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Hathras News: विदेशी मशीनों का कमाल, एक साथ बुवाई व मेड़बंदी
Tue, 20 Oct 2026 01:34 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Tue, 20 Oct 2026 01:34 AM IST
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खेती में इस्तेमाल होती आधुनिक मशीन। स्रोत : सोशल मीडिया
- फोटो : Archive
गांव ढकरई में आलू की बुवाई के लिए आधुनिक कृषि तकनीक का इस्तेमाल किसानों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। विदेशों से आयातित भारी-भरकम ट्रैक्टरों और बेल्जियम निर्मित अत्याधुनिक बुवाई मशीनों से एक ही बार में जमीन तैयार करने से लेकर आलू की बुवाई और मेड़ बनाने तक का काम किया जा रहा है।
इस आधुनिक व्यवस्था की खासियत यह है कि ट्रैक्टर के आगे मिट्टी तैयार करने वाली मशीन और पीछे आलू की बुवाई करने वाला प्लांटर लगाया गया है। आगे लगी मशीन मिट्टी को भुरभुरा बनाती है, जबकि पीछे चल रही मशीन निर्धारित दूरी और गहराई पर आलू के बीज तथा खाद डालते हुए मेड़ तैयार करती जाती है।
पारंपरिक तरीके से आलू की बुवाई करने में किसानों को खेत की जुताई, मिट्टी को समतल करने और बुवाई के लिए कई बार ट्रैक्टर चलाना पड़ता है। इससे डीजल, समय और मजदूरी पर खर्च बढ़ता है। आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से इन कार्यों को एक साथ पूरा करने में मदद मिल रही है। इससे खेत की तैयारी और बुवाई में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है।
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इन मशीनों को चलाने के लिए अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रैक्टर में आगे और पीछे मशीनों को संचालित करने के लिए अलग-अलग पावर टेक-ऑफ और लिफ्ट सिस्टम की सुविधा होती है। आधुनिक नियंत्रण प्रणाली की मदद से मशीनों के संचालन और बुवाई की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
गांव में इस तकनीक को देखकर किसान खेती के बदलते तौर-तरीकों को करीब से समझ रहे हैं। हालांकि, इससे लागत में कितनी कमी आएगी और आलू की पैदावार पर कितना असर पड़ेगा, इसका वास्तविक आकलन फसल तैयार होने के बाद ही किया जा सकेगा।
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इस आधुनिक व्यवस्था की खासियत यह है कि ट्रैक्टर के आगे मिट्टी तैयार करने वाली मशीन और पीछे आलू की बुवाई करने वाला प्लांटर लगाया गया है। आगे लगी मशीन मिट्टी को भुरभुरा बनाती है, जबकि पीछे चल रही मशीन निर्धारित दूरी और गहराई पर आलू के बीज तथा खाद डालते हुए मेड़ तैयार करती जाती है।
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पारंपरिक तरीके से आलू की बुवाई करने में किसानों को खेत की जुताई, मिट्टी को समतल करने और बुवाई के लिए कई बार ट्रैक्टर चलाना पड़ता है। इससे डीजल, समय और मजदूरी पर खर्च बढ़ता है। आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से इन कार्यों को एक साथ पूरा करने में मदद मिल रही है। इससे खेत की तैयारी और बुवाई में लगने वाला समय कम होने की उम्मीद है।
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इन मशीनों को चलाने के लिए अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रैक्टर में आगे और पीछे मशीनों को संचालित करने के लिए अलग-अलग पावर टेक-ऑफ और लिफ्ट सिस्टम की सुविधा होती है। आधुनिक नियंत्रण प्रणाली की मदद से मशीनों के संचालन और बुवाई की प्रक्रिया को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
गांव में इस तकनीक को देखकर किसान खेती के बदलते तौर-तरीकों को करीब से समझ रहे हैं। हालांकि, इससे लागत में कितनी कमी आएगी और आलू की पैदावार पर कितना असर पड़ेगा, इसका वास्तविक आकलन फसल तैयार होने के बाद ही किया जा सकेगा।