{"_id":"67bf76afb40c9fb3ac0cbafe","slug":"search-for-petroleum-products-is-going-on-with-the-help-of-sensor-equipment-sikandhra-rahu-news-c-63-1-sali1025-102704-2025-02-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hathras News: सेंसर उपकरण से चल रही पेट्रोलियम पदार्थों की खोज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hathras News: सेंसर उपकरण से चल रही पेट्रोलियम पदार्थों की खोज
Thu, 27 Feb 2025 01:46 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
संवाद न्यूज एजेंसी, हाथरस
Updated Thu, 27 Feb 2025 01:46 AM IST
विज्ञापन
क्षेत्र के गांव कचौरा और उसके आसपास के गांवों में पेट्रोलियम पदार्थों की खोज में जियोअल्फा के 300 से ज्यादा कर्मचारी जगह-जगह सेंसर उपकरण लगा रहे हैं। कई जगह उनकी टीम ने विस्फोट भी किया, लेकिन अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली है।
जियोअल्फा कंपनी के संतोष मौर्य ने बताया कि सैटेलाइट जीपीएस सिस्टम के आधार पर कासगंज, एटा, हाथरस, सिकंदराराऊ, फिरोजाबाद, मथुरा में जमीन के नीचे पेट्रोलियम पदार्थों के होने के संकेत प्राप्त हुए थे। इसके बाद कचौरा और आसपास के क्षेत्र को जियोअल्फा के कर्मचारियों ने अनुसंधान का केंद्र बना लिया है।
यहां सैकड़ो जगह सेंसर उपकरण लगाकर एक निश्चित समयावधि के बाद उनकी रीडिंग ली जा रही है। ग्रामीण भी इस सर्वे को लेकर अचंभित हैं। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा कि यहां भी जमीन के नीचे पेट्रोलियम पदार्थ होने की संभावना हो सकती है। कुछ का कहना है कि गंगा जमुना के दोआब बाले इस क्षेत्र में हजारों वर्ष पूर्व हुए परिवर्तन के कारण नीचे तेल के भंडार बन गए हैं, जोकि उपकरणों से अब नजर में आए हैं।
विज्ञापन
इधर, खोजी टीम निरंतर 95 फुट तक बोरिंग कर उसमें विस्फोटक लगाकर विस्फोट कर रही है। कुछ लोगों का कहना है की कुछ समय बाद पता लग जाएगा कि यहां तेल का भंडार है या नहीं। अगर है तो क्या इतना है कि यहां तेल के कुएं बनाकर कच्चा तेल मथुरा रिफाइनरी को भेजा जाएगा।
विज्ञापन
जियोअल्फा कंपनी के संतोष मौर्य ने बताया कि सैटेलाइट जीपीएस सिस्टम के आधार पर कासगंज, एटा, हाथरस, सिकंदराराऊ, फिरोजाबाद, मथुरा में जमीन के नीचे पेट्रोलियम पदार्थों के होने के संकेत प्राप्त हुए थे। इसके बाद कचौरा और आसपास के क्षेत्र को जियोअल्फा के कर्मचारियों ने अनुसंधान का केंद्र बना लिया है।
विज्ञापन
यहां सैकड़ो जगह सेंसर उपकरण लगाकर एक निश्चित समयावधि के बाद उनकी रीडिंग ली जा रही है। ग्रामीण भी इस सर्वे को लेकर अचंभित हैं। उन्हें विश्वास ही नहीं हो रहा कि यहां भी जमीन के नीचे पेट्रोलियम पदार्थ होने की संभावना हो सकती है। कुछ का कहना है कि गंगा जमुना के दोआब बाले इस क्षेत्र में हजारों वर्ष पूर्व हुए परिवर्तन के कारण नीचे तेल के भंडार बन गए हैं, जोकि उपकरणों से अब नजर में आए हैं।
विज्ञापन
इधर, खोजी टीम निरंतर 95 फुट तक बोरिंग कर उसमें विस्फोटक लगाकर विस्फोट कर रही है। कुछ लोगों का कहना है की कुछ समय बाद पता लग जाएगा कि यहां तेल का भंडार है या नहीं। अगर है तो क्या इतना है कि यहां तेल के कुएं बनाकर कच्चा तेल मथुरा रिफाइनरी को भेजा जाएगा।