उनकी तरफ पत्थर लेकर दौड़ पड़ीं। उनकी बाइकों पर भी डंडे मारे।
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किसी तरह कर्मियों ने अपनी जान बचाई। दोपहर में पीएसी और महिला पुलिस के साथ पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। दुकान के सामने लगा टेंट गिरा दिया। विरोध करने वाले महिला-पुरुषों को दौड़ाकर खदेड़ दिया। विरोध कर रहे पालिका कर्मी सत्यप्रकाश को पुलिस ने पकड़ लिया। यहां पर एडवोकेट हुकुम सिंह बघेल से पुलिस की तीखी नोक-झोंक हुई। दो घंटे तक महिला पुलिस महिलाओं को घरों में बंद कराती रही। तब मामला शांत हुआ, तब कहीं जाकर अधिकारी मौके से हटे। ठेका स्थल पर फोर्स तैनात कर दी गई है। वहीं ठेका कर्मी विनोद कुमार ने विरोध के प्रकरण में 27 महिला पुरुषों को नामजद कराते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई है।
उलझन में ठेकेदार, कहां ले जाएं दुकानें
प्रदेश सरकार को शराब और बीयर की बिक्री से 25 हजार करोड़ का सालाना राजस्व प्राप्त होता है। अदालत के आदेश के बाद राजमार्गों से ठेके हटाए जा रहे हैं। नियम है कि मंदिर, मस्जिद, स्कूल आदि के पास ठेका स्थापित नहंीं किया जा सकता। इन हालात में ठेके कहां जाए। नगर में कोई ऐसा मोहल्ला नहीं है, जहां मंदिर, मस्जिद और स्कूल नहीं हो। ऐसे में यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर यह दुकानें जाएं तो जाएं कहां। जहां भी इन्हें शिफ्ट करने की कोशिश की जाती है, वहां इनका विरोध शुरू हो जाता है।
शराबबंदी के लिए हाथरस के मधुगढ़ी में भी हुआ प्रदर्शन
हाथरस शहर के मोहल्ला मधुगढ़ी में मौलवी अल्लाबख्श मार्ग पर भी स्थानीय लोगों ने शराब बंदी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ये लोग हाथों में विभिन्न नारे लिखी हुई तख्तियां पकड़े थे। इन तख्तियों पर सर्वसमाज की मांग, शराब मुक्त हो हिंदुस्तान, यूपी में शराब बंदी अविलंब लागू हो और नशा नाश का द्वार है, जैसे नारे लिखे हुए थे। समाजसेवी दीपक गुप्ता ने कहा कि यदि बिहार में शराबबंदी लागू हो सकती है तो यूपी में क्यों नहीं। नशे की लत से लाखों घर बर्बाद हो रहे हैं। प्रदर्शन करने वालों में जुनैद, जुबैर, बद्दू, मुनन, अब्दुल बशीर, जहीर, शेर खां, रईस, शमसाद, भगवान सिंह, रमन, रिंकू, मुकेश, यासीन, शकील, शम्मी, भूरा, अफसर, टीकाराम आदि अनेक लोग थे।