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Hathras News: झूलों की रोज होगी तकनीकी जांच, जारी होगी नई एनओसी
Sat, 19 Sep 2026 02:26 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Sat, 19 Sep 2026 02:26 AM IST
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मेला श्रीदाऊजी महाराज के पंडालों में लगे झूले। संवाद
- फोटो : Samvad
मेला श्रीदाऊजी महाराज में झूला झूलने वालों की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने निगरानी व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। अमर उजाला में संवाद न्यूज एजेंसी की खबर प्रकाशित होने के बाद अब प्रशासन ने निर्णय लिया है कि सभी 16 बड़े झूलों की रोजाना तकनीकी जांच होगी और प्रतिदिन की फिटनेस रिपोर्ट के आधार पर ही दैनिक एनओसी जारी की जाएगी।
मेला परिसर में बच्चों, युवाओं और महिलाओं की उमड़ती भारी भीड़ को देखते हुए यह सख्त फैसला लिया गया है। आंकड़ों के अनुसार मेले में लगे बड़े झूलों जैसे जाॅइंट व्हील, नाव, ब्रेक डांस व ड्रैगन ट्रेन में रोजाना औसतन तीन हजार से अधिक लोग रोमांच का अनुभव करते हैं। वहीं बिना एनओसी के चलने वाले बच्चों के मिक्की माउस, छोटी रेलगाड़ी और छोटे झूलों में प्रतिदिन 10,000 से ज्यादा बच्चे झूलते हैं। ऐसे में किसी भी तकनीकी चूक या नट-बोल्ट के ढीलेपन से बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
नई व्यवस्था के तहत लोक निर्माण विभाग की तकनीकी इंजीनियरों की टीम प्रतिदिन दोपहर में झूलों का भौतिक सत्यापन करेगी। टीम द्वारा झूलों के स्ट्रक्चर, फाउंडेशन, मोटर-गियर बॉक्स, बेल्ट, विद्युत वायरिंग और आपातकालीन ब्रेकिंग सिस्टम की बारीकी से जांच की जाएगी। यदि किसी झूले में मामूली सी भी तकनीकी खामी पाई जाती है, तो उसे तुरंत ठीक कराया जाएगा। लोनिवि के अधिशासी अभियंता संजीव कुमार वर्मा ने बताया कि संपूर्ण संतुष्टि और ट्रायल के बाद ही उस झूले को उस दिन के संचालन की एनओसी मिलेगी।
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पुलिस प्रभारी सुनिश्चित करेंगे नो-एनओसी, नो-रन
लोनिवि की तकनीकी टीम द्वारा प्रतिदिन तैयार की जाने वाली रिपोर्ट सीधे मेला मजिस्ट्रेट और मेला कोतवाली प्रभारी को भेजी जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिस झूले को उस दिन की एनओसी नहीं मिलेगी, उसका संचालन किसी भी सूरत में नहीं होने देने की सीधी जिम्मेदारी मेला पुलिस प्रभारी की होगी। पुलिसकर्मी झूला सेक्टरों में लगातार गश्त कर यह सुनिश्चित करेंगे कि बिना वैध दैनिक प्रमाणपत्र के किसी भी झूले का स्विच ऑन न हो सके।
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मेला परिसर में बच्चों, युवाओं और महिलाओं की उमड़ती भारी भीड़ को देखते हुए यह सख्त फैसला लिया गया है। आंकड़ों के अनुसार मेले में लगे बड़े झूलों जैसे जाॅइंट व्हील, नाव, ब्रेक डांस व ड्रैगन ट्रेन में रोजाना औसतन तीन हजार से अधिक लोग रोमांच का अनुभव करते हैं। वहीं बिना एनओसी के चलने वाले बच्चों के मिक्की माउस, छोटी रेलगाड़ी और छोटे झूलों में प्रतिदिन 10,000 से ज्यादा बच्चे झूलते हैं। ऐसे में किसी भी तकनीकी चूक या नट-बोल्ट के ढीलेपन से बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।
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नई व्यवस्था के तहत लोक निर्माण विभाग की तकनीकी इंजीनियरों की टीम प्रतिदिन दोपहर में झूलों का भौतिक सत्यापन करेगी। टीम द्वारा झूलों के स्ट्रक्चर, फाउंडेशन, मोटर-गियर बॉक्स, बेल्ट, विद्युत वायरिंग और आपातकालीन ब्रेकिंग सिस्टम की बारीकी से जांच की जाएगी। यदि किसी झूले में मामूली सी भी तकनीकी खामी पाई जाती है, तो उसे तुरंत ठीक कराया जाएगा। लोनिवि के अधिशासी अभियंता संजीव कुमार वर्मा ने बताया कि संपूर्ण संतुष्टि और ट्रायल के बाद ही उस झूले को उस दिन के संचालन की एनओसी मिलेगी।
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पुलिस प्रभारी सुनिश्चित करेंगे नो-एनओसी, नो-रन
लोनिवि की तकनीकी टीम द्वारा प्रतिदिन तैयार की जाने वाली रिपोर्ट सीधे मेला मजिस्ट्रेट और मेला कोतवाली प्रभारी को भेजी जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिस झूले को उस दिन की एनओसी नहीं मिलेगी, उसका संचालन किसी भी सूरत में नहीं होने देने की सीधी जिम्मेदारी मेला पुलिस प्रभारी की होगी। पुलिसकर्मी झूला सेक्टरों में लगातार गश्त कर यह सुनिश्चित करेंगे कि बिना वैध दैनिक प्रमाणपत्र के किसी भी झूले का स्विच ऑन न हो सके।