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टैक्स में छूट से उद्योगों को लगे उम्मीद के पंख

Wed, 01 Feb 2017 11:52 PM IST
अमर उजाला, हाथरस
अमर उजाला, हाथरस Updated Wed, 01 Feb 2017 11:52 PM IST
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Wings of hope began to tax industries
हाथरस में हींग फैक्ट्री में पैकिंग करते मजदूर। - फोटो : अमर उजाला
चुनावी सीजन में वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट से निकली टैक्स रियायतों ने हाथरस के उद्योग-व्यापार को फीलगुड करा दिया है। चाहे करमुक्त आय की सीमा ढाई से बढ़ाकर तीन लाख करने का फैसला हो या 50 करोड़ रुपये सालाना टर्न ओवर वाली छोटी कंपनियों का कॉरपोरेट टैक्स 30 से घटाकर 25 फीसदी करने का निर्णय। दोनों से ही हाथरस के उद्योग-व्यापार को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद की जा रही है।
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हाथरस के रंग-गुलाल व केमिकल की हो, हींग, अचार-मुरब्बा, मेटल ब्रासवेयर एंड हैंडीक्राफ्ट, पावरलूम गलीचा, नमकीन, दाल, रेडीमेड गारमेंट्स, फुटवियर, डेयरी उद्योग, मसाला, प्लास्टिक डिब्बा, आयुर्वेदिक दवाओं, कोल्ड स्टोरेज और इत्र उद्योग देशभर में प्रसिद्ध हैं।
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यह सभी उद्योग लघु, मध्यम और सूक्ष्म इकाइयां (एमएसएमई) के दायरे में आते हैं। इन सभी का टर्न ओवर 50 करोड़ रुपये सालाना या इससे कुछ कम है। जिले में तकरीबन 150 ऐसी इकाइयां हैं, जोकि केंद्र की नई टैक्स रियायतों से फायदा उठा सकेंगी।
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इन सभी को कॉरपोरेट टैक्स में मिली पांच फीसदी की छूट का बड़ा फायदा मिलेगा। एक आंकलन के हिसाब से इन उद्यमियों को कॉरपोरेट टैक्स में हर साल तकरीबन साढ़े 16 से 17 फीसदी की बचत हो सकती है।

उद्यमी भी मानते हैं कि टैक्स छूट से उद्योगों में उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा और उद्योगों के बीच उत्पादन बढ़ाने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ावा मिलेगा। सीधे शब्दों में टैक्स छूट का फायदा उठाने के लिए उद्योगों के बीच आमदनी बढ़ाने की होड़ बढ़ेगी, जोकि कामगारों और श्रमिक वर्ग के लिए भी शुभ संकेत है। 

बजट में आयकर में छूट के अलावा कोई दूसरी ऐसी बड़ी घोषणा नहीं की गई है, जिससे उद्योग व्यापार को राहत मिल सके। आयकर छूट सीमा बढ़ना नि:संदेह सराहनीय है   और इसकी लंबे समय से मांग भी हो रही थी। कैश लेन-देन की सीमा तीन लाख जरूर कर दी गई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया है कि आखिर यह लिमिट सालाना है या मासिक। 
राधेश्याम अग्रवाल, उद्यमी

 बजट में टैक्स रेट घटाकर 10 से 5 फीसदी कर दिया है। इससे सभी करदाताओं अथवा व्यापारी वर्ग को लाभ मिलेगा। भवन व भूमि के लिए लंबी अवधि को 3 साल से घटाकर 2 साल कर दिया गया है जो करदाताओं के लिए अच्छा निर्णय है। 87ए के तहत जो छूट पहले 5 लाख तक इनकम वालों को मिलती थी अब वह साढ़े तीन लाख तक वालों को मिलेगी इससे करदाता निराश हैं। बजट आम नागरिकों के लिए खास नहीं रहा है। 

लोकेश वार्ष्णेय, चार्टर्ड अकाउंटेंट 

नोटबंदी के बाद सराफा कारोबार बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है। साहलग भी बेकार गए। आम बजट से भी काफी उम्मीदें थीं, लेकिन सराफा कारोबार के लिए कोई घोषणा नहीं हुई। 
 मोहनलाल अग्रवाल, सर्राफा कारोबारी

बजट में मनरेगा के लिए करोड़ों दिए गए हैं। मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की घोषणा हुई है यह अच्छी पहल है।  
- मुनेश निवासी झींगुरा 

छात्र बोले
छात्रों के लिए सरकार ने कुछ नहीं सोचा। बजट में उच्च और व्यवसायिक शिक्षा को सस्ता और सुलभ बनाना चाहिए था।
- राहुल, मुरसान गेट 

 
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