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Hathras News: चंद मिनटों में भर रहे 60 दिन बाद के रेल आरक्षण

Sun, 23 Aug 2026 02:17 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस Updated Sun, 23 Aug 2026 02:17 AM IST
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Train reservations for 60 days ahead are filling up within minutes.
हाथरस सिटी स्टेशन के आरक्षण काउंटर पर लगी यात्रियों की भीड़। संवाद - फोटो : Samvad
रेलवे ने 21 अक्तूबर के लिए शनिवार सुबह आठ बजे सामान्य आरक्षण खोला। आरक्षण विंडो खुलते ही कुछ ही मिनटों में सभी सीटें भर गईं। कई अहम ट्रेनों में वेटिंग और नो रूम की स्थिति देखने को मिली। यात्रियों को अब तत्काल कोटे की तरह सामान्य कोटे में भी भारी मारामारी झेलनी पड़ रही है।
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हालांकि कई यात्री ऑनलाइन आरक्षण को प्राथमिकता दे रहे हैं, फिर भी जिले के आरक्षण केंद्रों पर 60 दिन बाद के टिकटों के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। हाथरस से गुजरने वाली कालका-हावड़ा नेताजी एक्सप्रेस में तुरंत वेटिंग आ गई। इसमें एसी थ्री में 25 और स्लीपर में 30 वेटिंग दर्ज की गई। जम्मू-संभलपुर एक्सप्रेस में संभलपुर के लिए दो वेटिंग दर्ज हुई।
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ऊंचाहार एक्सप्रेस, मुरी एक्सप्रेस, कालका एक्सप्रेस और कटिहार-अमृतसर एक्सप्रेस में भी वेटिंग शुरू हो चुकी है। अलीगढ़ और दिल्ली से जम्मू कटरा जाने वाली जम्मू मेल तथा उत्तर संपर्क क्रांति जैसी ट्रेनों में दो माह पहले से ही भारी वेटिंग है। उत्तर मध्य रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी अमित कुमार सिंह का कहना है कि ट्रेनों में समय रहते अग्रिम बुकिंग कराना सही रहता है, यात्री इसके लिए जागरूक हो रहे हैं।
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रेलवे की कोटा व्यवस्था
ट्रेनों के तुरंत हाउसफुल होने और लंबी वेटिंग लिस्ट बनने का एक बड़ा कारण रेलवे की कोटा व्यवस्था है। तत्काल, प्रीमियम तत्काल, इमरजेंसी (वीआईपी) और विभिन्न विभागीय कोटे में बड़ी संख्या में बर्थ आरक्षित रखी जाती हैं, जिससे नियमित ट्रेनों की कुल यात्री क्षमता में सामान्य कोटे की सीटों का प्रतिशत काफी कम हो जाता है। 60 दिन पहले सामान्य आरक्षण खुलने पर सीमित सीटें कुछ ही मिनटों में बुक हो जाती हैं। बाकी यात्रियों को केवल वेटिंग टिकट ही मिल पाता है।


त्योहारों पर दोगुनी मारामारी
रक्षाबंधन, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों पर यह समस्या और बढ़ जाती है। त्योहारों के दौरान टिकट कराने वालों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। तब सामान्य कोटे की कमी का असर सबसे अधिक दिखाई देता है। यात्रियों को तत्काल कोटे पर निर्भर रहना पड़ता है, जहां सीटें चंद सेकंड में खत्म हो जाती हैं। कई बार उन्हें प्रीमियम स्पेशल ट्रेनों में लगभग दोगुना किराया देकर यात्रा करनी पड़ती है।
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