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स्वाइन फ्लू : कागजों पर जागरूकता.. धरातल पर नियम तार-तार
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बागला जिला अस्पताल में लगी भीड़। संवाद
- फोटो : Samvad
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स्वास्थ्य विभाग कागजों में स्वाइन फ्लू व मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए कागजों पर सतर्कता और जागरूकता के दावे भले कर रहा हो, लेकिन धरातल पर नियम तार-तार होते नजर आ रहे हैं। जिला अस्पताल में इन दिनों मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जिसमें सर्वाधिक संख्या वायरल बुखार, सर्दी और खांसी से पीड़ितों की है।
जमीनी स्तर पर न तो लोग खुद सतर्कता बरत रहे हैं और न ही प्रशासन की ओर से सख्त बचाव उपाय दिखाई दे रहे हैं। बुधवार की सुबह नौ बजे जिला अस्पताल के पंजीकरण काउंटर पर जबरदस्त भीड़ रही। तीन काउंटर पर लंबी कतारें लगी थीं और लोग एक-दूसरे से सटे नजर आए। बीमारी होने के बावजूद कोई मास्क पहने हुए नहीं था।
यही हाल ओपीडी में चिकित्सकों के कक्ष के बाहर, पैथोलॉजी लैब व दवा काउंटर पर देखने को मिला। स्थिति यह रही कि मरीज खुले में ही छींक व खांस रहे थे। न तो चेहरे पर मास्क था और न ही उचित दूरी।
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2800 से अधिक मरीज पहुंचे
जिला अस्पताल में बुधवार को 2600 से अधिक मरीज पहुंचे। इनमें 2262 नए पर्चे बने। फिजिशियन व वरिष्ठ परामर्शदाता के कक्ष पर मरीजों की कतार लगी मिली। बुखार व सर्दी-जुकाम से पीड़ित 512 मरीज पहुंचे। वायरल के कारण बुधवार को पैथोलॉजी की लाइन भी कॉरिडोर तक पहुंच गई। 227 लोगों के सैंपल लिए गए। फिजिशियन डॉ. अवधेश के अनुसार वायरल इन्फ्लूएंजा हवा के माध्यम से तेजी से फैलता है। यदि कोई संक्रमित व्यक्ति बिना मुंह ढंके खांसता या छींकता है तो आसपास मौजूद स्वस्थ लोग भी आसानी से इसकी चपेट में आ जाते हैं। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग जल्दी चपेट में आते हैं।
वायरल से बचाव के उपाय
मास्क पहनें : भीड़भाड़ वाली जगहों और अस्पतालों में जाते समय ट्रिपल-लेयर मास्क का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें।
हाथों की सफाई : साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोएं या अल्कोहल-आधारित सैनिटाइजर का उपयोग करें।
दूरी बनाएं : खांसने या छींकने वाले व्यक्तियों से कम से कम एक मीटर की सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
शिष्टाचार का पालन : छींकते या खांसते समय अपनी कोहनी या टिश्यू से मुंह और नाक को ढंकें।
लक्षण दिखने पर जांच : तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ या गंभीर खांसी होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं और खुद को आइसोलेट करें
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जमीनी स्तर पर न तो लोग खुद सतर्कता बरत रहे हैं और न ही प्रशासन की ओर से सख्त बचाव उपाय दिखाई दे रहे हैं। बुधवार की सुबह नौ बजे जिला अस्पताल के पंजीकरण काउंटर पर जबरदस्त भीड़ रही। तीन काउंटर पर लंबी कतारें लगी थीं और लोग एक-दूसरे से सटे नजर आए। बीमारी होने के बावजूद कोई मास्क पहने हुए नहीं था।
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यही हाल ओपीडी में चिकित्सकों के कक्ष के बाहर, पैथोलॉजी लैब व दवा काउंटर पर देखने को मिला। स्थिति यह रही कि मरीज खुले में ही छींक व खांस रहे थे। न तो चेहरे पर मास्क था और न ही उचित दूरी।
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2800 से अधिक मरीज पहुंचे
जिला अस्पताल में बुधवार को 2600 से अधिक मरीज पहुंचे। इनमें 2262 नए पर्चे बने। फिजिशियन व वरिष्ठ परामर्शदाता के कक्ष पर मरीजों की कतार लगी मिली। बुखार व सर्दी-जुकाम से पीड़ित 512 मरीज पहुंचे। वायरल के कारण बुधवार को पैथोलॉजी की लाइन भी कॉरिडोर तक पहुंच गई। 227 लोगों के सैंपल लिए गए। फिजिशियन डॉ. अवधेश के अनुसार वायरल इन्फ्लूएंजा हवा के माध्यम से तेजी से फैलता है। यदि कोई संक्रमित व्यक्ति बिना मुंह ढंके खांसता या छींकता है तो आसपास मौजूद स्वस्थ लोग भी आसानी से इसकी चपेट में आ जाते हैं। कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग जल्दी चपेट में आते हैं।
वायरल से बचाव के उपाय
मास्क पहनें : भीड़भाड़ वाली जगहों और अस्पतालों में जाते समय ट्रिपल-लेयर मास्क का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें।
हाथों की सफाई : साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोएं या अल्कोहल-आधारित सैनिटाइजर का उपयोग करें।
दूरी बनाएं : खांसने या छींकने वाले व्यक्तियों से कम से कम एक मीटर की सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
शिष्टाचार का पालन : छींकते या खांसते समय अपनी कोहनी या टिश्यू से मुंह और नाक को ढंकें।
लक्षण दिखने पर जांच : तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ या गंभीर खांसी होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं और खुद को आइसोलेट करें