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फिर आमने-सामने होंगे रामवीर-देवेंद्र
अमर उजाला, हाथ्ारस
Updated Sat, 06 Aug 2016 11:54 PM IST
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पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय और सादाबाद के सपा विधायक देवेंद्र अग्रवाल की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता जग जाहिर है। हालांकि 2002 के चुनाव में ही देवेंद्र अग्रवाल ने रालोद से रामवीर के खिलाफ हाथरस विधानसभा क्षेत्र से टिकट मांगा था, लेकिन रालोद ने देवस्वरूप शर्मा को प्रत्याशी बनाकर उन्हें झटका दे दिया, लेकिन 2007 के चुनाव में वह रालोद का टिकट पाने में कामयाब हो गए।
हालांकि इस चुनाव में देवेंद्र को करीब 16 हजार वोटों से हार का मुंह देखना पड़ा। 2012 के चुनाव में परिसीमन के बाद हाथरस विधानसभा सीट सुरक्षित हुई तो देवेंद्र अग्रवाल ने भी चुनाव क्षेत्र बदल दिया। वह इस बार सादाबाद विधानसभा सीट से सपा का टिकट पाने में कामयाब हो गए और सपा की लहर के सहारे पांच हजार वोटों से चुनाव जीतने में सफल रहे।
उन्होंने रामवीर उपाध्याय के बहनोई सतेंद्र शर्मा को हराया था। सादाबाद के चुनाव परिणाम भले ही बसपा के खिलाफ रहे, लेकिन रामवीर ने भविष्य की राजनीति के लिए इसे उसी वक्त मन ही मन चुन लिया था। तभी से ही उनके 2017 का चुनाव सादाबाद से लड़ने की चर्चाएं शुरू हो गईं और अब आकर यह सच भी साबित होने जा रही हैं।
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पिछले एक साल से सादाबाद में पूर्व मंत्री की राजनीतिक सक्रियता भी इन चर्चाओं को बल देती रही। यही नहीं जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद उनके भाई विनोद उपाध्याय ने भी सादाबाद को ही अपना ठिकाना बनाया है। वह चुनाव जीतने के बाद से ही सादाबाद के अपने घर से ही पूर्व मंत्री के लिए सियासी जमीन तैयार करने में लगे हुए हैं। दरअसल, पूर्व मंत्री को जातीय समीकरण के लिहाज से सादाबाद विधानसभा क्षेत्र सिकंदराराऊ के मुकाबले ज्यादा मुफीद लगता है। उनका पैतृक गांव और कभी उनका सियासी गढ़ रहा मुरसान क्षेत्र भी परिसीमन के बाद इसी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा बन चुका है।
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हालांकि इस चुनाव में देवेंद्र को करीब 16 हजार वोटों से हार का मुंह देखना पड़ा। 2012 के चुनाव में परिसीमन के बाद हाथरस विधानसभा सीट सुरक्षित हुई तो देवेंद्र अग्रवाल ने भी चुनाव क्षेत्र बदल दिया। वह इस बार सादाबाद विधानसभा सीट से सपा का टिकट पाने में कामयाब हो गए और सपा की लहर के सहारे पांच हजार वोटों से चुनाव जीतने में सफल रहे।
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उन्होंने रामवीर उपाध्याय के बहनोई सतेंद्र शर्मा को हराया था। सादाबाद के चुनाव परिणाम भले ही बसपा के खिलाफ रहे, लेकिन रामवीर ने भविष्य की राजनीति के लिए इसे उसी वक्त मन ही मन चुन लिया था। तभी से ही उनके 2017 का चुनाव सादाबाद से लड़ने की चर्चाएं शुरू हो गईं और अब आकर यह सच भी साबित होने जा रही हैं।
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पिछले एक साल से सादाबाद में पूर्व मंत्री की राजनीतिक सक्रियता भी इन चर्चाओं को बल देती रही। यही नहीं जिला पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद उनके भाई विनोद उपाध्याय ने भी सादाबाद को ही अपना ठिकाना बनाया है। वह चुनाव जीतने के बाद से ही सादाबाद के अपने घर से ही पूर्व मंत्री के लिए सियासी जमीन तैयार करने में लगे हुए हैं। दरअसल, पूर्व मंत्री को जातीय समीकरण के लिहाज से सादाबाद विधानसभा क्षेत्र सिकंदराराऊ के मुकाबले ज्यादा मुफीद लगता है। उनका पैतृक गांव और कभी उनका सियासी गढ़ रहा मुरसान क्षेत्र भी परिसीमन के बाद इसी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा बन चुका है।