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भाजपा और सीमा दोनों की राह हुई आसान
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संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस।
पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय की पत्नी पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय के भाजपा में शामिल होने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सीमा और भाजपा दोनों की राह बेहद आसान हो गई है। भाजपा को इस पद के लिए एक मजबूत चेहरा मिल गया है, जिस पर पार्टी दांव लगा सकती है।
जिला पंचायत अध्यक्ष के होने वाले चुनाव की वजह से ही पार्टी ने अपने निष्कासित नेताओं की वापसी की है। इसकी वजह यह है कि जिन 11 नेताओं की घर वापसी हुई है, उनमें चार या तो खुद जिला पंचायत सदस्य हैं या उनके परिजन सदस्य हैं। ऐसे में पार्टी इस पद पर अपनी जीत निश्चित मान रही है।
इस बार जिला पंचायत के चुनाव में भाजपा कोई खास प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। पार्टी के 24 में से केवल पांच समर्थित उम्मीदवार ही चुनाव जीत सके थे। यदि जिला पंचायत अध्यक्ष पद की स्थिति को देखें तो पिछले वर्षों में इस पद पर ज्यादातर रामवीर उपाध्याय के परिजनों का ही कब्जा रहा है।
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सीमा उपाध्याय दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं तो उनके देवर विनोद उपाध्याय भी जिला पंचायत अध्यक्ष रहे। इस बार उपाध्याय परिवार इस चुनाव में काफी घाटे में रहा। पिछले जिला पंचायत बोर्ड में इस परिवार के चार सदस्य विनोद उपाध्याय, उनकी पत्नी सरोज उपाध्याय, रामेश्वर उपाध्याय व उनकी पत्नी कल्पना उपाध्याय निर्वाचित हुई थीं। इस बार केवल सीमा उपाध्याय ही जीत सकी हैं।
इसके बाद भी रामवीर ने यह घोषणा कर दी थी कि सीमा उपाध्याय अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेगी। वहीं भाजपा ने भी यह घोषणा की थी अध्यक्ष पद पर पार्टी का ही कब्जा होगा। भाजपा के सामने सबसे बड़ी समस्या यह आ रही थी कि उसके पास कोई दमदार उम्मीदवार नहीं था। सूत्रों की मानें तो यह बात पार्टी हाईकमान को भी मालूम थी।
ऐसे में यहां की स्थिति के बारे में स्थानीय नेताओं से पार्टी आलाकमान ने रिपोर्ट ली। रामवीर से भी संपर्क किया और फिर यह तय हुआ कि सीमा उपाध्याय भाजपा में शामिल होंगी और साथ ही यह समझौता भी हुआ कि सीमा को भाजपा अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ाएगी। पार्टी ने इस जिले में अपना जनाधार और बढ़ाने के लिए सीमा को पार्टी में शामिल कर लिया। ऐसे में भाजपा को सीमा के रूप में एक जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में एक मजबूत प्रत्याशी मिल गया है।
- अभी पार्टी नेतृत्व को यह तय करना है कि वह जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में किसे उम्मीदवार बनाएगी। इसकी लिस्ट पार्टी नेतृत्व ही फाइनल करेगा। पार्टी के पास दो तिहाई बहुमत है।
-गौरव आर्य, जिलाध्यक्ष भाजपा
आलाकमान ने अपने हाथ में ली कमान, तब हुई एंट्री
सूत्रों की मानें तो सीमा उपाध्याय को भाजपा में शामिल करने की पूरी प्लानिंग हाईकमान स्तर से ही हुई। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं के काफी घनिष्ठ संबंध हैं और इसके चलते उनके बेटे चिरागवीर उपाध्याय की भाजपा में एंट्री हुई थी।
हालांकि पंचायत चुनाव में उनका निष्कासन हो गया था। अब जब सीमा उपाध्याय निर्दलीय सदस्य चुन गईं तो फिर सूत्रों के मुताबिक रामवीर की पार्टी के प्रदेश नेतृत्व से वार्ता हुई और तब सीमा की पार्टी में एंट्री हुई। एक प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी की भी इसमें अहम भूमिका रही।
फिर वही सवाल, कौन देगा सीमा को टक्कर
हालांकि भाजपा यह दावा कर रही है कि उसके समर्थन में जिला पंचायत के 18 सदस्य हैं। सीमा उपाध्याय के पार्टी में आने के बाद यह दावा सही भी हो सकता है, लेकिन अभी भी सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीमा के सामने आखिर विपक्ष किसे मैदान में उतारेगा। सीमा के भाजपा में शामिल होने और भाजपा के बागियों को पार्टी में वापस लेने के सत्ता विरोधी दल फिर से इस चुनाव के लिए अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
दो बार जिपं. अध्यक्ष, एक बार सांसद रह चुकी हैं सीमा
पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय का राजनीतिक करियर भी लंबा है। वह वर्ष 2000 से हाथरस जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं तो उसके बाद वह वर्ष 2009 में फतेहपुर सीकरी से सांसद चुनी गईं। वहां उन्होंने सिने स्टार राजबब्बर को मात दी थी। हालांकि उसके बाद वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में वह हार गई थीं।
