{"_id":"594ea5d14f1c1b2d778b4579","slug":"synthetic-dyes-in-foods-in-hathras","type":"story","status":"publish","title_hn":"खाद्य पदार्थों में सिंथेटिक रंगों की मिलावट ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खाद्य पदार्थों में सिंथेटिक रंगों की मिलावट
अमर उजाला ब्यूरो/ हाथरस।
Updated Sat, 24 Jun 2017 11:36 PM IST
विज्ञापन
synthetic
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में मिलावटखोर चंद रुपयों के लालच में लोगों की जान से खिलवाड़ करने पर तुले हुए हैं। एफडीए की जांच में छह खाद्य पदार्थों में न केवल मिलावट पाई गई है, बल्कि कुछ में सिंथेटिक रंगों के मिलाने की बात सामने आई है जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माने जाते हैं। यही वजह है कि एफडीए ने इन रंगों की मिलावट पाए जाने पर खाद्य पदार्थों को असुरक्षित श्रेणी में रखा है।
जांच में हसायन के विष्णु कुमार का मिल्क पाउडर, मीतई के योगेंद्र शर्मा का गाय का दूध, पसरट्टा बाजार के रामकुमार एंड संस का सिंथेटिक कलर व सीयल के नारायन सिंह के बेसन के लड्डू मानकों पर खरे नहीं उतर सके। वहीं, एफडीए ने 21 नवंबर 16 को चंदपा के बघना गांव में जितेंद्र कुमार के यहां से सोनपपड़ी का नमूना लिया था। 22 फरवरी को मोहनगंज से दीपक वार्ष्णेय के यहां से मुरली ब्रांड नमकीन का नमूना भरा गया था।
दोनों ही खाद्य पदार्थों में सिंथेटिक रंगों की मिलावट पाई गई है, जो सेहत के लिए नुकसानदायक है। मिठाई के अलावा केक, बिस्कुट, कुकीज, शीतपेय, बच्चों की टॉफियां, चॉकलेट, सब्जी और फलों को रंगने, में कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किया जाता है जो बेहद खतरनाक है। डॉ. प्रदीप रावत के मुताबिक सिंथेटिक रंगों के कारण एकाग्रता कम हो सकती है।
विज्ञापन
अस्थमा और थायराइड जैसे रोग भी अपनी चपेट में ले सकते हैं। पेट से जुड़ी कई परेशानियां पैदा हो सकती हैं। लंबे समय तक अगर इन सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल किया जाए तो कैंसर होने की आशंका भी बढ़ जाती है। इससे प्रजनन अंग, पेट व लिवर का क्षतिग्रस्त होना, शरीर का विकास रुकना, खून में लाल कणों की कमी, लिवर पर छाले पड़ना आदि समस्याएं होने का खतरा रहता है। मसालों में इस तरह की मिलावट सबसे ज्यादा होती है। इसलिए खुले मसाले न खरीदें। फल व सब्जियों को हमेशा अच्छी तरह धोकर ही प्रयोग करे।
विज्ञापन
जांच में हसायन के विष्णु कुमार का मिल्क पाउडर, मीतई के योगेंद्र शर्मा का गाय का दूध, पसरट्टा बाजार के रामकुमार एंड संस का सिंथेटिक कलर व सीयल के नारायन सिंह के बेसन के लड्डू मानकों पर खरे नहीं उतर सके। वहीं, एफडीए ने 21 नवंबर 16 को चंदपा के बघना गांव में जितेंद्र कुमार के यहां से सोनपपड़ी का नमूना लिया था। 22 फरवरी को मोहनगंज से दीपक वार्ष्णेय के यहां से मुरली ब्रांड नमकीन का नमूना भरा गया था।
विज्ञापन
दोनों ही खाद्य पदार्थों में सिंथेटिक रंगों की मिलावट पाई गई है, जो सेहत के लिए नुकसानदायक है। मिठाई के अलावा केक, बिस्कुट, कुकीज, शीतपेय, बच्चों की टॉफियां, चॉकलेट, सब्जी और फलों को रंगने, में कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल किया जाता है जो बेहद खतरनाक है। डॉ. प्रदीप रावत के मुताबिक सिंथेटिक रंगों के कारण एकाग्रता कम हो सकती है।
विज्ञापन
अस्थमा और थायराइड जैसे रोग भी अपनी चपेट में ले सकते हैं। पेट से जुड़ी कई परेशानियां पैदा हो सकती हैं। लंबे समय तक अगर इन सिंथेटिक रंगों का इस्तेमाल किया जाए तो कैंसर होने की आशंका भी बढ़ जाती है। इससे प्रजनन अंग, पेट व लिवर का क्षतिग्रस्त होना, शरीर का विकास रुकना, खून में लाल कणों की कमी, लिवर पर छाले पड़ना आदि समस्याएं होने का खतरा रहता है। मसालों में इस तरह की मिलावट सबसे ज्यादा होती है। इसलिए खुले मसाले न खरीदें। फल व सब्जियों को हमेशा अच्छी तरह धोकर ही प्रयोग करे।