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Hathras News: कैंसर वार्ड के लिए करना होगा इंतजार, 39 संदिग्ध मरीज चिह्नित
Fri, 02 Oct 2026 02:18 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Fri, 02 Oct 2026 02:18 AM IST
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बागला जिला अस्पताल में लगी भीड़। संवाद
- फोटो : Samvad
जिला अस्पताल में कैंसर मरीजों की स्क्रीनिंग और शुरुआती इलाज के लिए बनने वाले आठ बेड के डे-केयर कैंसर वार्ड के लिए मरीजों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। परिसर में समय पर उपयुक्त स्थान न मिलने के कारण वार्ड की स्थापना नहीं हो सकी और शासन से मिला 2.41 करोड़ का बजट अप्रैल में वापस लौट गया।
बजट में हर जिले में सेकेंडरी कैंसर केयर सेंटर स्थापित करने और शुरुआती चरण में चार से आठ बेड का डे-केयर सेंटर बनाने का निर्णय लिया गया था, ताकि मरीजों को स्थानीय स्तर पर कीमोथेरेपी, परामर्श और दवाएं मिल सकें और बड़े अस्पतालों पर दबाव कम हो। योजना के तहत जिला अस्पताल के दो चिकित्सकों और तीन स्टाफ कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिलाया जा चुका है।
हालांकि, स्थान उपलब्ध कराने के लिए जिला होम्योपैथी अधिकारी को पत्र भी लिखा गया था, लेकिन कोई वैकल्पिक जगह न होने के कारण स्थान खाली नहीं हो पाया। अब दोबारा शासनादेश आने के बाद ही इस वार्ड पर काम शुरू हो सकेगा। फिलहाल इमरजेंसी शिफ्ट होने के बाद खाली हुई पुरानी इमरजेंसी की जगह में कैंसर डे-केयर वार्ड बनाने पर विचार किया जा रहा है।
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ओपीडी में मिले 39 संदिग्ध मरीज
कैंसर मरीजों की शुरुआती पहचान (स्क्रीनिंग) की जिम्मेदारी ओपीडी में तैनात डॉक्टरों पर है। अप्रैल से सितंबर तक केवल ईएनटी ओपीडी में ही मुख कैंसर के 26 संदिग्ध मरीज मिले हैं, जिन्हें पुष्टि और उच्च स्तरीय इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है। इसके अलावा के दंत रोग विभाग में मुख कैंसर के सात, फिजिशियन कक्ष में फेफड़े के चार व पाचन तंत्र से जुड़े दो मरीज मिले हैं। इन 39 संदिग्ध मरीजों को ट्रेस कर आगे की जांच व इलाज के लिए उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजा गया है। स्थानीय स्तर पर वार्ड न होने से इन मरीजों को जांच और शुरुआती इलाज के लिए बड़े शहरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
कैंसर डे-केयर वार्ड बनाया जाना है। जगह मिल चुकी है। आदेश आते ही वार्ड की स्थापना कर दी जाएगी। ओपीडी में लगातार संदिग्ध मरीजों पर नजर रखी जा रही है। उन्हें हायर सेंटर भी भेजा जा रहा है।
-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस
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बजट में हर जिले में सेकेंडरी कैंसर केयर सेंटर स्थापित करने और शुरुआती चरण में चार से आठ बेड का डे-केयर सेंटर बनाने का निर्णय लिया गया था, ताकि मरीजों को स्थानीय स्तर पर कीमोथेरेपी, परामर्श और दवाएं मिल सकें और बड़े अस्पतालों पर दबाव कम हो। योजना के तहत जिला अस्पताल के दो चिकित्सकों और तीन स्टाफ कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिलाया जा चुका है।
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हालांकि, स्थान उपलब्ध कराने के लिए जिला होम्योपैथी अधिकारी को पत्र भी लिखा गया था, लेकिन कोई वैकल्पिक जगह न होने के कारण स्थान खाली नहीं हो पाया। अब दोबारा शासनादेश आने के बाद ही इस वार्ड पर काम शुरू हो सकेगा। फिलहाल इमरजेंसी शिफ्ट होने के बाद खाली हुई पुरानी इमरजेंसी की जगह में कैंसर डे-केयर वार्ड बनाने पर विचार किया जा रहा है।
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ओपीडी में मिले 39 संदिग्ध मरीज
कैंसर मरीजों की शुरुआती पहचान (स्क्रीनिंग) की जिम्मेदारी ओपीडी में तैनात डॉक्टरों पर है। अप्रैल से सितंबर तक केवल ईएनटी ओपीडी में ही मुख कैंसर के 26 संदिग्ध मरीज मिले हैं, जिन्हें पुष्टि और उच्च स्तरीय इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है। इसके अलावा के दंत रोग विभाग में मुख कैंसर के सात, फिजिशियन कक्ष में फेफड़े के चार व पाचन तंत्र से जुड़े दो मरीज मिले हैं। इन 39 संदिग्ध मरीजों को ट्रेस कर आगे की जांच व इलाज के लिए उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजा गया है। स्थानीय स्तर पर वार्ड न होने से इन मरीजों को जांच और शुरुआती इलाज के लिए बड़े शहरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
कैंसर डे-केयर वार्ड बनाया जाना है। जगह मिल चुकी है। आदेश आते ही वार्ड की स्थापना कर दी जाएगी। ओपीडी में लगातार संदिग्ध मरीजों पर नजर रखी जा रही है। उन्हें हायर सेंटर भी भेजा जा रहा है।
-डाॅ. सूर्यप्रकाश, सीएमएस