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पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय की पत्नी पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय के भाजपा में शामिल होने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए सीमा और भाजपा दोनों की राह बेहद आसान हो गई है। भाजपा को इस पद के लिए एक मजबूत चेहरा मिल गया है, जिस पर पार्टी दांव लगा सकती है।
जिला पंचायत अध्यक्ष के होने वाले चुनाव की वजह से ही पार्टी ने अपने निष्कासित नेताओं की वापसी की है। इसकी वजह यह है कि जिन 11 नेताओं की घर वापसी हुई है, उनमें चार या तो खुद जिला पंचायत सदस्य हैं या उनके परिजन सदस्य हैं। ऐसे में पार्टी इस पद पर अपनी जीत निश्चित मान रही है।
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इस बार जिला पंचायत के चुनाव में भाजपा कोई खास प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। पार्टी के 24 में से केवल पांच समर्थित उम्मीदवार ही चुनाव जीत सके थे। यदि जिला पंचायत अध्यक्ष पद की स्थिति को देखें तो पिछले वर्षों में इस पद पर ज्यादातर रामवीर उपाध्याय के परिजनों का ही कब्जा रहा है।
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सीमा उपाध्याय दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं तो उनके देवर विनोद उपाध्याय भी जिला पंचायत अध्यक्ष रहे। इस बार उपाध्याय परिवार इस चुनाव में काफी घाटे में रहा। पिछले जिला पंचायत बोर्ड में इस परिवार के चार सदस्य विनोद उपाध्याय, उनकी पत्नी सरोज उपाध्याय, रामेश्वर उपाध्याय व उनकी पत्नी कल्पना उपाध्याय निर्वाचित हुई थीं। इस बार केवल सीमा उपाध्याय ही जीत सकी हैं।
इसके बाद भी रामवीर ने यह घोषणा कर दी थी कि सीमा उपाध्याय अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेगी। वहीं भाजपा ने भी यह घोषणा की थी अध्यक्ष पद पर पार्टी का ही कब्जा होगा। भाजपा के सामने सबसे बड़ी समस्या यह आ रही थी कि उसके पास कोई दमदार उम्मीदवार नहीं था। सूत्रों की मानें तो यह बात पार्टी हाईकमान को भी मालूम थी।
ऐसे में यहां की स्थिति के बारे में स्थानीय नेताओं से पार्टी आलाकमान ने रिपोर्ट ली। रामवीर से भी संपर्क किया और फिर यह तय हुआ कि सीमा उपाध्याय भाजपा में शामिल होंगी और साथ ही यह समझौता भी हुआ कि सीमा को भाजपा अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ाएगी। पार्टी ने इस जिले में अपना जनाधार और बढ़ाने के लिए सीमा को पार्टी में शामिल कर लिया। ऐसे में भाजपा को सीमा के रूप में एक जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में एक मजबूत प्रत्याशी मिल गया है।
- अभी पार्टी नेतृत्व को यह तय करना है कि वह जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में किसे उम्मीदवार बनाएगी। इसकी लिस्ट पार्टी नेतृत्व ही फाइनल करेगा। पार्टी के पास दो तिहाई बहुमत है।
-गौरव आर्य, जिलाध्यक्ष भाजपा
आलाकमान ने अपने हाथ में ली कमान, तब हुई एंट्री
सूत्रों की मानें तो सीमा उपाध्याय को भाजपा में शामिल करने की पूरी प्लानिंग हाईकमान स्तर से ही हुई। पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं के काफी घनिष्ठ संबंध हैं और इसके चलते उनके बेटे चिरागवीर उपाध्याय की भाजपा में एंट्री हुई थी।
हालांकि पंचायत चुनाव में उनका निष्कासन हो गया था। अब जब सीमा उपाध्याय निर्दलीय सदस्य चुन गईं तो फिर सूत्रों के मुताबिक रामवीर की पार्टी के प्रदेश नेतृत्व से वार्ता हुई और तब सीमा की पार्टी में एंट्री हुई। एक प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी की भी इसमें अहम भूमिका रही।
फिर वही सवाल, कौन देगा सीमा को टक्कर
हालांकि भाजपा यह दावा कर रही है कि उसके समर्थन में जिला पंचायत के 18 सदस्य हैं। सीमा उपाध्याय के पार्टी में आने के बाद यह दावा सही भी हो सकता है, लेकिन अभी भी सबसे बड़ा सवाल यह है कि सीमा के सामने आखिर विपक्ष किसे मैदान में उतारेगा। सीमा के भाजपा में शामिल होने और भाजपा के बागियों को पार्टी में वापस लेने के सत्ता विरोधी दल फिर से इस चुनाव के लिए अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
दो बार जिपं. अध्यक्ष, एक बार सांसद रह चुकी हैं सीमा
पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय का राजनीतिक करियर भी लंबा है। वह वर्ष 2000 से हाथरस जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं तो उसके बाद वह वर्ष 2009 में फतेहपुर सीकरी से सांसद चुनी गईं। वहां उन्होंने सिने स्टार राजबब्बर को मात दी थी। हालांकि उसके बाद वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में वह हार गई थीं।