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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   The shells fired at the Dauji temple did not come from Sasni, but from Sasni Gate

Hathras News: दाऊजी मंदिर पर गोले सासनी से नहीं, सासनी गेट से चले

Mon, 14 Sep 2026 01:47 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2026 01:47 AM IST
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The shells fired at the Dauji temple did not come from Sasni, but from Sasni Gate
दाऊजी मंदिर की प्राचीन पर दिखाई दे रहे दागे गए गोलों के छेद। संवाद - फोटो : samvad
मेले से पहले दाऊजी मंदिर पर अंग्रेजों की तोप के गोलों से जुड़ी वर्षों पुरानी कहानी पर नया सवाल खड़ा हुआ है। नए शोध में दावा किया गया है कि गोले 15 किमी दूर सासनी से नहीं, बल्कि महज 1.25 किमी दूर सासनी गेट से दागे गए थे। दिशा, दूरी और भौगोलिक गणनाओं के आधार पर सामने आए इस दावे ने इतिहासप्रेमियों के बीच नई बहस छेड़ दी है।
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माना जाता रहा है कि गोले करीब 15 किमी दूर सासनी के किले से दागे गए थे। श्री कार्त्तवीर्य नक्षत्र ज्योतिष संस्थान के संस्थापक एवं खगोलविद आचार्य विनोद शास्त्री ने खगोलीय यंत्रों और भौगोलिक गणनाओं के आधार पर इस धारणा को गलत बताते हुए हमला हाथरस के सासनी गेट से किए जाने का दावा किया है।
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विनोद शास्त्री के अनुसार मंदिर के शिखर पर गोलों के निशान जिस दिशा में हैं, वह सासनी गेट की ओर पड़ती है। किला मंदिर से सासनी गेट की दूरी करीब 1.25 किमी है, जबकि सासनी कस्बा करीब 15 किमी दूर है। उनके अनुसार मंदिर को केंद्र मानकर सासनी की दिशा करीब 81 डिग्री के कोण पर उत्तर की ओर पड़ती है, जो गोलों के निशानों की दिशा से मेल नहीं खाती। उन्होंने कहा कि उस दौर की तोपों से इतनी दूर से सटीक निशाना साधना तकनीकी रूप से संभव नहीं था। उनका दावा है कि स्थानीय बोलचाल में सासनी गेट के उल्लेख को समय के साथ सासनी के किले से जोड़ दिया गया, जिससे यह धारणा बनी।
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दिशा ने खोला रहस्य
मंदिर के शिखर पर गोलों के निशान पश्चिम दिशा की ओर बताए गए हैं। शोधकर्ता के अनुसार यह दिशा सासनी गेट से मेल खाती है, जबकि सासनी कस्बे की स्थिति उत्तर की ओर तिरछी पड़ती है।


दूरी पर भी उठे सवाल
किला मंदिर से सासनी गेट की दूरी करीब 1.25 किमी बताई गई है। शोध में आधुनिक युद्धक टैंकों की प्रभावी मारक क्षमता से तुलना करते हुए 15 किमी दूर से ब्रिटिशकालीन तोप से सटीक निशाना साधने के दावे पर सवाल उठाया गया है।
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