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ध्यान दें: बदलता मौसम कर रहा बीमार, सर्दी-खांसी की चपेट में आ रहे मासूम, डॉक्टर साहब ने दी यह सलाह
Sat, 17 Oct 2026 03:36 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Sat, 17 Oct 2026 03:36 PM IST
सार
मौसम में जब अचानक गर्माहट से ठंडक की ओर बदलाव होता है, तो बच्चों का शरीर इसे तुरंत ढाल नहीं पाता। जिन बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, वे बैक्टीरिया और वायरस के संपर्क में आते ही बहुत जल्द बीमार पड़ जाते हैं।
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हाथरस जिला अस्पताल
- फोटो : संवाद
विस्तार
हाल ही में हुई बारिश के बाद ठंडक और नमी बढ़ने से खासकर छोटे और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। बच्चे तेजी से सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल बुखार की चपेट में आ रहे हैं, जिससे हाथरस जिला अस्पताल की बाल रोग ओपीडी में मरीजों का आंकड़ा बढ़ा है।
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शुक्रवार सुबह हुई बारिश के चलते जिला अस्पताल में शुरुआती घंटों में मरीजों की आवाजाही काफी कम रही। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीज बारिश रुकने का इंतजार करते रहे। हालांकि जैसे ही दोपहर में बारिश थमी, जिला अस्पताल के पर्चा काउंटर और बाल रोग विशेषज्ञ के कक्ष के बाहर परिजनों और बीमार बच्चों की लंबी कतारें लग गईं। ओपीडी में आए कुल 1654 मरीजों में से 122 बच्चे मौसमी बीमारियों से पीड़ित रहे। इनमें 70 फीसदी बच्चे सर्दी के शिकार थे।
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कमजोर इम्युनिटी बन रही बीमारी की वजह
बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. प्रमोद कुमार ने बताया कि मौसम में जब अचानक गर्माहट से ठंडक की ओर बदलाव होता है, तो बच्चों का शरीर इसे तुरंत ढाल नहीं पाता। जिन बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, वे बैक्टीरिया और वायरस के संपर्क में आते ही बहुत जल्द बीमार पड़ जाते हैं। अस्पताल में आ रहे अधिकतर बच्चों में तेज बुखार, सांस लेने में हल्की तकलीफ, सूखी खांसी और बहती नाक जैसी शिकायतें देखने को मिल रही हैं।
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बाल रोग विशेषज्ञ की महत्वपूर्ण सलाह
- ठंडक से बचाएं : सुबह और शाम के समय तापमान में अधिक गिरावट रहती है। इस दौरान बच्चों को फुल आस्तीन के कपड़े पहनाएं और ठंडी हवा के सीधे संपर्क में आने से बचाएं।
- खान-पान का रखें ध्यान : बच्चों को फ्रिज में रखा ठंडा पानी, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स और बासी भोजन बिल्कुल न दें। उन्हें हल्का, सुपाच्य और ताजा गरम भोजन ही कराएं।
- गुनगुने पानी का सेवन : बच्चों को पीने के लिए उबला हुआ या गुनगुना पानी दें। इससे गले के संक्रमण और खांसी में राहत मिलती है।
- खुद से न दें दवाएं : बच्चे को बुखार या खांसी होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से एंटीबायोटिक या सिरप खरीदकर न दें। सही खुराक और जांच के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या बाल रोग विशेषज्ञ को ही दिखाएं।
- साफ-सफाई का विशेष ध्यान : बच्चों के हाथ बार-बार साबुन-पानी से धुलवाएं और घर में नमी या सीलन न होने दें। बीमार व्यक्ति से बच्चों को थोड़ा दूरी बनाकर रखने की सलाह दी जाती है।