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पैमाइश को गई टीम विरोध के बाद बैरंग लौटी
अमर उजाला, हाथरस
Updated Sun, 04 Dec 2016 11:48 PM IST
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मीतई में जमीन की पैमाइश करते राजस्व कर्मचारी।
- फोटो : अमर उजाला
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गांव मीतई में विधायक की शिकायत पर जमीन की पैमाइश के लिए गई राजस्व टीम दूसरे पक्ष के विरोध के बाद वापस लौट आई है। इस पक्ष का कहना था कि हमारे पास स्टे है। लिहाजा इस जमीन की पैमाइश नहीं की जा सकती, जबकि विधायक का कहना है कि इन लोगों ने उनकी करीब दो बीघा जमीन अपने रकबे में जोत रखी है और इस जमीन का स्टे से कोई मतलब नहीं है।
दरअसल, विधायक देवेंद्र अग्रवाल पुत्र महेंद्रनाथ अग्रवाल निवासी कंचन नगर हाथरस ने एसडीएम सदर के यहां शिकायत दी कि वह गांव मीतई में एक जमीन के काश्तकार हैं और इस पर काबिज भी हैं। उनकी इन भूमि में से कुछ भूमि को पड़ोसी किसानों ने अपनी कृषि भूमि में मिलाकर कब्जा कर लिया है, जिससे उनकी हकतलफी हो रही है।
उन्होंने एसडीएम से इस जमीन की पैमाइश कराके उनकी भूमि का सीमांकन कराने की मांग की थी। एसडीएम ने तहसीलदार सदर को टीम बनाकर समस्या का समाधान कराने के निर्देश दिए। तहसीलदार ने नायब तहसीलदार को राजस्व टीम के साथ नियमानुसार समाधान कराने के लिए निर्देशित किया।
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लेखपालों की टीम रविवार को इस जमीन की पैमाइश कराने पहुंची, लेकिन वहां दूसरे पक्ष के लोग पहुंच गए और पैमाइश पर यह कहकर आपत्ति जताई कि जमीन पर स्टे है। इन लोगों की राजस्व टीम से नोक-झोंक भी हुई, जिसके बाद टीम वापस लौट आई।
मीतई में मेरे खेत का करीब दो बीघा रकबा कम है। मैने तहसील अधिकारियों को इसे पूरा कराने के लिए दरख्वास्त दी है। पड़ोसी किसान मेरे खेत को जोत रहे हैं, जबकि वे जिस स्टे की बात कर रहे हैं, उससे मेरी जमीन का कोई मतलब नहीं है। मैने इन लोगों से कहा है कि वह अपना भाग ले लें और मेरी जमीन का भाग मुझे दे दें। लेखपालों ने मेरे साथ इनकी जमीन की भी नाप-तोल की है, लेकिन यह बेवजह विवाद खड़ा कर रहे हैं। मेरा इरादा किसी की इंच भर जमीन भी फालतू लेने का नहीं है।
देवेंद्र अग्रवाल, विधायक सादाबाद
विधायक ने जमीन के संबंध में अपने कागजात पेश किए हैं। अगर दूसरा पक्ष भी अपने कागजात पेश करता है तो उनका परीक्षण करने के बाद कानून के अनुसार ही निर्णय लिया जाएगा।
राकेश गुप्ता, एसडीएम सदर
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दरअसल, विधायक देवेंद्र अग्रवाल पुत्र महेंद्रनाथ अग्रवाल निवासी कंचन नगर हाथरस ने एसडीएम सदर के यहां शिकायत दी कि वह गांव मीतई में एक जमीन के काश्तकार हैं और इस पर काबिज भी हैं। उनकी इन भूमि में से कुछ भूमि को पड़ोसी किसानों ने अपनी कृषि भूमि में मिलाकर कब्जा कर लिया है, जिससे उनकी हकतलफी हो रही है।
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उन्होंने एसडीएम से इस जमीन की पैमाइश कराके उनकी भूमि का सीमांकन कराने की मांग की थी। एसडीएम ने तहसीलदार सदर को टीम बनाकर समस्या का समाधान कराने के निर्देश दिए। तहसीलदार ने नायब तहसीलदार को राजस्व टीम के साथ नियमानुसार समाधान कराने के लिए निर्देशित किया।
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लेखपालों की टीम रविवार को इस जमीन की पैमाइश कराने पहुंची, लेकिन वहां दूसरे पक्ष के लोग पहुंच गए और पैमाइश पर यह कहकर आपत्ति जताई कि जमीन पर स्टे है। इन लोगों की राजस्व टीम से नोक-झोंक भी हुई, जिसके बाद टीम वापस लौट आई।
मीतई में मेरे खेत का करीब दो बीघा रकबा कम है। मैने तहसील अधिकारियों को इसे पूरा कराने के लिए दरख्वास्त दी है। पड़ोसी किसान मेरे खेत को जोत रहे हैं, जबकि वे जिस स्टे की बात कर रहे हैं, उससे मेरी जमीन का कोई मतलब नहीं है। मैने इन लोगों से कहा है कि वह अपना भाग ले लें और मेरी जमीन का भाग मुझे दे दें। लेखपालों ने मेरे साथ इनकी जमीन की भी नाप-तोल की है, लेकिन यह बेवजह विवाद खड़ा कर रहे हैं। मेरा इरादा किसी की इंच भर जमीन भी फालतू लेने का नहीं है।
देवेंद्र अग्रवाल, विधायक सादाबाद
विधायक ने जमीन के संबंध में अपने कागजात पेश किए हैं। अगर दूसरा पक्ष भी अपने कागजात पेश करता है तो उनका परीक्षण करने के बाद कानून के अनुसार ही निर्णय लिया जाएगा।
राकेश गुप्ता, एसडीएम सदर