फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hathras News ›   Sakhiyan facilitated transactions worth Rs 70 crore in five years

Hathras News: सखियां ने पांच साल में कराया 70 करोड़ का लेनदेन

Mon, 07 Jul 2025 12:10 AM IST
Aligarh Bureau अलीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jul 2025 12:10 AM IST
विज्ञापन
Sakhiyan facilitated transactions worth Rs 70 crore in five years
ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को वित्तीय सुविधाएं दिए जाने के लिए शासन स्तर से बैंकिंग संवाददाता सखियों को तैनात किया है। इसमें सखियों की ओर से अपने गांव में ही नकद रुपये सहित अन्य वित्तीय सुविधाएं दी जा रही हैं। इससे सखियां अपने को आत्मनिर्भर बना रही हैं। सखियों ने जनपद में 2021 से अब तक करीब 70 करोड़ का लेनदेन कराया है।
विज्ञापन

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जनपद में 322 सखियों को तैनात किया गया है। इन सखियों की मदद से गांव के लोगों को बैंक खातों से नकदी निकालने के लिए शहर के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। ग्राम स्तर पर यह सखियां उन्हें नकदी मुहैया करा देती हैं। 2021 से अब तक इन 322 सखियों के माध्यम से करीब 70 करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया है। इसमें सखियों को करीब सात लाख रुपये का भुगतान किया गया है। सखियों का कहना है कि उन्हें इस काम ने मानसिक रूप से मजबूत किया है। पहले उन्हें गांव में बहुत कम लोग जानते थे, लेकिन अब अपने गांव ही नहीं बल्कि आसपास के गांव के लोग बैंक सखी दीदी के नाम से जानते हैं।
विज्ञापन




मानदेय व कमीशन में बढ़ोतरी की है

जनपद में सखियों को उनके काम पहचान मिली है। इसके बाद भी उन्हें मिलने वाला कमीशन बहुत कम है। सखियों का कहना है कि इससे जीवन यापन करने का 10 फीसद खर्च भी नहीं निकल पाता। उनकी मांग है कि इसमें कमीशन बढ़ाया जाना चाहिए। कुछ मानदेय भी दिया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन




बीसी सखी बन अन्य कार्य से जुड़ीं महिलाएं

बीसी सखी बनने के बाद गांव की महिलाएं वित्तीय लेनदेन के साथ ही अन्य कार्यों से भी जुड़ी हैं। महिलाओं का कहना है कि पहले वह कुछ लोगों तक सीमित होने के कारण रोजगार के अवसर तलाश नहीं कर पाती थी। इस कार्य के कारण वह कई प्रकार के समूह से जुड़ी व अन्य कई प्रकार से आय के श्रोत खुले हैं।



बातचीत,,,,,,,,,

बहुत ही अच्छा काम है, इस काम ने मुझे एक अलग पहचान दिलाई है। जहां मुझे कोई नहीं जानता था। वहां आज बहुत लोग मुझे जानते हैं लेकिन दिक्कत यह है कि काम में कमाई बहुत कम है। - राधा शर्मा, बीसी सखी, गांव नगला सेवा, सहपऊ।

----

सबसे अच्छी बात यह है कि यह काम कुछ अलग है। उसके साथ ही अधिकारियों का भी हमें पूरा सहयोग मिलता है, लेकिन इसमें आई कार्ड आदि की सुविधा भी दी जानी चािहए। इससे पहचान और अधिक बढ़ जाती है। - लक्ष्मी देवी, बीसी सखी, गांव समामई, सासनी।



इस काम ने मुझे अपनी अलग पहचान दिलाई है। एक समय था जब समूह आदि का काम करने वाली मैं अकेली थी लेकिन आज मुझसे करीब 90 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। जो अपने आप का आत्मनिर्भर बना रही हैं। - सावना बेगम, बीसी, मुरसान।



इस बात में कोई दोराय नहीं कि इस काम से हमारी क्षेत्र में पहचान बनी है। गांव के लोग हमारे पास आते हैं। हम उन्हें परेशानी नहीं होने देते और आसानी से रुपये मुहैया करा देते हैं। मैं अब तक करीब 40 लाख रुपये का लेनेदेन कर चुकी हूं। - पूजा सेंगर, बीसी सखी, सासनी।



हम महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रहे हैं। बीसी सखियां अपने काम में काफी दिलचस्पी ले रही हैं। उनके द्वारा अभी तक करीब 70 करोड़ रुपये के लेनदेन किए गए हैं। - रंजन कुमार, प्रबंधक, एनआरएलएम, हाथरस।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed