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Hathras News: टीबी मरीजों की स्क्रीनिंग में सामने आए तीन एचआईवी केस
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प्रतीकात्मक चित्र।
- फोटो : Archive
जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों एचआईवी की जांच और स्क्रीनिंग अभियान को तेज कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे टीबी और एचआईवी के संयुक्त क्रॉस स्क्रीनिंग अभियान के दौरान हाल ही में तीन एचआईवी और आठ टीबी के नए मरीज सामने आए हैं। मरीज मिलने पर विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है।
283 मरीजों की स्क्रीनिंग में तीन एचआईवी संक्रमित मिले हैं। ऐसे में जिले के सभी 3702 टीबी मरीजों की स्क्रीनिंग के निर्देश दिए गए हैं। टीबी की पुष्टि होते ही नए मरीजों की एचआईवी जांच भी करायी जा रही है। इसके साथ ही सभी चिकित्सा इकाइयों और ओपीडी में आने वाले संदिग्ध तथा गंभीर लक्षण वाले मरीजों की एचआईवी की जांच की जाएगी।
विभाग द्वारा स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग के साथ-साथ जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी स्तर पर तैनात चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ को विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। ओपीडी में आने वाले लंबे समय से बीमार, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी या लगातार खांसी से पीड़ित मरीजों का अनिवार्य रूप से एचआईवी और टीबी टेस्ट कराने को कहा गया है।
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. प्रवीण भारती ने बताया कि प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होते ही बीमारियां घेर लेती हैं। लगातार खांसी व घटते वजन पर टीबी की जांच करा ली जाती थी। टीबी की पुष्टि होते ही मरीज का उपचार शुरू कर दिया जाता था। जांच में यह सामने आ रहा है कि एचआईवी संक्रमित होने के कारण मरीज की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हुई और वह टीबी का शिकार हुआ।
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283 मरीजों की स्क्रीनिंग में तीन एचआईवी संक्रमित मिले हैं। ऐसे में जिले के सभी 3702 टीबी मरीजों की स्क्रीनिंग के निर्देश दिए गए हैं। टीबी की पुष्टि होते ही नए मरीजों की एचआईवी जांच भी करायी जा रही है। इसके साथ ही सभी चिकित्सा इकाइयों और ओपीडी में आने वाले संदिग्ध तथा गंभीर लक्षण वाले मरीजों की एचआईवी की जांच की जाएगी।
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विभाग द्वारा स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग के साथ-साथ जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी स्तर पर तैनात चिकित्सकों एवं पैरामेडिकल स्टाफ को विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। ओपीडी में आने वाले लंबे समय से बीमार, रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी या लगातार खांसी से पीड़ित मरीजों का अनिवार्य रूप से एचआईवी और टीबी टेस्ट कराने को कहा गया है।
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जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. प्रवीण भारती ने बताया कि प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होते ही बीमारियां घेर लेती हैं। लगातार खांसी व घटते वजन पर टीबी की जांच करा ली जाती थी। टीबी की पुष्टि होते ही मरीज का उपचार शुरू कर दिया जाता था। जांच में यह सामने आ रहा है कि एचआईवी संक्रमित होने के कारण मरीज की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हुई और वह टीबी का शिकार हुआ।