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चकबंदी न्यायालय के आदेश नहीं मान रहे राजस्व कर्मी
अमर उजाला ब्यूरो हाथरस।
Updated Thu, 23 Nov 2017 11:48 PM IST
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court
तहसील सासनी के गांव जिरौली निवासी रामेश्वरदयाल शर्मा ने सीएम को एक शिकायत भेजी है। इसमें राजस्व विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारियों पर उसकी जमीन का अवैधानिक रूप से नामांतरण करने के आरोप लगाए गए हैं।
सीएम को भेजी शिकायत में आरोप है कि भूमाफिया पहले राजस्व विभाग के कर्मचारी और अधिकारियों से अभिलेखों में हेराफेरी करा लेते हैं और फिरभूमि पर कब्जा करते हैं, जिससे झगड़े-फसाद पैदा हो रहे हैं। इसके बाद उल्टे-सीधे मुकदमों में भूमि स्वामी को घेर लिया जाता है। आर्थिक तंगी से परेशान होकर जमीन का मालिक न्याय के लिए भटकता रहता है और उसे न्याय नहीं मिल पाता है। इसी प्रकार उनके चाचा की मृत्यु अगस्त 1976 में हुई। चाची उनको छोड़कर 1975 में ही चली गईं, जिससे उनकी पैतृक जमीन की मालिक उनकी दादी बनीं।
दादी ने इस जमीन की रजिस्टर्ड वसीयत उनके नाम 1986 में की। दादी की मृत्यु 1996 में हुई। इसके बाद कुछ लोगों ने सक्रियता दिखाकर उस जमीन में चाची को हिस्सेदार बनवाकर इस भूमि का बैनामा करा लिया। इसके बाद उन्होंने चकबंदी न्यायालय में अपील की, जिसमें 25 नवंबर 2006 को खतौनी पर अमल दरामद करने के उसके पक्ष में आदेश दिए गए, लेकिन इस आदेश को राजस्व अधिकारी व कर्मचारी आज भी नहीं मान रहे हैं और चकबंदी न्यायालय के आदेश का अब तक अनुपालन नहीं हुआ है।
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सीएम को भेजी शिकायत में आरोप है कि भूमाफिया पहले राजस्व विभाग के कर्मचारी और अधिकारियों से अभिलेखों में हेराफेरी करा लेते हैं और फिरभूमि पर कब्जा करते हैं, जिससे झगड़े-फसाद पैदा हो रहे हैं। इसके बाद उल्टे-सीधे मुकदमों में भूमि स्वामी को घेर लिया जाता है। आर्थिक तंगी से परेशान होकर जमीन का मालिक न्याय के लिए भटकता रहता है और उसे न्याय नहीं मिल पाता है। इसी प्रकार उनके चाचा की मृत्यु अगस्त 1976 में हुई। चाची उनको छोड़कर 1975 में ही चली गईं, जिससे उनकी पैतृक जमीन की मालिक उनकी दादी बनीं।
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दादी ने इस जमीन की रजिस्टर्ड वसीयत उनके नाम 1986 में की। दादी की मृत्यु 1996 में हुई। इसके बाद कुछ लोगों ने सक्रियता दिखाकर उस जमीन में चाची को हिस्सेदार बनवाकर इस भूमि का बैनामा करा लिया। इसके बाद उन्होंने चकबंदी न्यायालय में अपील की, जिसमें 25 नवंबर 2006 को खतौनी पर अमल दरामद करने के उसके पक्ष में आदेश दिए गए, लेकिन इस आदेश को राजस्व अधिकारी व कर्मचारी आज भी नहीं मान रहे हैं और चकबंदी न्यायालय के आदेश का अब तक अनुपालन नहीं हुआ है।
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